
अफगानिस्तान में ड्रोन विमानों से हमले कर तालिबान को मच्छरों की तरह मसल रही अमेरिकी सेना की सफलताओं की चमक से दुनिया भर की वायुसेनाओं की आंखे चौंधियाने लगी हैं। वे भी अपनी सरकारों से ऐसे ही मानव रहित विमानों की मांग कर रही हैं। पाकिस्तानी वायुसेना तो ड्रोन विमान हासिल करने के लिए अनेक बार अमेरिका के आगे गिड़गिड़ा तक चुकी है। एशिया में बड़ी और लम्बी दूरी तक मार करने वाले वायुसेनाओं में शुमार भारतीय वायुसेना भी अब मानव रहित ड्रोन विमानों की आवश्यकता महसूस कर रही है। यूसीएवी तकनीकी नाम वाले ये विमान अचूक हमलों के कारण उन इलाकों में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं जहां गुरिल्ला हमलावर हमले करके अपनी मांदों में जा छिपते हैं।
भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल पीवी नायक ने कहा है कि मानव रहित लड़ाकू विमानों को आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत तक करार दिया है। वैसे भारतीय वायुसेना को पहला मानव रहित लड़ाकू विमान इजरायल से 2011 में मिल जाने की उम्मीद है। हेरोप-2 मानव रहित लड़ाकू विमान मिलने से भारतीय वायुसेना ऐसे विमान रखने वाली एशिया की पहली वायुसेना बन जाएगी। भारत में हथियारों के विकास से जुड़ा संगठन डीआरडीओ भी मानव रहित लड़ाकू विमान का विकास करने में जुटा हुआ है और उसने गैर लड़ाकू मानव रहित विमान तो विकसित भी कर लिया है।
इधर भारतीय वायुसेना अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की राह पर कदम बढ़ा चुके चीन की गतिविधियों से भी चिंतित है। हाल ही वायुसेना प्रमुख ने एरोस्पेस तकनीक के अंतरिक्ष के सैन्यीकरण में इस्तेमाल की चीनी प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अगर पड़ोसी ऐसा कर रहा है तो भारत को भी इस तकनीक में आगे रहना होगा।

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