Sunday, November 1, 2009

विरोध को विराम नहीं दे रहा चीन

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पांच दशक पहले तिब्बत से पलायन के वक्त अरुणाचल प्रदेश के तवांग में पहला पड़ाव डालने वाले तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा चीन के नकारात्मक रुख से परेशान हैं। उनका कहना है कि एक तरफ चीन उनके देश पर कब्जा किए बैठा है और दूसरी ओर संसार के किसी भी देश अथवा क्षेत्र में उनकी यात्रा पर सवाल खड़ा करके चीन उन्हें अलगाववादी नेता साबित करने पर उतारू है।
जापान यात्रा पर गए दलाई लामा ने सात नवम्बर से भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित यात्रा पर चीनी आपत्तियों को आधारहीन बताते हुए कहा कि उनकी यात्रा अनुयाइयों को उपदेश देने तथा वहां एक अस्पताल का उद्घाटन करने तक सीमित है इसके बावजूद चीन अपने विरोध को विराम नहीं दे रहा है। वैसे भी अरुणाचल प्रदेश स्थित तवांग मठ की वह पहली यात्रा नहीं कर रहे हैं। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु चीनी रुख पर आश्चर्यचकित हैं।
नोबेल पुरस्कार विजेता 74 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु जहां भी जाते हैं, चीनी सरकार उसका विरोध करती है। दलाई का दावा है कि वे अपने मत की शिक्षा देने के सिलसिले में अरुणाचल प्रदेश की यात्रा कर रहे हैं। वैसे भी तवांग के संबंध में उनकी अच्छी यादें जुड़ी हुई हैं। जब तिब्बत से उन्हें भागना पड़ा था, तो 50 साल पहले वे तवांग में ही ठहरे थे। भारत और चीन के बीच दलाई लामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा को लेकर हाल में वाकयुद्ध हो चुका है। अरुणाचल पर चीन अपना दावा करता है। उल्लेखनीय है कि दलाई लामा की हाल की ताइवान यात्रा का भी चीन ने विरोध किया था।

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