Sunday, November 1, 2009

फिर उतरा अमेरिकी मुखौटा



भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान ही महत्वपूर्ण
अमेरिका ने भारत के मुकाबले पाकिस्तान को महत्वपूर्ण बताकर अपना मुखौटा फिर उतार दिया है। पिछले दो-तीन साल से दुनिया की एकमात्र महाशक्ति भारत को भरमाने की कोशिश कर रही थी कि भारत अब रणनीतिक रूप से पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भारत से अधिक पाकिस्तान को महत्वपूर्ण बताने वाला खुलासा अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने हाल की पाकिस्तान यात्रा के दौरान किया। यह भारत के लिए बड़ा झटका है। आतंककारियों की फैक्टरी बन चुके पाकिस्तान का अमेरिकी आंखों का तारा बना रहना भारत के लिए आसन्न खतरे का प्रतीक है।
आठ साल पहले अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तान और पाकिस्तानी आतंकियों की भागीदारी के साफ सबूत मिलने के बावजूद पाकिस्तान को खैरात के नाम पर अमेरिका अपनी तिजोरी खोले हुए हैं। ऐसी ही खैरात से पाकिस्तान पिछले बासठ वर्षों से भारत की नाक में दम किए हुए है।
पाकिस्तान को वर्ष 2002 से अब तक 14 करोड़ डालर [करीब 6 अरब 64 करोड़ रुपये] की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा के अलावा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में पुलिस व अन्य प्रशासनिक संगठनों के लिए अलग से भी 103.5 मिलियन डालर [करीब 5 अरब रुपये] की मदद देने का प्रस्ताव दिया। अमेरिकी दरियादिली के कारण ही पाकिस्तान दक्षिण एशिया में स्थिरता लाने की भारत की तमाम कोशिशों की राह में रोडा बनकर खड़ा है।
अमेरिका की वह सलाह भी जले पर नमक छिड़कने जैसी है जिसमें कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान को अपने मतभेद सुलझा कर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान कहा कि यदि पाकिस्तान और भारत के बीच शांति हो और उनके बीच सभी लंबित मुद्दे सुलझा लिए जाएं तो पाकिस्तान आर्थिक विकास के क्षेत्र में राकेट की तरह बुलंदियां छुएगा। क्लिंटन हिलेरी ने कहा कि सामरिक स्थिति और समुद्री मार्ग से पहुंच के कारण पाकिस्तान में 'इकोनामिक पावरहाउस बनने की संभावनाएं हैं लेकिन यह तभी संभव होगा जब वह भारत के साथ अपने संबंधों में सुधार करे।
सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अमेरिका के लिए पाकिस्तान हरावल दस्ते की भूमिका वाला देश नहीं रह गया है। विशाल बाजार वाला भारत मौजूदा हालात में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बड़ी आवश्यकता है। यही महत्व चीन का है। चूंकि चीन पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका को चुनौती देने वाली भूमिका में है इसलिए भारत को अमेरिकी महत्व मिलना शुरू हुआ लेकिन अमेरिकी कैरी लूगर सहायता विधेयक और विदेश मंत्री का खुलासा भारत की आंख खोलने वाला है।

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