<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602</id><updated>2011-11-23T21:54:51.462-08:00</updated><category term='बलूचिस्तान'/><category term='सेना'/><category term='अमेरिका'/><category term='तालिबान'/><category term='बोफोर्स'/><category term='चीन'/><category term='पृथ्वी'/><category term='आईएसआई'/><category term='नक्सली'/><category term='अफगानिस्तान'/><category term='नेपाल'/><category term='मजबूत केन्द्र'/><category term='वायूसेना'/><category term='आजादी'/><category term='आतंकवाद'/><category term='लिट्टे'/><category term='मिसाइल'/><category term='कश्मीर'/><category term='नौसेना'/><category term='जिन्ना'/><category term='ईरान'/><category term='परमाणु'/><category term='पाकिस्तान'/><category term='फतवा'/><category term='जासूसी'/><category term='परमाणु हमला'/><category term='खतरा'/><category term='तिब्बत'/><category term='माओवादी'/><title type='text'>Defence Review</title><subtitle type='html'>Indian defence ministry has been emphasizing on development of defence technology. The ministry thought that solid military defence system is a must for the nation's development. The defence forces like naval, air force and army have not updated versions of weapons with them. The power of latest weapons has been proved in Kargil operation. Indian Armed forces is also emphasizing on logistics system and combat.</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>134</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3406390723049162487</id><published>2009-11-15T10:55:00.000-08:00</published><updated>2009-11-15T10:56:14.601-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अमेरिका'/><title type='text'>सीआईए हुई बेनकाब</title><content type='html'>&lt;strong&gt;आतंककारी शिविरों की थी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तान की पीठ पर बैठे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए फिर एक बार बेनकाब हो गई है। एक फ्रांसिसी आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ ने यह खुलासा करके दुनिया भर में विशेषकर एशिया में सनसनी फैला दी है कि पाकिस्तानी सेना के आतंककारी शिविर सीआईए की सहमति से चलाए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;पाकिस्तान की सेना अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) की सहमति से इस्लामिक आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण शिविर चला रही थी।&lt;br /&gt;विशेषज्ञ ज्यां लूईस ब्रुगइरे ने अपनी एक किताब में खुलासा किया है कि आस्ट्रेलिया में वर्ष 2003 में गिरफ्तार फ्रांसिसी आतंककारियों को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने प्रशिक्षण दिया था। लश्कर-ए-तैयबा भारत के एक राज्य कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बना था। वह अब अलकायदा के अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा हो गया है। ब्रुगइरे ने अपनी किताब में कहा है कि एक आतंककारी ने उन्हें बताया था कि उसने पाकिस्तानी सेना की ओर से चलाए जा रहे लश्कर-ए-तैयबा केआंतकवादी प्रशिक्षण शिविर में वर्ष 2001-02 में ढाई महीने तक प्रशिक्षण लिया था।&lt;br /&gt;शिविर में दो ब्रिटिश तथा दो अमेरिकी नागिरक भी प्रशिक्षण ले रहे थे। करीब दो हजार आतंकवादियों को प्रशिक्षण पाकिस्तानी सेना के अधिकारी दे रहे थे। पाकिस्तानी सेना और लश्कर-ए-तैयबा के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध थे।&lt;br /&gt;शिविर के लिए सामान पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टरों से लाया जाता था। पाकिस्तानी सेना और सीआईए शिविर की निगरानी भी करती थी। अमेरिका पर 11 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान पर अलकायदा से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण नहीं देने के लिए दबाव डाला था।&lt;br /&gt;किताब के मुताबिक अमेरिका ने इन प्रशिक्षण शिविरों में विदेशी लोगों के प्रशिक्षण पर आंख मूंद रखी थी। वैसे भारत लंबे समय से कहता आ रहा है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी (आईएसआई) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकवादियों को आतंकी प्रशिक्षण के लिए शिविर चलाने में मदद कर रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3406390723049162487?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3406390723049162487/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_4713.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3406390723049162487'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3406390723049162487'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_4713.html' title='&lt;strong&gt;सीआईए हुई बेनकाब&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-9104034078285952350</id><published>2009-11-15T10:53:00.000-08:00</published><updated>2009-11-15T10:54:05.701-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>दलाई लामा दास प्रथा के प्रतीक</title><content type='html'>&lt;strong&gt;अमेरिका को भरमाने की चीनी कोशिश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;निर्वासित तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सम्भावित मुलाकात से घबराए चीन ने दलाई लामा को उस दास प्रथा का प्रतीक बताकर अमेरिका को भरमाने की कोशिश शुरू कर दी है जिसके चलते 1965 तक अमेरिका में नीग्रो आबादी दास प्रथा के चलते मानवाधिकारों से वंचित थी। चीन ने दावा किया है कि दलाई लामा तिब्बत में उसी तरह की दास प्रथा के प्रतीक हैं जिस तरह की प्रथा अमेरिका में थी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पुरखे उसके खिलाफ संघर्ष करते थे। वैसे तिब्बत पर कब्जे के बाद यह पहली बार है जब चीन दलाई लामा की किसी अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष से मुलाकात का इस पैमाने पर विरोध कर रहा है कि उसने अमेरिका को अपने ही इतिहास में डुबकी लगाने की चुनौती दी हो। तिब्बत के मुद्दे पर चीनी घबराहट से साफ संकेत हैं कि ड्रैगन की देवताओं की भूमि तिब्बत पर पकड़ कमजोर पड़ रही है। &lt;br /&gt;दलाई लामा और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच मुलाकात के विरोध में चीन ने तिब्बत की कथित दास प्रथा और अमेरिकी दास प्रथा को समानान्तर रखते हुए कहा है कि अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति को तिब्बती नेता के बारे में उसके रुख को समझना चाहिए।&lt;br /&gt;चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जोर देकर कहा है कि चीन अंतरराष्ट्रीय पटल पर दलाई लामा की गतिविधियों के विरोध में है और वह दलाई लामा एवं विदेशी सरकारों के शीर्ष अधिकारियों के बीच किसी भी तरह के संपर्क के खिलाफ है। &lt;br /&gt;चीन ने आरोप लगाया है कि 1959 में दलाई लामा ने एक सामंतवादी दास प्रथा का नेतृत्व किया, जिसे चीन सरकार ने खत्म कर दिया। तिब्बत में दास प्रथा की समाप्ति उतनी ही अहमियत रखती है जितना अमेरिका में दास प्रथा का अंत। उल्लेखनीय है कि &lt;br /&gt;बराक ओबामा ने अपने एक भाषण में कहा था कि वह राष्ट्रपति लिंकन के बहुत आभारी हैं क्योंकि उनके बिना वह अमेरिका का प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति नहीं बन पाते।&lt;br /&gt;चीन ने ओबामा के उसी भाषण की चर्चा करते हुए कहा है कि चूंकि ओबामा दास प्रथा को खत्म करने वाले लिंकन के प्रशंसक हैं, इसलिए चीन मानता है कि ओबामा तिब्बत की स्वतंत्रता और देश को तोडऩे की दलाई लामा के प्रयासों के विरोध के चीनी रुख को समझ सकते हैं। एक अश्वेत राष्ट्रपति होने के नाते वह दास प्रथा की समाप्ति के महत्व को समझते हैं। &lt;br /&gt;चीन ने कहा है कि वह किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के साथ दलाई लामा की मुलाकात का विरोध करता है। चीन का यह बयान तब आया है जब व्हाइट हाउस यह ऐलान कर चुका है कि आगामी चीन दौरे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा दलाई लामा से मुलाकात करेंगे।&lt;br /&gt;चीन का कहना है कि दलाई लामा को लेकर उसके रुख का अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को पूरा ख्याल करना चाहिए। उसने आशा जताई कि ओबामा दलाई लामा से मुलाकात नहीं करेंगे। अमेरिका तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का समर्थन करना बंद करे और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-9104034078285952350?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/9104034078285952350/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_9591.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/9104034078285952350'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/9104034078285952350'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_9591.html' title='&lt;strong&gt;दलाई लामा दास प्रथा के प्रतीक&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2629169223831561555</id><published>2009-11-15T10:50:00.000-08:00</published><updated>2009-11-15T10:52:47.282-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आतंकवाद'/><title type='text'>जनवरी में पेश होगा राणा के खिलाफ आरोपपत्र</title><content type='html'>भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार तहाव्वुर हुसैन राणा केखिलाफ  आरोपपत्र जनवरी दो हजार दस में पेश होगा। अमेरिकी अभियोजकों ने एक आवेदन पेश कर आरोपपत्र पेश करने का अतिरिक्त समय मांगा है। अभियोजकों ने कहा है कि उसे राणा के खिलाफ  हाल के छापों में मिले ताजा सबूतों के परीक्षण के लिए और समय की जरूरत है।&lt;br /&gt;दूसरी ओर फेडरल ब्यूरो ऑफ  इंवेस्टिगेशन (एफबीआई) ने राणा के खिलाफ  एक सीलबंद लिफाफे में ताजा सबूत पेश किए हैं। एफबीआई ने सबूत पेश करते हुए शिकागो की अदालत से निवेदन किया है कि वह लिफाफे को अभी न खोलें।&lt;br /&gt;राणा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए 19 जनवरी तक का समय मांगने संबंधी याचिका को शनिवार को एटॉर्नी पैट्रिक फिटज्गेराल्ड ने इलिनोइस की जिला अदालत में चीफ जज जेम्स एफ होल्डरमेन के समक्ष पेश किया। अदालत को अभी इस संबंध में अपना फैसला सुनाना शेष है।&lt;br /&gt;भारत और डेनमार्क में लश्कर-ए-तैयबा की ओर से आतंकी हमलों की योजना बनाने के आरोप में पिछले महीने एफबीआई द्वारा गिरफ्तार राणा को 19 नवंबर को अदालत में पेश होना है, जिस दिन उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।&lt;br /&gt;इसके पहले 30 अक्टूबर को अदालत ने सरकार के डेविड हेडली संबंधी निर्विरोध प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत उसके खिलाफ  आरोपपत्र जमा करने की समय सीमा को एक जनवरी, 2010 तक बढ़ा दिया गया था। हेडली पर भी राणा के ही समान आरोप लगाए गए हैं।&lt;br /&gt;दूसरी ओर भारत की राणा और हेडली के कथित तौर पर 26/11 के हमलों से जुड़े होने पर उनके प्रत्यर्पण का दबाव बनाने की योजना है। अभियोजकों ने अदालत को बताया कि 18 अक्टूबर को संघीय एजेंटों ने चार अलग-अलग स्थानों पर चार सर्च वारंट जारी किए हैं और अन्य सबूतों के साथ कई कंप्यूटर भी जब्त किए हैं। जांच में कई टेलीफोन वार्ताओं और ईमेल की भी जांच जरूरी है, जिनमें से कई विदेशी भाषा में हैं।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी जब्त कम्प्यूटरों से मिले सबूतों समेत सभी सबूतों की गहराई से जांच में जुटे हैं। इसके साथ ही एफबीआई ने सीलबंद लिफाफे में जांच का विवरण और इसके दौरान मिले सबूत भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।&lt;br /&gt;संघीय अभियोजकों ने कहा कि लिफाफे को बंद रखा जाए, ताकि लगातार चल रही जांच में अवरोध न आए। राणा और हेडली की गतिविधियों के संबंध में जांच भी जारी है, जिसमें विदेशी अधिकारियों का सहयोग प्राप्त करना भी शामिल है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2629169223831561555?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2629169223831561555/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_7999.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2629169223831561555'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2629169223831561555'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_7999.html' title='&lt;strong&gt;जनवरी में पेश होगा राणा के खिलाफ आरोपपत्र&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5817818731397961672</id><published>2009-11-15T10:49:00.000-08:00</published><updated>2009-11-15T10:50:24.825-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अमेरिका'/><title type='text'>उत्तर कोरिया को चेतावनी चीन के लिए संकेत</title><content type='html'>&lt;strong&gt;जापान को घेरने की कोशिशों को सफल नहीं होने देगा अमेरिका&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीन की यात्रा पर रवाना होने से पहले जापान की सुरक्षा के लिए संकट का कारक बन सकने वाले उत्तर कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोडऩे की चेतावनी देकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन को साफ संकेत दिए हैं कि जापान को घेरने की किसी भी देश की कोशिश को अमेरिका सफल नहीं होने देगा। उत्तर कोरिया पूर्वी एशिया में चीनी मदद से परमाणु कार्यक्रम चला रहा है और चीन तथा जापान की ऐतिहासिक दुश्मनी से समूची दुनिया वाकिफ है। माना जाता है कि चीन उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार बनाने में मदद देकर जापान को डराकर रखना चाहता है। &lt;br /&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जापान की राजधानी टोक्यो में यह साफ कर दिया कि अमेरिका और अन्य देश उत्तर कोरिया की परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे और अगले चार साल में दुनिया को परमाणु खतरे से मुक्त कराने की कोशिशों को अमलीजामा पहनाने की कोशिश करेंगे।&lt;br /&gt;ओबामा ने सनतोरी हॉल में एशिया के बारे में अपने व्यापक नीतिगत संबोधन में कहा कि अगले साल हम अपने परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में, दुनिया को चार साल में परमाणु खतरे से मुक्त कराने के लक्ष्य की ओर अग्रसर होंगे।&lt;br /&gt;एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे ओबामा ने साझी सुरक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दुनिया को परमाणु मुक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व अप्रसार संधि को मजबूत करने का मतलब किसी देश को अलग-थलग करना नहीं है बल्कि इसका मतलब यह है कि सभी देश अपनी जिम्मेदारियों को समक्षें।&lt;br /&gt;ओबामा ने कहा इसमें ईरान, उत्तर कोरिया सभी शामिल हैं। उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढऩे के साथ-साथ टकराव और उकसावे का रास्ता चुना है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि रास्ता कहां जाता है। हमने प्योंगयांग पर प्रतिबंध लगाए हैं। हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के सामूहिक विनाश के हथियारों पर रोक लगाने के लिए प्रस्ताव पारित किए हैं।&lt;br /&gt;राष्ट्रपति ने कहा कि हम धमकियों से नहीं डरेंगे, बल्कि अपनी कार्रवाइयों के माध्यम से यह संदेश देते रहेंगे कि अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं का पालन करने से उत्तर कोरिया के इनकार से केवल असुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।&lt;br /&gt;ओबामा ने यह भी कहा कि अमेरिका उत्तर कोरिया को एक अलग भविष्य की पेशकश करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा अलगाव के बजाय उत्तर कोरिया के पास अंतरराष्ट्रीय एकीकरण का भविष्य हो सकता है। वह गरीबी के बजाय आर्थिक संपन्नता का विकल्प चुन सकता है जहां व्यापार, निवेश और पर्यटन से उसकी जनता को बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सकता है। असुरक्षा के बजाय प्योंगयांग सुरक्षा और सम्मान का भविष्य चुन सकता है।&lt;br /&gt;ओबामा ने कहा कि भविष्य के बारे में फैसला करने के लिए उत्तर कोरिया का रास्ता स्पष्ट है। उसके परमाणु कार्यक्रम के बारे में छह पक्षीय वार्ता में उसे शामिल होना होगा, परमाणु अप्रसार संधि सहित पूर्व की प्रतिबद्धताओं का पालन करना होगा तथा कोरियाई प्राय:द्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करना होगा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5817818731397961672?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5817818731397961672/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5817818731397961672'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5817818731397961672'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html' title='&lt;strong&gt;उत्तर कोरिया को चेतावनी चीन के लिए संकेत&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5503098641674146625</id><published>2009-11-12T10:19:00.000-08:00</published><updated>2009-11-12T22:06:36.478-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>भारतीय सपने के पैरों में बेड़ी डालने की कोशिश</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Svz1X13-EGI/AAAAAAAAARA/TgMjm8bhuUw/s1600-h/tibet_map.gif"&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 303px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Svz1X13-EGI/AAAAAAAAARA/TgMjm8bhuUw/s320/tibet_map.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5403463442885382242" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कालिदास के अवतार हैं कुछ भारतीय विश्लेषक&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कालिदास के नए अवतार जैसी भंगिमा वाले भारतीय विश्लेषक भारत और चीन के बीच विवाद की असली जड़ तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा की मुश्कें कसने की परोक्ष सलाह देकर महाशक्ति बनने के भारतीय सपने के पैरों में बेड़ी डालने की कोशिश कर रहे हैं। वे मौजूदा वायुसेनाध्यक्ष व पूर्व नौसेनाध्यक्ष के उन बयानों को आधार बना रहे हैं जिनमें भारतीय सैनिक शक्ति चीन के मुकाबले एक चौथाई बताई गई थी। उनका दावा है कि अगर भारत ने चीन के तिब्बत संबंधी संकेतों को नहीं समझा तो उसे चीन से युद्ध लडऩा पड़ेगा और इसके लिए उसकी क्षमता पर्याप्त नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ग्रेटर तिब्बत की मांग के बाद शुरू हुई धमकी भरी भाषा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विश्लेषकों का कहना है कि भारत ने तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा को धर्मशाला में सरकार बनाने की अनुमति देकर पहले ही चीनी नाराजगी मोल ले रखी थी। चीन का ताजा भारत विरोधी रुख और धमकी भरी भाषा दलाई लामा की ग्रेटर तिब्बत बनाने की मांग के बाद सामने आया है। वैसे भी 1962 के भारत-चीन युद्ध की वजह तिब्बत थी और चालू वर्ष के पहले आठ माह में चीन के गश्ती दलों के 270 बार वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करने से सीमा पर फिर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। तीन साल पहले दिसंबर 2006 में राष्ट्रपति हू जिंताओ के दौरे के बाद ही चीनी सुरक्षा सैनिकों ने लद्दाख में कई जगहों पर 1962 से चली आ रही वास्तविक नियंत्रण रेखा का अतिक्रमण करने के साथ ही अरुणाचल प्रदेश के एक अधिकारी को वीजा देने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं अब वह अरुणाचल प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के भारतीयों को एक अलग कागज पर वीजा जारी करता है। करीब तेरह साल पहले 1996 में तय हुआ था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से दस किमी के दायरे में गश्त नहीं लगाई जाएगी और उसके ऊपर से उड़ान भी प्रतिबंधित रहेगी लेकिन इसकी पालना नहीं हो पाई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तोड़ दीं कूटनीतिक सीमाएं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीन जुलाई 2007 से ल्हासा से शिगास्ते तक जाने वाली रेल लाइन वास्तविक नियंत्रण रेखा के समानांतर बना रहा है। 2010 की गर्मियों तक ये लाइन बनकर तैयार हो जाएगी। चीन सरकार के मुखपत्र द पीपुल्स डेली के अंग्रेजी संस्करण द ग्लोबल टाइम्स में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से अरुणाचल प्रदेश में चुनाव सभा को एक और उकसाने वाला और खतरनाक कदम बताकर अपनी कूटनीतिक सीमाओं को तोड़ दिया। चीन ने पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री की अरुणाचल यात्रा का विरोध उकसाने वाला, खतरनाक और काफी असंतुष्ट जैसे शब्दों के इस्तेमाल के साथ किया था। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फूटी आंख नहीं सुहाती निर्वासित सरकार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;यहां सवाल है कि जब चीन घरेलू मोर्चे पर मंदी, सिक्यांग में बगावत, तिब्बत में गड़बड़ तथा अन्य इलाकों में भी सिर उठाते सामाजिक असंतोष से जूझ रहा है तब क्यों वह भारत की ताकत को तौलने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन तिब्बत में संघर्ष की बदलती तस्वीर अर्थात नौजवानों के लड़ाई में कूदने की बढ़ती घटनाओं से परेशान है। इसके लिए वह भारत को दोषी मानता है क्योंकिउसने तिब्बत को अपने हाल पर नहीं छोड़ा है। दोनों देशों के बीच यही विवाद की असली जड़ है। चीन को भारत के हिमाचल प्रदेश के शहर धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती सरकार फूटी आंख भी पसंद नहीं है। चीन का मानना है कि सैनिक शक्ति से तिब्बत को अपने पंजे में जकडऩे के बाद भी वह तिब्बत के विलय में सफल नहीं हो पाया है क्योंकि दलाई लामा को शरण देकर भारत ने तिब्बत की राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटने नहीं दिया है। 10 मार्च 2008 को ल्हासा और तिब्बत के तीन अन्य प्रांतों में हुए विरोध प्रदर्शन और हिंसा तिब्बत पर चीनी कब्जे के मुद्दे को फिर वहीं ले आए जहां पिछले साठ साल से वह था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अब कमजोर शरणार्थी नहीं है तिब्बती&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीन का आरोप है कि ये सब दलाई लामा ने करवाया और उन पर भारत का वरदहस्त है। चीन दलाई लामा और उनके समर्थकों को सामंती और दमनकारी सत्ता के अवशेष बताकर विश्व को गुमराह करने की कोशिश करता रहा है। लेकिन तिब्बती राष्ट्रवादी समुदाय अब भारत या दूसरे देशों में शरण लेने वाले कुछ शरणार्थियों का कमजोर समूह नहीं रहा। ये अब एक नई तरह का ऐसा देश बनता जा रहा है जिसकी सरकार धर्मशाला में है। दलाई लामा की क्विंघाई प्रांत, घांसू के दक्षिणी हिस्से, सिचुआन का पश्चिमी भाग और युन्नान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से को शामिल करके ग्रेटर तिब्बत को स्वायत्तता देने की मांग भी चीनी परेशानियों की वजह है।  दलाई लामा चाहते हैं कि स्वायत्त ग्रेटर तिब्बत में भाषा, धर्म, संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल, आर्थिक विकास, व्यापार और जन स्वास्थ्य पर फैसले का अधिकार तिब्बत की सरकार के पास ही रहे। जबकि चीन ग्रेटर तिब्बत तथा स्वायत्तता की मांग को देश की अखंडता के लिए बड़ा खतरा मानता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शेखचिल्ली जैसा सपना है तिब्बतियों को बाहर निकालने की सलाह&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारतीय विश्लेषकों का कहना है कि भारत सैन्य ताकत के लिहाज से भले ही अरुणाचल और लद्दाख में अब उतना कमजोर न हो मगर एक छोटे से युद्ध के भी आर्थिक खतरे विनाशकारी होंगे। विदेशी पूंजी गायब हो जाएगी, शेयर बाजार भरभरा पड़ेगा,  ब्याज दरें आसमान छूने लगेंगी, विकास थम जाएगा और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।निसंदेह युद्ध विनाश लाता है। इससे कोई असहमत नहीं होगा लेकिन हमें ये देखना होगा कि अगर हम चीन के सामने समर्पण करके दलाई लामा को भारत से बाहर कर दें, तिब्बती शरणार्थियों को मार-मारकर चीनी नर्क में धकेल दें तो भी क्या कोई गारंटी देगा कि चीन भारत पर गुर्राएगा नहीं। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख पर उसकी लालची नजरें नहीं पड़ेंगी। वह पाकिस्तान को हमारे खिलाफ इस्तेमाल नहीं करेगा, भारत के चारों ओर घेरा डालकर उसकी आर्थिक ताकत को कमजोर करने की साजिश नहीं रचेगा?&lt;br /&gt;विश्लेषकों को अपनी राय देने का अधिकार है लेकिन देश के हित व्यापार से ज्यादा आवश्यक हैं। जब यह स्पष्ट हो चुका है कि चीन दुनिया की महाशक्ति बनने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है तो यह शेखचिल्ली जैसा सपना है कि तिब्बती शरणार्थियों को देश से बाहर करने तथा दलाई लामा को देश में घूमने फिरने से रोककर भारत को चीन से दो-दो हाथ नहीं करने पड़ेंगे? विश्लेषकों की यह राय शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छुपाकर बिल्ली को हमला करने का मौका देने की वकालत करने जैसा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5503098641674146625?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5503098641674146625/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5503098641674146625'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5503098641674146625'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html' title='&lt;strong&gt;भारतीय सपने के पैरों में बेड़ी डालने की कोशिश&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Svz1X13-EGI/AAAAAAAAARA/TgMjm8bhuUw/s72-c/tibet_map.gif' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1389887223027812326</id><published>2009-11-08T11:03:00.000-08:00</published><updated>2009-11-08T11:07:32.722-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>आबादी अनुपात बदलने की फिराक में है पाक सरकार</title><content type='html'>&lt;strong&gt;बलूचिस्तान में अलगाववाद से निपटने की नई रणनीति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अलगाववाद से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में आबादी का अनुपात बदलने की फिराक में है। अफगान शरणार्थियों की बड़ी संख्या तालिबान का पख्तून जिहादी इस राज्य में बड़ी संख्या में प्रवेश कर गया है। इससे अपने ही प्रांत में बलूच अल्पसंख्यक होने के कगार पर आ गए हैं।&lt;br /&gt;बलूचिस्तान में आबादी का अनुपात बदलने की पाक सरकार की रणनीति अब आक्रामक हो गई है। विशेषकर ग्वादर बंदरगाह में चीनी निवेश के बाद पाक सरकार इस क्षेत्र से अलगाववाद का नामोनिशान मिटा देना चाहती है ताकि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस इलाके का दोहन कर ग्वादर बंदरगाह के जरिए अकूत विदेशी मुद्रा कमाई जा सके। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नफरत की गहरी जड़&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत विभाजन के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत पहले दिन से ही पाकिस्तानी हुक्मरानों पर शोषण का आरोप लगाता आया है। आरोप को बेबुनियाद बताकर पाक सरकार ने इस इलाके में हमेशा सेना के माध्यम से दमन की चक्की चलाई है। इसका प्रमाण प्रतिवर्ष बलूचिस्तान के हजारों नागरिकों का लापता हो जाना है। कुछ वर्ष पहले बलूचिस्तान के नेता नबाव बुगती की सैन्य मुठभेड़ में हत्या के बाद से इस इलाके में पाकिस्तान के प्रति नफरत ने गहरी जड़ें जमा ली हैं। &lt;br /&gt;2008 के चुनावों के बाद इस प्रांत में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सरकार बनाकर बलूच समुदाय के असलम रायसानी को मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बावजूद शांति बहाल नहीं हो पाई। अलगाववादी नेता लगातार बलूचिस्तान की आजादी की मांग करते रहते हैं। हालांकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी मुठभेड़ों में मारे गए अकबर बुगती और दूसरे शहीद नेताओं के लिए माफी मांग चुके हैं। फिर भी बलूच वर्षों तक अधिकारों से वंचित रखे जाने की पीड़ा को भूल नहीं पा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दमन से बढ़ी कड़वाहट&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;राज्य में बलोच रिपब्लिकन पार्टी (बीआरपी) पृथकतावादी संगठन बीआरए का राजनीतिक चेहरा है। इस पार्टी के सैकड़ों सदस्य लापता हैं। पार्टी के मुखिया और अकबर बुगती के पोते ब्राहमदाग भूमिगत हैं। पाक सरकार को शक है कि वह अफगानिस्तान में है और भारत अपने दूतावास के जरिए उनकी मदद कर रहा है। बलूच मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान के पास वास्तव में ऐसा कोई सबूत होता कि भारत बलूचों का समर्थन कर रहा है तो क्या सरकार बलूचों को छोड़ देती? बलूचिस्तान में अशांति के पीछे भारत का हाथ होने की कहानी तो संसार को यह बताने के लिए गढ़ी गई है कि सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत भी आतंककारियों को मदद देता है। वैसे बलूचों की लड़ाई इस्लामाबाद में बैठी व्यवस्था से है और वे इसे छुपाते भी नहीं है। यहां तक कि दशकों से जारी सेना का दमन भी उन्हें अपनी कड़वाहट छुपाने से नहीं रोक पाता।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बढ़ रहा है तालिबान का डर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इधर ज्यों-ज्यों इस बात का खुलासा हो रहा है कि बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में अफगानिस्तान के तालिबान की केन्द्रीय कमान के नेता शरण लिए हुए हैं त्यों-त्यों बलूचों में यह डर समा रहा है कि तालिबान उनके सामाजिक ताने-बाने में इस्लामी शरिया को कट्टरता से लागू करने की कोशिश करके पहले से ही कम होती जा रही समूची बलूच जनसंख्या को हथियार उठाने पर बाध्य कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाक सेना को उनके दमन का एक और बहाना मिल जाएगा। तालिबान के जमते कदमों से चिंतित बलूचों का मानना है कि पाकिस्तानी सरकार ने बलोच राष्ट्रवाद और अलगाववादी तत्वों से निपटने के लिए अफगानिस्तान के तालिबान को बेहतर हथियार मानकर उन्हें इस क्षेत्र में अपनी आरामगाह बनाने के लिए प्रोत्साहित ही किया है। गौर करने वाली बात ये है कि बलूचिस्तान भले ही क्षेत्रफल की दृष्टि से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत हो, आबादी के मामले में कुल जनसंख्या में उनकी हिस्सेदारी चार प्रतिशत से भी कम है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गरीब बलूच भी मिला रहे हैं सुर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तालिबान की बढ़ती मौजूदगी से इस प्रांत में रह रहे हजारा और पख्तूनों के मन में भी असुरक्षा का भाव जगा दिया है। हजारा शिया हैं और वे अफगानिस्तान से बलूचिस्तान सिर्फ तालिबान के डर से आए। अब यहां भी आए दिन हजाराओं की हत्या की जा रही है। हजारा मुसलमानों को उनकी वेशभूषा से आसानी से पहचाना जा सकता है। &lt;br /&gt;क्वेटा के पढ़े-लिखे और प्रगतिशील सोच रखने वाले लोगों पर लगातार हमलों से बलूची नेताओं की यह धारणा और मजबूत हुई है कि बलूचिस्तान से प्रगतिशील विचारधारा का नामोनिशान तक मिटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले कुछ माह में अकेले क्वेटा में ही 35 बुद्धिजीवियों की हत्या हो चुकी है। बलूचिस्तान के मध्यमार्गी नेता देश से अलगाव की बात नहीं करते लेकिन वे पाकिस्तान में रहते हुए स्वायत्तता और बुगतियों की विशाल सुई गैस क्षेत्र में स्थित जमीनों के बदले ज्यादा रकम की मांग जरूर करते हैं। पाकिस्तान में लोकतंत्र की वापसी को डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी बलूचियों को लगता है कि उनके साथ दोयम दर्जे का बर्ताव हो रहा है। इसी वजह से इस राज्य में आजाद बलूचिस्तान की मांग दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है। सामंती सरदारों के साथ-साथ यहां का शिक्षित वर्ग और गरीब तबका भी इसमें सुर मिला रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1389887223027812326?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1389887223027812326/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_08.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1389887223027812326'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1389887223027812326'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_08.html' title='&lt;strong&gt;आबादी अनुपात बदलने की फिराक में है पाक सरकार&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2707711910515569851</id><published>2009-11-06T10:14:00.000-08:00</published><updated>2009-11-06T19:34:24.842-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>पूर्व में बुने गए जाल में फिर फंस सकते हैं जरदारी</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 186px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvTqgfst_FI/AAAAAAAAAQw/5B3UG8K6Qhg/s320/asif_ali_zardari.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5401199697109843026" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;छुटकारा पाने की फिराक में है पाकिस्तानी सेना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर फिर आ सकता है। हाल ही राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की ओर से संसद में नेशनल रीकंसीलिएशन आर्डिनेंस [एनआरओ] पेश नहीं करने के फैसले से उत्पन्न स्थिति से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सेना विपक्ष से मिलकर जरदारी को उखाड़ फेंक सकती है। पूर्व में जरदारी के खिलाफ बुने गए भ्रष्टाचार के मामलों के महीन जाल में वे फिर एक बार फंस सकते हैं। जरदारी को वर्ष 2007 में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ  ने पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर के साथ सत्ता बंटवारा समझौते के तहत नेशनल रीकंसीलिएशन आर्डिनेंस [एनआरओ] जारी कर जेल से रिहा किया था। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;थम नहीं पाई सुगबुगाहट&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लम्बी अवधि जेलों में बिताने वाले सिंध के जमींदार आसिफ अली जरदारी पत्नी बेनजीर की बम विस्फोट में मौत के बाद देश के राष्ट्रपति तो बन गए लेकिन उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों की सुगबुगाहट थम नहीं पाई थी। इसी बीच जुलाई में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश को कानून के रूप में तब्दील करने के लिए संसद में इसे पेश करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद से ही जरदारी लगातार कमजोर होते चले गए। इस अध्यादेश का पाकिस्तान में खुलकर विरोध होता रहा है। चूंकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी नेशनल असेंबली में अल्पमत में है और विपक्ष के विरोध के चलते संसद में नेशनल रीकंसीलिएशन आर्डिनेंस [एनआरओ] को विधेयक के रूप में पेश करना करारी हार को आमंत्रित करना है। जरदारी यह जानते हैं इसीलिए वे विधेयक पेश करने से कतरा गए।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सेना को सता रहा है डर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जरदारी अलग-थलग पड़ गए हैं और यही वह बिन्दु है जहां सेना फिर से सत्ता पर कब्जा करने की सोच सकती है। वैसे भी सेना जरदारी से खुश नहीं है। विशेषकर ओबामा सरकार में जरदारी बढ़ते प्रभाव से सेना के जनरल चिंतित हैं। उन्हें यह डर सता रहा है कि ओबामा प्रशासन के दबाव में जरदारी फौज पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।&lt;br /&gt;पाकिस्तान की आजादी के बाद से मुल्क पर अधिकांश समय सैन्य जनरलों ने ही राज किया है। एक गैर सरकारी अमेरिकी संगठन के अनुसार सैन्य जनरलों को इस बात का डर सता रहा है कि अक्टूबर 2010 में जब सेना का मौजूदा नेतृत्व सेवानिवृत्त होगा तो जरदारी अपनी पसंद के जनरल नियुक्त कर सेना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं।&lt;br /&gt;पाकिस्तान की सेना जरदारी के साथ ओबामा प्रशासन के रिश्तों को जनरलों का दबदबा कम करने की कोशिश के रूप में देख रही है। देश में तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बीच पाकिस्तान की सेना पहले ही दबाव में है। घरेलू हालात और अमेरिकी दबाव के कारण लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने की सेना की क्षमता भी सीमित हो गई है। सेना अब जरदारी से छुटकारा पाने की फिराक में है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2707711910515569851?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2707711910515569851/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2707711910515569851'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2707711910515569851'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html' title='&lt;strong&gt;पूर्व में बुने गए जाल में फिर फंस सकते हैं जरदारी&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvTqgfst_FI/AAAAAAAAAQw/5B3UG8K6Qhg/s72-c/asif_ali_zardari.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2936457753462870755</id><published>2009-11-05T22:25:00.000-08:00</published><updated>2009-11-06T19:42:16.871-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='फतवा'/><title type='text'>इस्लाम की धारणा में पलीता है दारुल-उलूम का फतवा</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvTsY-ZY8LI/AAAAAAAAAQ4/D8lXC7dt8D0/s320/Devbond.JPG" border="0" alt="File photo of a meeting" title="File photo of a meeting" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5401201766934573234" /&gt;&lt;br /&gt;जमीयत-उलेमा-ए-हिंद देवबंद का दारुल-उलूम देश के नागरिकों में राष्ट्रभक्ति पैदा करने वाले गीतों का विरोध करके इस्लाम की उस धारणा को पलीता लगा रहा है जिसमें अपनी मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करने को जन्नत प्राप्त करने का सबसे बड़ा साधन माना गया है। मुसलमानों के सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान में जिस जिहाद का उल्लेख है वह किसी धर्म के विरोध के लिए नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान से सबंधित है। इसके बावजूद मुसलमान उलेमा और कठमुल्ले देश की अपेक्षा स्थूल धर्म को ज्यादा महत्वपूर्ण मानकर शरीयत को देश से ऊपर मान्यता देते हैं। अब तक देवबंद का दारुल-उलूम आम कठमुल्लों से अलग अपनी भावनाएं प्रकट करता रहा था लेकिन लगता है कि अब वहां भी धर्मांध लोगों ने अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। यहां सवाल है कि क्या दारुल उलूम के विद्धान उस गुलाब को सूंघना पसंद करेंगे जिसमें खुशबू नहीं हो। ऐसे ही जिस देश के लोग अपने राष्ट्रगीत, राष्ट्रध्वज और संविधान का सम्मान नहीं करेंगे उनको दुनिया में कैसे सम्मान मिलेगा। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मुस्लिम देशों में भी होती है मातृभूमि की वंदना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वैसे बंकिमचंद्र के 1875 में लिखे गए वंदे मातरम् में एक शब्द भी ऐसा नहीं है, जो इस्लाम के विरुद्ध हो। फतवा जारी करने वाले विद्वान पुस्तकों तथा शब्दकोशों में देखें कि संस्कृत के वंदे शब्द का मूल अर्थ प्रणाम, नमस्कार, सम्मान, प्रशंसा है। क्या जिस भूमि में हम रहते हैं उसके प्रति श्रद्धा रखना गलत है। हजरत मुहम्मद तक ने कहा है कि मां के पैरों तले स्वर्ग होता है। जब पैगम्बर ने यह कहा तो फिर उनके अनुयायी क्यों मातृभूमि को नमन करने से कतरा रहे हैं। &lt;br /&gt;यह सवाल किसी धर्मांध हिन्दू का नहीं बल्कि मातृभूमि से प्यार करने वाले और देश की रक्षा में शहीद हुए उन मुसलमान योद्धाओं का भी है जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान और चीन से हुए युद्धों में मातृभूमि के लिए ही सर्वोच्च बलिदान दिया था। जहां तक मातृभूमि को नमन का सवाल है तो दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया, तुर्की, सऊदी अरब और बांगलादेश के राष्ट्रगीतों में भी मातृभूमि की वंदना का उल्लेख है। दारुल-उलूम के विद्धान इन देशों के राष्ट्रगीतों और राष्ट्रगानों को मंगाकर पढ़ सकते हैं।&lt;br /&gt;वंदेमातरम के खिलाफ दारुल-उलूम का फतवा देश के मुसलमानों को क्या संदेश देगा इसकी चिंता किए बिना कुछ ऐसे सवाल है जिनका जवाब दारुल-उलूम को आने वाली पीढिय़ों को देना ही होगा। पहला सवाल है कि अगर भारत नहीं रहा तो दारुल-उलूम और उसके अनुयाइयों को दुनिया के किस देश में जगह मिलेगी? पाकिस्तान में दारुल-उलूम जैसी संस्थाओं का तालिबान क्या हश्र कर रहा है यह दुनिया में किसी से छिपा नहीं है। &lt;br /&gt;दूसरा अहम सवाल है कि क्या धर्म देश से बड़ा है? अगर धर्म देश से बड़ा है तो फिर दारुल-उलूम तथा उसके अनुयायियों की देशभक्ति भी संदिग्ध है। शायद ऐसा कहते ही दारुल-उलूम के फतवा देने वाले उलेमाओं के तन-बदन में आग लग जाएगी क्योंकि वे अपने को देशभक्त भी मानते हैं। आखिर यह समझ नहीं आता कि देश से अधिक धर्म को महत्व क्यों दिया जा रहा है?&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्यों नहीं करते उर्दू में वंदना गीत की रचना? &lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;प्रश्रों की श्रंखला में यह भी पूछा जा सकता है कि अगर वंदेमातरम गाने में दारुल-उलूम समेत कठमुल्लों को आपत्ति है तो वे मातृभूमि को नमन करने का कोई और गीत इस्लाम मताबलंबियों के लिए क्यों नहीं रचते? वे उर्दू में ऐसा गीत रच दें जिसमें मातृभूमि को मुस्लिम देशों की भांति नमन करने वाली पंक्तियां हों। इससे उनकी देशभक्ति पर उठे सवालों का खात्मा भी हो जाएगा और वंदेमातरम गाने से उनकी मुक्ति भी हो जाएगी। साथ ही हिन्दू कठमुल्लों को शोर मचाने का मौका भी नहीं मिलेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2936457753462870755?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2936457753462870755/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_233.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2936457753462870755'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2936457753462870755'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_233.html' title='&lt;strong&gt;इस्लाम की धारणा में पलीता है दारुल-उलूम का फतवा&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvTsY-ZY8LI/AAAAAAAAAQ4/D8lXC7dt8D0/s72-c/Devbond.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6587743509337234954</id><published>2009-11-05T11:28:00.000-08:00</published><updated>2009-11-05T20:09:12.767-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नेपाल'/><title type='text'>बहाना है सेना प्रमुख की बहाली का विरोध</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 220px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOhT5SiFaI/AAAAAAAAAQQ/leAc8CO6k3M/s320/maoist1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400837741315495330" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ताकत का प्रदर्शन करना चाहते हैं माओवादी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नेपाल में पूर्व सेना प्रमुख को मई में बहाल करने संबंधी राष्ट्रपति रामबरन यादव के फैसले का विरोध माओवादियों को अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में और मजबूती देगा।&lt;br /&gt;माओवादियों ने देश में सभी 75 जिला प्रशासनिक कार्यालयों के बाहर धरना देकर अपनी ताकत पहले ही जता दी है। &lt;br /&gt;नई गठबंधन सरकार के विरोधी माओवादियों का असली मकसद नेपाल की गठबंधन सरकार को धराशायी करना है। मात्र छह माह के लिए सत्ता में आने से पूर्व नेपाल के माओवादियों ने देश को पूरी तरह से अस्तव्यस्त करके रख दिया था। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने कैडर को सेना में नियमित भर्ती की इजाजत दिलाने की कोशिश की थी। इस कोशिश का नेपाल के सेनाध्यक्ष ने विरोध किया तो माओवादी सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था लेकिन वे भी अपनी सत्ता बरकरार नहीं रख पाए और उन्हें वापस सड़क पर आना पड़ा। तब से ही माओवादी देश को अस्थिर करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। ताजा प्रदर्शन उसी षड्यंत्र का अंग है।&lt;br /&gt;नेपाल के माओवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल नेपाल को अस्थिर बनाकर फिर से सत्ता में आना चाहते हैं। उनका मुख्य ध्येय हिमालय की तलहटी में बसे इस देश को भारत के प्रभाव क्षेत्र से बाहर कर चीनी गोद में ले जाना दिख रहा है। वे प्रधानमंत्री बनकर सबसे पहले चीन की यात्रा करके अपने इरादों की बानगी पेश कर चुके हैं। हाल में भी दहल ने न सिर्फ चीन की यात्रा की बल्कि भारत को चिढ़ाने के लिए यह भी कहा कि भारत को उनकी चीन यात्रा पर शक नहीं करना चाहिए।&lt;br /&gt;चीन की गोद में जा बैठने के माओवादियों के सपने को अगर जल्द ध्वस्त नहीं किया गया तो जल्द ही नेपाल भी पाकिस्तान की राह पर चल निकलेगा। भारत अपनी विदेश नीति में प्राप्त महत्वपूर्ण स्थान से नेपाल को वंचित तो नहीं करे लेकिन उसकी मुश्कें अवश्य कसे अन्यथा अहिंसा में भरोसा रखने वाले भारत को भविष्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6587743509337234954?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6587743509337234954/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_9500.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6587743509337234954'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6587743509337234954'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_9500.html' title='&lt;strong&gt;बहाना है सेना प्रमुख की बहाली का विरोध&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOhT5SiFaI/AAAAAAAAAQQ/leAc8CO6k3M/s72-c/maoist1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-4414716945951566624</id><published>2009-11-05T11:15:00.000-08:00</published><updated>2009-11-05T20:12:51.880-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>भारत की बांह मरोडऩे की रणनीति</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOiLobyXYI/AAAAAAAAAQY/FSTShvW57HM/s320/Pushing_Plane_in_China.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400838698863582594" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तिब्बत में हवाई अड्डों का बिछाया जाल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तिब्बत में चौथा हवाई अड्डा चालू करने की तैयारी कर रहे चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर पनबिजली परियोजना के तहत बड़ा बांध बनाकर युद्ध की स्थिति में भारत की बांह मरोडऩे की रणनीति बना रहा है। &lt;br /&gt;दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में गुनसा हवाईअड्डा 10 जुलाई, 2010 को शुरू होने की संभावना है। इसके साथ ही चीन का तिब्बत में यह चौथा हवाईअड्डा हो जाएगा। चीन तिब्बत के झांगमू के इलाके में ब्रह्मपुत्र नदी पर जो बांध बना रहा है उसकी पुष्टि भारत की नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी की सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हो चुकी है। &lt;br /&gt;ब्रहमपुत्र नदी पर भारत की सीमा से 1100 किलोमीटर दूर बनाए जा रहे बांध&lt;br /&gt;के अलावा चीन ने पहले से ही पन्द्रह बांध ब्रह्मपुत्र पर बना रखे हैं। इन बांधों से भारत को मिलने वाले ब्रह्मपुत्र के 79 बीसीएम जल की कटौती करने का षड्यंत्र रचने के साथ ही चीन युद्ध की स्थिति में बांध से ब्रह्मपुत्र में बाढ़ लाने जैसा कदम भी उठा सकता है। इस बांध का निर्माण नगमू पनबिजली परियोजना के तहत किया जा रहा है।&lt;br /&gt;अरुणाचल प्रदेश और दलाई लामा पर दोनों देशों के बीच चलने वाली तनातनी के बीच नगमू पनबिजली परियोजना के ताजा विवाद ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को बढ़ावा ही दिया है।&lt;br /&gt;इसके अलावा दोनों देशों के बीच सन् 1914 में भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत अस्तित्व में आई मैकमोहन रेखा को लेकर भी विवाद है। हालांकि, 1914 के बाद से अगले कई वर्षो तक इस सीमारेखा का अस्तित्व कई अन्य विवादों के कारण कहीं दबा रहा, लेकिन 1935 में ओलफ  केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे अधिकारिक तौर पर लागू करने को कहा था। 1937 में सर्वे ऑफ  इंडिया के एक मानचित्र में मैकमोहन रेखा को भारतीय सीमारेखा के तौर पर दिखाया गया था।&lt;br /&gt;सर हैनरी मैकमोहन के नाम पर इस सीमा रेखा का नाम जब रखा गया था तब यह  हिमालय से होती हुई पश्चिम में भूटान से 890 किमी और पूर्व में ब्रह्मपुत्र तक 260 किमी तक फैली है। भारत इसे चीन के साथ अपनी सरहद मानता है। जबकि चीन 1914 के शिमला समझौते को खारिज करता है। उसका कहना है कि तिब्बत स्वायत्त राज्य नहीं था और किसी भी किस्म का समझौता करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं था। चीन मैकमोहन रेखा के दक्षिण में 56 हजार वर्ग मील के क्षेत्र को तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा मानता है। इस क्षेत्र को चीन में दक्षिणी तिब्बत के नाम से जाना जाता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन ने कुछ समय के लिए इस क्षेत्र पर अधिकार भी जमा लिया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-4414716945951566624?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/4414716945951566624/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_05.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4414716945951566624'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4414716945951566624'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_05.html' title='&lt;strong&gt;भारत की बांह मरोडऩे की रणनीति&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOiLobyXYI/AAAAAAAAAQY/FSTShvW57HM/s72-c/Pushing_Plane_in_China.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-8401197741186740160</id><published>2009-11-04T11:53:00.000-08:00</published><updated>2009-11-05T20:15:10.202-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>दलाई लामा से क्यों चिढ़ता है चीन?</title><content type='html'>&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 286px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOiu4vqEsI/AAAAAAAAAQg/GcdP3yBjd_0/s320/dalai-lama-1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400839304537313986" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दफन नहीं होने देते तिब्बत पर चीनी कब्जे की दास्तान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा से चीन इतना क्यों चिढ़ता है कि उनसे बात करने वाले दुनिया के ताकतवर से ताकतवर नेता को आंखें दिखाने से नहीं चूकता। इतिहास को दर्पण मानें तो 1950 में चीनी सेना के प्रवेश करने से पहले भारत और चीन के बीच बफर स्टेट का दर्जा प्राप्त तिब्बत सांस्कृतिक रूप से भारत के अधिकनजदीक था। हालांकि उसके चीन से भी संबंध थे लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था भारत के सीमांत प्रदेशों के साथ ज्यादा सहज महसूस करती थी। 1914 में तत्कालीन ब्रिटिश भारत की सरकार ने तिब्बत को लेकर शिमला समझौता किया था इसमें ही मैकमोहन लाइन का उल्लेख था। इसके तहत तत्कालीन ब्रिटिश भारत की सरकार ने तिब्बत की परोक्ष आजादी को मान्यता दी गई लेकिन उस पर चीन के स्वामित्व को माने जाने की शर्त को लेकर चीन नाराज हो गया था और उसकी गणतंत्रीय सरकार ने समझौते पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया था। उसी दौर में चीन हमेशा तिब्बत को मुक्त कराने की बात करता रहता था। लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता था कि तिब्बत को किससे मुक्तकराया जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तिब्बत का चेहरा हैं दलाई लामा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीन के तिब्बत पर कब्जे के बाद अनुयायियों समेत राजनीतिक शरण लेने भारत आए तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने कई वर्ष तक चीनी कब्जे से अपने देश को आजाद कराने की परोक्ष कोशिशें वार्ताओं के माध्यम से कीं। उनके अनुयायियों ने सशस्त्र संघर्ष भी किया लेकिन चीनी जबड़े से तिब्बत को छुड़ा नहीं सके। चीन की मान्यता है कि दलाई लामा तिब्बत का चेहरा बन चुका है और वह जब भी दुनिया के किसी भी देश में जाते हैं तो उनके साथ चीन के प्रांत तिब्बत में चीन की उपस्थिति की परोक्ष अथवा खुली चर्चा अपने आप ही हो जाती है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सरकोजी-दलाई की मुलाकात से रद्द हुआ था शिखर सम्मेलन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;यह सही भी है कि शांति का नोबुल पुरस्कार प्राप्त दलाई लामा वाकई जब भी किसी देश में जाते हैं तो तिब्बत पर चीनी कब्जे की साठ साल पुरानी दास्तान भी साथ-साथ चलती है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात के दौरान चीनी करतूतों विशेषकर मानवाधिकार हनन की बात जरूर उठती है और इसी के साथ चीन को मानवाधिकारों के सम्मान की सलाह भी मिलती है। कुछ देशों में दलाई को गार्ड ऑफ आनर तक दिया जाता है। राष्ट्र मेहमान का दर्जा प्राप्त करके एक वर्ष में अनेक देशों की दलाई लामा की यात्रा तिब्बत पर चीनी कब्जे की दास्तान को दफन नहीं होने देती। चीन के दलाई लामा से चिढऩे का मूल कारण यही है। तमाम कोशिशों के बावजूद तिब्बत पर कब्जे को अंतर्राष्ट्रीय सहमति का जामा पहनाने में चीनी नाकामी का कारण दलाई लामा ही हैं। विदेशी नेताओं के साथ दलाई लामा की मुलाकातों से चीनी सरकार की नाराजगी का आलम ये है कि उसने फ्रांस के राष्ट्रपति सरकोजी से दलाई लामा की मुलाकात के बाद यूरोपीय संघ तथा चीन के बीच होने वाला शिखर सम्मेलन तक रद्द कर दिया था। सरकोजी से दलाई लामा की मुलाकात को चीन सरकार ने तिब्बत पर विदेशी हस्तक्षेप तक बता दिया था। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दलाई काटते हैं चिकोटी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जहां तक भारत पर दलाई लामा को लेकर दबाव डालने का प्रश्र है तो उसके पीछे भी चीन का यह डर काम करता है कि जब तक भारत तिब्बत के लोगों को शरण देना बंद नहीं करेगा तब तक तिब्बत में उसके पैर जम नहीं पाएंगे। चीन का यह डर तिब्बत में भारी तादाद में फौज तैनात करने के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। चीन का मानना है कि दलाई लामा विदेशी मीडिया से भेंट में चीन सरकार की परोक्ष आलोचना भी करते हैं। इससे तिब्बत का मुद्दा भी जीवित हो उठता है। हाल ही दलाई लामा ने यह कहकर चीन को चिकोटी काटी थी कि चीन सरकार का रवैया सदैव अल्पसंख्यकों को नियंत्रित करने का रहा है, वह यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं करती कि स्थानीय लोगों की अपनी प्राथमिकताएं क्या हैं। दलाई लामा ने मुस्लिम बहुल सिक्यांग प्रांत में हिंसा की आलोचना भी की। दलाई लामा मुताबिक चीन का साम्यवादी प्रशासन बाकी मामलों में वास्तविकताओं के हिसाब से अपने चाल और चरित्र में बदलाव कर लेता है लेकिन अल्पसंख्यकों के संबंध में उनकी नीतियां विफल और अवास्तविक हैं। वे सदैव कैसे सब कुछ बनाए रखा जाए, कैसे सब कुछ नियंत्रित रखा जाए के नजरिए से व्यवहार करते हैं। उन्हें इस बात की रत्ती भर भी परवाह नहीं कि स्थानीय लोग क्या सोचते हैं। पिछले दशक में दलाई लामा ने चीन को यह तक प्रस्ताव दिया था कि चीनी प्रभुसत्ता के तहत तिब्बत को सार्थक स्वायत्तता दे दी जाए। सम्पूर्ण आजादी की अपेक्षा सार्थक स्वायत्तता की दलाई लामा की मांग को भी चीन ने ठुकरा दिया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-8401197741186740160?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/8401197741186740160/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_4004.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8401197741186740160'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8401197741186740160'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_4004.html' title='&lt;strong&gt;दलाई लामा से क्यों चिढ़ता है चीन?&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOiu4vqEsI/AAAAAAAAAQg/GcdP3yBjd_0/s72-c/dalai-lama-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6581619736441318545</id><published>2009-11-04T10:57:00.000-08:00</published><updated>2009-11-05T20:18:56.451-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>सिक्यांग में दमन से कश्मीर में खतरा!</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 250px; height: 225px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOjn3Qo93I/AAAAAAAAAQo/wMpRVGACgVk/s320/leh.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400840283391326066" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;जनता का ध्यान बंटाने के लिए बढ़ सकता है आतंककारी दबाव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तिब्बतियों की तर्ज पर सिक्यांग प्रांत में तुर्की मूल के वीगर मुसलमानों के दमन की तैयारी भारत की उत्तरी सीमा पर बड़े खतरे का संकेत है। जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान की ओर से दान दिए गए पांच हजार वर्गमील से अधिक बड़े इलाके से जुड़ी सिक्यांग की सीमाएं भारतीय कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों का दबाव बढ़ा सकती हैं क्योंकि पाकिस्तान सिक्यांग में तुर्की मूल के मुसलमानों के दमन का विरोध चीनी दोस्ती की कीमत पर नहीं करेगा और दमन की लपटों से पाकिस्तानी जनता में पैदा होने वाली बैचेनी की फूंक निकालने के लिए भारतीय कश्मीर में आतंककारी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश करेगा ताकि जनता का ध्यान सिक्यांग में मुसलमानों के दमन से हट सके। पिछले 62 साल का इतिहास गवाह है कि कश्मीर की आजादी के नाम पर पाकिस्तानी जनता अपने दुख:दर्द तक भूलकर कश्मीर को आजाद कराने का प्रलाप कर रही सरकार के पीछे खड़ी हो जाती है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तिब्बत की तरह काबू का इरादा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीनी अखबारों से मिले संकेतों के अनुसार चीन अब सिक्यांग में पिछले दो साल से चल रहे विद्रोह से आजिज आ चुका है। जिस तरह तिब्बत में चीन ने स्थिति पर काबू पाया वैसे ही वह अब सिक्यांग में भी करेगा। चीनी अखबारों के मुताबिक चीनी सुरक्षा बलों ने पश्चिमी प्रांत सिक्यांग में अपराधियों को खत्म करने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का निश्चय किया है।&lt;br /&gt;सिक्यांग की राजधानी उरुमकी इस वर्ष में दो बार हुई जातीय हिंसा में 197 लोग मारे गए थे। चीन के सबसे अशांत माने जाने वाले इस इलाके में पहले से ही बड़ी संख्या में चीनी फौजें तैनात हैं। हिंसा में शामिल होने के आरोप मे उरुमकी के 21 लोगों को अब तक सज़ा दी जा चुकी है। उरुमकी में ज्यादातर मुस्लिम रहते हैं। इलाके में चीनी मूल के हान समुदाय के लोगों की संख्या भी काफी है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मुसलमानों को संस्कृति मिट जाने की आशंका&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मुस्लिम बाहुल्य सिक्यांग की राजधानी उरुमची में लम्बे समय तक रात का कफ्र्यू लगाए रखने के साथ ही शुक्रवार को मस्जिदों को भी बंद रखने का आदेश दिया गया था।&lt;br /&gt;वीगर तुर्की मूल के मुसलमान हैं। उरुमची में अशांति का बड़ा कारण वगीर समुदाय की 45 प्रतिशत जनसंख्या के मुकाबले चालीस प्रतिशत चीनी मूल के हान समुदाय की जनसंख्या हो जाना है। इस इलाके पर अर्थात पूर्वी तुर्किस्तान पर चीन ने 1949में दोबारा कब्जा किया था। तभी से वहां बड़ी संख्या में हान चीनी बसने लगे। इससे वगीर मुसलमानों को अपनी पारंपरिक संस्कृति के मिट जाने की चिंता हो गई। इस क्षेत्र में 1991 से ही रुक-रुक कर हिंसा होती रही है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;काट दिए थे इंटरनेट कनेक्शन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सिक्यांग प्रांत के काश्गार में चार अगस्त, 2008 को हिंसक घटनाओं में 16 चीनी पुलिसकर्मी मारे गए थे। हिंसा के दौरान 156 वीगर मुसलमान भी मारे गए थे और 1000 से ज़्यादा घायल हो गए थे। वीगर और हान समुदाय के बीच हुए साम्प्रदायिक संघर्ष की ज्वाला ज्यादा भड़कती दिखने पर चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ को इटली से जी-8 सम्मेलन छोड़कर स्वदेश लौटना पड़ा था। हिंसक संघर्ष का कारण वीगर समुदाय के दो लोगों के हान चीनी समुदाय के लोगों के साथ दक्षिणी चीन में एक झड़प में मारे जाने के बाद न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन करना था। हिंसक घटनाओं के बाद से ही सिक्यांग में वीगर और हान समुदायों में खासा तनाव है। तनाव में बढ़ोतरी का कारण उरुमकी में वीगर समुदाय की आबादी वाले इलाकों में भारी मात्रा में सुरक्षा बलों की तैनाती भी है। तकनीकी रूप से वहां मार्शल लॉ लागू नहीं है लेकिन स्थिति बिलकुल मार्शल लॉ जैसी ही है। चीनी सरकार ने मोबाइल सेवाएं ब्लॉक करने के साथ इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिए थे।&lt;br /&gt;पिछले महीने एक छोटी सी घटना के कारण हान मूल के चीनी लोगों और मुसलमानों में तनाव शुरु हुआ था। दक्षिणी ग्वांगदौंग प्रांत में किसी व्यक्ति ने स्थानीय वेबसाइट पर संदेश लिख दिया कि हान मूल के लड़कों ने दो लड़कियों का बलात्कार किया है. इसके बाद हान मूल के लोगों और मुसलमानों के बीच एक कारखाने के पास लड़ाई हुई जिसमें दो मुसलमान मारे गए और 118घायल हो गए थे। इसी के जवाब में सिक्यांग में हिंसा भड़की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6581619736441318545?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6581619736441318545/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6581619736441318545'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6581619736441318545'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_04.html' title='&lt;strong&gt;सिक्यांग में दमन से कश्मीर में खतरा!&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvOjn3Qo93I/AAAAAAAAAQo/wMpRVGACgVk/s72-c/leh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1438416121726976415</id><published>2009-11-02T21:00:00.000-08:00</published><updated>2009-11-03T20:29:48.149-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अफगानिस्तान'/><title type='text'>शांति की आशा को फिर पलीता</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEDKLw44mI/AAAAAAAAAPo/bxN4gtiJBeY/s320/karzai.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400100901685355106" /&gt;&lt;br /&gt;तीन दशकों से बमबारी के धमाकों और गोलियों की तड़-तड़ के बीच जी रहे अफगानिस्तान में शांति की आशा को फिर पलीता लग गया है। यद्यपि खंडहरों में बदले शहरों और दाने-दाने को तरस रहे सुदूर गांवों के लडऩे-मरने के आदी अफगानों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन दुनिया का चैन जरूर छिन जाएगा। अमेरिकी नेतृत्व में नाटो फौजों के बूटों तले रौंदे जा रहे अफगानिस्तान में इस बार शांति को वहां के राष्ट्रपति चुनावों में हुई धंाधली के आरोपों ने पटरी से उतारा है। &lt;br /&gt;कई माह के तीखे विरोध तथा दुबारा चुनाव की तारीख तय हो जाने के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के विरोधी अब्दुल्ला अब्दुल्ला चुनाव मैदान से हट गए और हामिद करजई को ही फिर अफगानिस्तान का राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित कर दिया गया। गौर से देखें तो यही स्थिति अफगानिस्तान में पहले से भंग शांति को आग की लपटों में बदल सकती है बल्कि अमेरिकी फौजों को और कड़े मुकाबले में फंसा सकती है। हामिद करजई लगातार दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने हैं। इस चुनाव में करजई के प्रतिद्वंद्वी व पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला के दूसरे चरण के चुनाव [रन-आफ] से अलग हो जाने के कारण करजई को विजेता घोषित किया गया। &lt;br /&gt;मौजूदा अफगान सरकार को अमेरिकन पिटठू बताने वाला तालिबान चुनावी धांधली के आरोपों के बाद तेजी से घूमे घटनाचक्र का फायदा उठा सकता है। लगभग निरक्षर अफगान जनता को धार्मिक कट्टरता की घुट्टी पिलाकर तालिबान उसे सरकार के विरोध में खड़ा कर सकता है। इसके लिए वह चुनाव मैदान से हटे अब्दुल्ला अब्दुल्ला की सहायता भी ले सकता है जो चुनाव मैदान से हटने की घोषणा करके हामिद करजई के प्रति अपनी कड़वाहट व द्वेष को छुपा नहीं पाए। अगर अब्दुल्ला ने तालिबान समर्थक रुख अपना लिया तो फिर सरकार को सशस्त्र संघर्ष के साथ ही राजनीतिक विरोध का सामना भी करना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो तालिबान को निश्चित तौर पर ताकत मिलेगी। अभी कंदराओं और दूरस्थ गांवों में छुपा तालिबान फिर काबुल की ओर कदम बढ़ा सकता है। तालिबान कुछ मुस्लिम देशों के साथ ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से अब्दुल्ला अब्दुल्ला के लबादे में छुपकर सरकार को परेशान कर सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1438416121726976415?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1438416121726976415/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1438416121726976415'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1438416121726976415'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html' title='&lt;strong&gt;शांति की आशा को फिर पलीता&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEDKLw44mI/AAAAAAAAAPo/bxN4gtiJBeY/s72-c/karzai.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1078266526048971941</id><published>2009-11-01T02:47:00.000-08:00</published><updated>2009-11-03T20:36:34.219-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>बमबारी की धमकी से दिया था साथ</title><content type='html'>&lt;strong&gt;अमेरिका का अफगानिस्तान पर हमला&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;क्या कोई यकीन करेगा कि 9/11 के आतंककारी आक्रमण के बाद अमेरिका ने हमले की धमकी देकर पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियान की भ_ी में कूदने के लिए मजबूर किया था। अमेरिका ने धमकी दी थी कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों को अपना साथी चुनेगा तो उसे ऐसी बमबारी के लिए तैयार रहना चाहिए जो उसे पाषाण युग में पहुंचा देगी।&lt;br /&gt;पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैनिक शासक जनरल परवेज मुशर्रफ ने अपनी किताब (अग्निपथ) में यह रहस्योद्घाटन करते हुए कहा है कि 12 सितम्बर को जब वे पाकिस्तान स्थित गवर्नर हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे तो तत्कालीन अमेरिकी विदेश मत्री कोलिन पावेल ने उन्हें फोन करके यह धमकी दी थी कि आप या तो हमारे साथ हैं या हमारे खिलाफ। 13 सितम्बर को पाकिस्तानी आईएसआई के डायरेक्टर जनरल को वाशिंगटन में अमेरिकी उपविदेश मंत्री रिचर्ड आर्मितेज ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को न सिर्फ यह तय करना है कि वह अमेरिका के साथ है या कि आतंकवादियों के, बल्कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों को चुनता है तो उसे उस बमबारी के लिए तैयार रहना चाहिए जो उसे पाषाण युग में पहुंचा देगी।&lt;br /&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 256px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEEj_FzP4I/AAAAAAAAAPw/04XHaxFTeVw/s320/9-11_1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400102444471631746" /&gt;&lt;br /&gt;किताब में लिखा है कि अमेरिकी हमले को सह पाने में पाकिस्तानी नाकामी साफ थी। साथ ही आर्थिक हालात भी इस लायक नहीं थे कि महाशक्ति के समक्ष खड़ा हुआ जा सके। इसके अलावा पाकिस्तान के सपनों के इस्लामी बम को भी ऐसे हालात में अमेरिका द्वारा नष्ट कर दिए जाने का खतरा भी मुंह बाएं खड़ा था।&lt;br /&gt;मुशर्रफ ने किताब में लिखा है कि अमेरिकी हमले की धमकी के साथ ही पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी उस वक्त बड़ा मुद्दा थी। भारत अमेरिका को हवाईपट्टी की सुविधा उपलब्ध कराकर महाशक्ति को ललचा रहा था। अगर ऐसा हो जाता तो निश्चित तौर पर भारत कश्मीर की मौजूदा स्थिति को अमेरिकी सहयोग से स्थायी बनाने की कोशिश करता जो पाकिस्तान के लिए जीवन-मरण का प्रश्र है।&lt;br /&gt;मुशर्रफ ने स्वीकार किया है कि एक तरफ अमेरिकी धमकी से पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया था तो दूसरी ओर अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने से उसके समक्ष एक सुनहरा भविष्य था। लगभग ढह चुकी अर्थव्यवस्था को फिर से वित्त पोषण के लिए दोनों हाथों से मिलने वाली आर्थिक मदद ऐसा ही प्रलोभन था। इसके अलावा आणविक परीक्षण के बाद अलग-थलग पड़ गए पाकिस्तान को फिर से मुख्यधारा में लौटने का मौका भी इस गठबंधन का साथ देने से मिलने वाला था। मुशर्रफ ने अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने के फैसले को न्यायोचित साबित करने के लिए अन्य तर्क भी दिए हैं लेकिन वे यह खुलासा करने में भी नहीं चूके कि अगर ऐसा नहीं करते तो वाकई पाकिस्तान मिट्टी के ढेर में बदल जाता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1078266526048971941?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1078266526048971941/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_3641.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1078266526048971941'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1078266526048971941'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_3641.html' title='&lt;strong&gt;बमबारी की धमकी से दिया था साथ&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEEj_FzP4I/AAAAAAAAAPw/04XHaxFTeVw/s72-c/9-11_1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1361042165666634869</id><published>2009-11-01T01:53:00.000-07:00</published><updated>2009-11-03T20:37:58.204-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>फिर उतरा अमेरिकी मुखौटा</title><content type='html'>&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEFDey03HI/AAAAAAAAAP4/R-sXvmWMtUg/s320/usaflag.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400102985557924978" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान ही महत्वपूर्ण&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अमेरिका ने भारत के मुकाबले पाकिस्तान को महत्वपूर्ण बताकर अपना मुखौटा फिर उतार दिया है। पिछले दो-तीन साल से दुनिया की एकमात्र महाशक्ति भारत को भरमाने की कोशिश कर रही थी कि भारत अब रणनीतिक रूप से पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है।&lt;br /&gt;भारत से अधिक पाकिस्तान को महत्वपूर्ण बताने वाला खुलासा अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने हाल की पाकिस्तान यात्रा के दौरान किया। यह भारत के लिए बड़ा झटका है। आतंककारियों की फैक्टरी बन चुके पाकिस्तान का अमेरिकी आंखों का तारा बना रहना भारत के लिए आसन्न खतरे का प्रतीक है। &lt;br /&gt;आठ साल पहले अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तान और पाकिस्तानी आतंकियों की भागीदारी के साफ  सबूत मिलने के बावजूद पाकिस्तान को खैरात के नाम पर अमेरिका अपनी तिजोरी खोले हुए हैं। ऐसी ही खैरात से पाकिस्तान पिछले बासठ वर्षों से भारत की नाक में दम किए हुए है।&lt;br /&gt;पाकिस्तान को वर्ष 2002 से अब तक 14 करोड़ डालर [करीब 6 अरब 64 करोड़ रुपये] की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा  के अलावा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में पुलिस व अन्य प्रशासनिक संगठनों के लिए अलग से भी 103.5 मिलियन डालर [करीब 5 अरब रुपये] की मदद देने का प्रस्ताव दिया। अमेरिकी दरियादिली के कारण ही पाकिस्तान दक्षिण एशिया में स्थिरता लाने की भारत की तमाम कोशिशों की राह में रोडा बनकर खड़ा है।&lt;br /&gt;अमेरिका की वह सलाह भी जले पर नमक छिड़कने जैसी है जिसमें कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान को अपने मतभेद सुलझा कर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान कहा कि यदि पाकिस्तान और भारत के बीच शांति हो और उनके बीच सभी लंबित मुद्दे सुलझा लिए जाएं तो पाकिस्तान आर्थिक विकास के क्षेत्र में राकेट की तरह बुलंदियां छुएगा। क्लिंटन हिलेरी ने कहा कि सामरिक स्थिति और समुद्री मार्ग से पहुंच के कारण पाकिस्तान में 'इकोनामिक पावरहाउस बनने की संभावनाएं हैं लेकिन यह तभी संभव होगा जब वह भारत के साथ अपने संबंधों में सुधार करे।&lt;br /&gt;सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अमेरिका के लिए पाकिस्तान हरावल दस्ते की भूमिका वाला देश नहीं रह गया है। विशाल बाजार वाला भारत मौजूदा हालात में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बड़ी आवश्यकता है। यही महत्व चीन का है। चूंकि चीन पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका को चुनौती देने वाली भूमिका में है इसलिए भारत को अमेरिकी महत्व मिलना शुरू हुआ लेकिन अमेरिकी कैरी लूगर सहायता विधेयक और विदेश मंत्री का खुलासा भारत की आंख खोलने वाला है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1361042165666634869?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1361042165666634869/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_1201.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1361042165666634869'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1361042165666634869'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_1201.html' title='&lt;strong&gt;फिर उतरा अमेरिकी मुखौटा&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEFDey03HI/AAAAAAAAAP4/R-sXvmWMtUg/s72-c/usaflag.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-623377568095295314</id><published>2009-11-01T01:46:00.000-07:00</published><updated>2009-11-03T20:45:18.060-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परमाणु'/><title type='text'>अब बंगाली बम का खतरा</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 296px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEGqasGqYI/AAAAAAAAAQA/Ofi39mv3JEI/s320/bangladesh-map.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400104753982515586" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;म्यांमार और बंगलादेश भी बना रहे हैं परमाणु हथियार&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अब तक पाकिस्तान के इस्लामी बम के खतरे से जूझ रहे भारत को जल्द ही बंगाली बम से भी दो-चार होना पड़ता है। बिजली बनाने के लिए चीन की सहायता से परमाणु बिजलीघर स्थापित करने की कोशिश कर रहे बंगलादेश पर परमाणु बम बनाने की कोशिशों में जुटने का आरोप अमेरिकन फॉरेन अफेयर्स मैगजीन में लगाया गया है। बिजली की जरुरतों को देखते हुए परमाणु क्लब के देशों ने बंगलादेश को परमाणु बिजली बनाने की इजाजत पहले ही दे रखी है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पड़ोसी को जवाब की तैयारी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बंगाली परमाणु बम की तैयारियों पर फॉरेन अफेयर्स में लिखा गया है कि बंगलादेश का पड़ोसी म्यांमार एटम बम बनाने की तैयारी में है। उसके इरादों का पहले ही खुलासा हो चुका है। म्यांमार के साथ बांग्लादेश का बॉर्डर को लेकर झगड़ा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच भारी तनाव है। उनकी सीमाओं पर सेना का जमावड़ा है और बंगाल की खाड़ी में कई बार उनकी नौसेना आमने-सामने आ चुकी हैं। माना जा रहा है कि एटमी ताकत हासिल कर रहे पड़ोसी को जवाब देने के लिए ही बंगलादेश भी बंगाली बम की राह पर कदमताल कर रहा है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सावधान हो जाए दुनिया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बंगलादेश के न्यूक्लियर प्रोग्राम को पाकिस्तान और एक अन्य देश से मदद मिल रही है। बंगलादेश ने परमाणु बिजली उत्पादन प्रोग्राम को शांतिपूर्ण बताया है लेकिन रक्षा जानकारों का मानना है कि दुनिया को सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि एटमी ठिकानों की हिफाजत की बंगलादेशी योग्यता संदेह के घेरे में है। बंगलादेश में अशांति स्थाई रूप से पसरी हुई है। आजादी के बाद से सरकार के दो मुखियाओं की हत्या हो चुकी है। बगावत होती रहती है, इस्लामी आतंककारियों के हमले होते रहते हैं। देश आए दिन हड़तालों से जूझता रहता है। हर समय गृहयुद्ध जैसे माहौल वाले बंगलादेश में भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को चरमरा दिया है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अपनानी होगी अमेरिकी नीति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि एटमी ताकत वाला बंगलादेश और म्यांमार भारत के लिए स्थाई सिरदर्द बन सकते हैं। इसलिए भारत को दोनों देशों के साथ वही व्यवहार करना चाहिए जो अमेरिका अभी परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहे ईरान के साथ कर रहा है। दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था भारत पर निर्भर है। भौगोलिक रूप से म्यांमार और बंगलादेश की स्थिति ऐसी है कि भारत के सहयोग के बिना दोनों देश आर्थिक रूप से चरमरा सकते हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पिद्दी भी करेंगे धमकाने की हिमाकत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जहां तक उनके परमाणु बम निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने का सवाल है तो चीन इस मामले में दोनों देशों को पुचकार रहा है। नौसैनिक अड्डों की माला पिरोकर भारत को घेरने की कोशिश में जुटे चीन की मदद से अगर दोनों देशों ने परमाणु बम बना लिया तो भारत के लिए सर्वाधिक मुश्किल पैदा हो जाएगी क्योंकि दोनों ही देशों से भारत की थल सीमा जुड़ी हुई है। उत्तर पूर्व के आतंककारी गुट म्यांमार तथा बंगलादेश में ही शरण पाते हैं। भारत को इस स्थिति पर गम्भीरता से विचार करना होगा और दोनों देशों के परमाणु हथियार बनाने की क्षमताओं को नष्ट करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब पिद्दी पड़ोसी भी भारत को धमकाने की हिमाकत करने लगेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-623377568095295314?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/623377568095295314/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_01.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/623377568095295314'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/623377568095295314'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post_01.html' title='&lt;strong&gt;अब बंगाली बम का खतरा&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEGqasGqYI/AAAAAAAAAQA/Ofi39mv3JEI/s72-c/bangladesh-map.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-578802608674381627</id><published>2009-11-01T01:22:00.001-07:00</published><updated>2009-11-03T20:53:55.117-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>विरोध को विराम नहीं दे रहा चीन</title><content type='html'>&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 217px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEHzuAG0KI/AAAAAAAAAQI/7y9gP1wvUoI/s320/dalai_lama.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400106013297135778" /&gt;&lt;&lt;br /&gt;पांच दशक पहले तिब्बत से पलायन के वक्त अरुणाचल प्रदेश के तवांग में पहला पड़ाव डालने वाले तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा चीन के नकारात्मक रुख से परेशान हैं। उनका कहना है कि एक तरफ चीन उनके देश पर कब्जा किए बैठा है और दूसरी ओर संसार के किसी भी देश अथवा क्षेत्र में उनकी यात्रा पर सवाल खड़ा करके चीन उन्हें अलगाववादी नेता साबित करने पर उतारू है।&lt;br /&gt;जापान यात्रा पर गए दलाई लामा ने सात नवम्बर से भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित यात्रा पर चीनी आपत्तियों को आधारहीन बताते हुए कहा कि उनकी यात्रा अनुयाइयों को उपदेश देने तथा वहां एक अस्पताल का उद्घाटन करने तक सीमित है इसके बावजूद चीन अपने विरोध को विराम नहीं दे रहा है। वैसे भी अरुणाचल प्रदेश स्थित तवांग मठ की वह पहली यात्रा नहीं कर रहे हैं। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु चीनी रुख पर आश्चर्यचकित हैं। &lt;br /&gt;नोबेल पुरस्कार विजेता 74 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु जहां भी जाते हैं, चीनी सरकार उसका विरोध करती है। दलाई का दावा है कि वे अपने मत की शिक्षा देने के सिलसिले में अरुणाचल प्रदेश की यात्रा कर रहे हैं। वैसे भी तवांग के संबंध में उनकी अच्छी यादें जुड़ी हुई हैं। जब तिब्बत से उन्हें भागना पड़ा था, तो 50 साल पहले वे तवांग में ही ठहरे थे। भारत और चीन के बीच दलाई लामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा को लेकर हाल में वाकयुद्ध हो चुका है। अरुणाचल पर चीन अपना दावा करता है। उल्लेखनीय है कि  दलाई लामा की हाल की ताइवान यात्रा का भी चीन ने विरोध किया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-578802608674381627?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/578802608674381627/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/578802608674381627'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/578802608674381627'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='&lt;strong&gt;विरोध को विराम नहीं दे रहा चीन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SvEHzuAG0KI/AAAAAAAAAQI/7y9gP1wvUoI/s72-c/dalai_lama.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6330934216030362485</id><published>2009-10-28T12:02:00.000-07:00</published><updated>2009-10-28T21:09:32.626-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नक्सली'/><title type='text'>केन्द्र की खिल्ली उड़ा रहे हैं माओवादी</title><content type='html'>&lt;strong&gt;अब घातक होगी सरकार ढिलाई&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 146px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SukVYkonyvI/AAAAAAAAAPg/68R2KVNCVvM/s320/maoist.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397869140275350258" /&gt;&lt;br /&gt;भुवनेश्वर से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में पांच घंटे तक बंधक बना कर माओवादियों ने केन्द्र सरकार को सीधी चुनौती देने के साथ ही अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। एक तरफ केन्द्र सरकार लगातार माओवादियों यानी नक्सलवादियों को राजनीतिक मुख्य धारा में वापस लाने की कोशिश में जुटी हुई है तो दूसरी ओर माओवादी निरंतर हमले कर केन्द्र सरकार की खिल्ली उड़ा रहे हैं। देश के एक बड़े इलाके में विध्वंसक कार्रवाई करने की उनकी क्षमता लगातार बढ़ रही है। कहीं संचार टावर तो कहीं स्कूल-पंचायत भवन उड़ाए गए। अनेक स्थानों पर नरसंहार भी उन्होंने किए हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गरीबी से मतलब नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पिछले ही दिनों हुए विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र में माओवादियों ने अब तक केसबसे बड़े कारनामे में 17 पुलिसवालों को मौत के घाट उतार दिया था। जहां तक उनके जंगलों में और आदिवासियों के बीच रहने का सवाल है तो आदिवासियों की गरीबी और बदहाली से चिंतित होकर वहां नहीं रहते बल्कि अवैध हथियारबंद सेना होने के नाते वे जंगली इलाकों में सामरिक रूप से अपने को ज्यादा सुरक्षित पाते हैं। इसी वजह से वे अपने इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विकास का विरोध करते हैं। झारखंड में पुलिस इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदुवार का अपहरण के बाद सिर कलम करने वाले माओवादीबंगाल में लालगढ़ तथा जंगल महाल इलाकों में करीब हर रोज हत्याएं कर रहे हैं। माओवादियों के खतरनाक इरादों का अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि नक्सल प्रभावित राज्यों में अपने जवानों पर हमला होने की आशंका के कारण वायुसेना प्रमुख तक उन पर हमले की केन्द्र सरकार से सार्वजनिक तौर पर इजाजत मांग चुके हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लाल आंदोलन से लेना-देना नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वैचारिक रूप से माओवादियों का लाल आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। वे जनतांत्रिक वामपंथियों को बुर्जुआ कहते हैं और मौका मिलने पर उन्हें मार देने तक से नहीं चूकते। नक्सलियों का मानना है कि समाज से अमीर-गरीब की खाई का नामोनिशान मिटा देने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था की नहीं बल्कि माओ के सिद्धांतों की जरूरत है। इसी वजह से वे उन इलाकों में ज्यादा रहना पसंद करते हैं जहां गरीबों की संख्या तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। वे स्वयं को गरीबों का रहनुमा बताकर उनका साहूकारों से अधिक शोषण करते हैं। अपने खाने-पीने के इंतजाम के लिए वे आदिवासियों के अनाज इत्यादि तक लूट लेते हैं।&lt;br /&gt;अभी तक पुलिस थानों के साथ ही ठेकेदारों, बड़े अफसरों की हत्या करते आ रहे माओवादियों ने पहली बार देश की एक प्रतिष्ठित ट्रेन पर हमला किया है। रेलगाडिय़ों को पहले भी वे विस्फोटों से उड़ाते रहे हैं लेकिन ट्रेन को अगवा कर लेने की हिम्मत उन्होंने पहली बार की है। हालांकि केन्द्र सरकार कई महीनों से नक्सलियों के साथ सख्ती से निपटने की रणनीति बना रही है। नक्सलियों का राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला शायद केन्द्र को जल्द उनको काबू में करने के लिए कार्रवाई करने पर मजबूर कर दे लेकिन यह सच है कि अब अगर केन्द्र ने कार्रवाई नहीं की तो पूर्वोत्तर के साथ ही बिहार, कर्नाटक, आंध्र, छत्तीसगढ़ में वे और बड़े हमले करके अपनी ताकत व प्रभाव में बढ़ोतरी के प्रयास कर सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6330934216030362485?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6330934216030362485/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1317.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6330934216030362485'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6330934216030362485'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1317.html' title='&lt;strong&gt;केन्द्र की खिल्ली उड़ा रहे हैं माओवादी&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SukVYkonyvI/AAAAAAAAAPg/68R2KVNCVvM/s72-c/maoist.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3715400451765000204</id><published>2009-10-28T11:28:00.000-07:00</published><updated>2009-10-28T21:02:39.788-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वायूसेना'/><title type='text'>भारत की आवश्यकता है ड्रोन</title><content type='html'>&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 205px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SukTx-pXArI/AAAAAAAAAPY/6sR49C57w_I/s320/Drone+aircraft.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397867377731240626" /&gt;&lt;br /&gt;अफगानिस्तान में ड्रोन विमानों से हमले कर तालिबान को मच्छरों की तरह मसल रही अमेरिकी सेना की सफलताओं की चमक से दुनिया भर की वायुसेनाओं की आंखे चौंधियाने लगी हैं। वे भी अपनी सरकारों से ऐसे ही मानव रहित विमानों की मांग कर रही हैं। पाकिस्तानी वायुसेना तो ड्रोन विमान हासिल करने के लिए अनेक बार अमेरिका के आगे गिड़गिड़ा तक चुकी है। एशिया में बड़ी और लम्बी दूरी तक मार करने वाले वायुसेनाओं में शुमार भारतीय वायुसेना भी अब मानव रहित ड्रोन विमानों की आवश्यकता महसूस कर रही है। यूसीएवी तकनीकी नाम वाले ये विमान अचूक हमलों के कारण उन इलाकों में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं जहां गुरिल्ला हमलावर हमले करके अपनी मांदों में जा छिपते हैं।    &lt;br /&gt;भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ  मार्शल पीवी नायक ने कहा है कि मानव रहित लड़ाकू विमानों को आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत तक करार दिया है। वैसे भारतीय वायुसेना को पहला मानव रहित लड़ाकू विमान इजरायल से 2011 में मिल जाने की उम्मीद है। हेरोप-2 मानव रहित लड़ाकू विमान मिलने से भारतीय वायुसेना ऐसे विमान रखने वाली एशिया की पहली वायुसेना बन जाएगी। भारत में हथियारों के विकास से जुड़ा संगठन डीआरडीओ भी मानव रहित लड़ाकू विमान का विकास करने में जुटा हुआ है और उसने गैर लड़ाकू मानव रहित विमान तो विकसित भी कर लिया है। &lt;br /&gt;इधर भारतीय वायुसेना अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की राह पर कदम बढ़ा चुके चीन की गतिविधियों से भी चिंतित है। हाल ही वायुसेना प्रमुख ने एरोस्पेस तकनीक के अंतरिक्ष के सैन्यीकरण में इस्तेमाल की चीनी प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अगर पड़ोसी ऐसा कर रहा है तो भारत को भी इस तकनीक में आगे रहना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3715400451765000204?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3715400451765000204/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3715400451765000204'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3715400451765000204'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html' title='&lt;strong&gt;भारत की आवश्यकता है ड्रोन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SukTx-pXArI/AAAAAAAAAPY/6sR49C57w_I/s72-c/Drone+aircraft.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-228496152219408584</id><published>2009-10-27T12:59:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T22:33:39.430-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>संयुक्त राष्ट्र में विरोध, भारत में समर्थन</title><content type='html'>&lt;strong&gt;समझ से बाहर है चीन का रुख&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तीन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रूस, भारत और चीन का त्रिगुट अफ-पाक में बढ़ते एकतरफा अमेरिकी प्रभाव को सीमित रखने पर सहमत हो गया है। दोनों देशों में अमेरिकी प्रभाव पर लगाम के लिए तीनों देशों की आपसी सहमति को दक्षिण एशिया मामलों के जानकार बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं लेकिन वे एशिया में चीन और भारत के बीच महाशक्ति बनने की प्रतिद्वंद्विता के फलक को दरकिनार कर रहे हैं। निसन्देह दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के मुहाने पर बसे अफगानिस्तान में अमेरिकी प्रभाव में वृद्धि तीनों देशों के लिए खतरनाक ही साबित होगी परन्तु इस त्रिगुट की साझा रणनीति अमेरिका को काबू में रख पाएगी! इसके लिए क्षेत्र की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण जरूरी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फूटी आंखों नहीं सुहाती उपस्थिति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;एक ध्रुवीय विश्व में अमेरिका के हाथों कई बार अपमानित हो चुका रूस हर हालत में अपने पुराने महाशक्ति वाले रुतबे को हासिल करने के साथ-साथ अपने मुंह बाएं आ बैठे अमेरिका को अफगानिस्तान में वैसी ही अपमानजनक पराजय तक पहुंचाना चाहता है जैसी उसे अस्सी के दशक में अफगान मुजाहिदों के हाथों झेलनी पड़ी थी। वह अमेरिका का भी वैसा ही हश्र देखना चाहता है। उसे इस इलाके में अमेरिकी फौजों की उपस्थिति भी फूटी आंखों नहीं सुहाती और ज्यों-ज्यों उसकी आर्थिक स्थिति ठीक हो रही है त्यों-त्यों वह अमेरिका से उन्हीं तेवरों के साथ बात कर रहा है जैसे शीतयुद्ध के जमाने में हुआ करते थे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फारस की खाड़ी के रास्ते का सपना&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जहां तक चीन का सवाल है तो परवान चढ़ते अमेरिकी प्रभाव से उसे दक्षिण एशिया के इस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाने में दिक्कत होती है। वैसे तो पाकिस्तान को उसने लगभग अपनी गोद में बिठा लिया है लेकिन वह अमेरिका के बराबर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने की स्थिति में नहीं है। इस वजह से वह त्रिगुट में शामिल होकर अमेरिका को इस क्षेत्र में सीमित रखना चाहता है ताकि वह अपने हितों की रक्षा आसानी से कर सके और पाकिस्तान के रास्ते फारस की खाड़ी तक उसकी सीधी पहुंच हो सके। इसके लिए जरूरी है कि पाकिस्तान में अमेरिकी प्रभाव को कम किया जाए। अमेरिकी प्रभाव कम होने से अपने वृहद आकार व अर्थव्यवस्था के साथ ही लाल सेना के दम पर चीन इस पूरे इलाके में तेजी से प्रभाव बढ़ा पाने में कामयाब होने के सपने देखता रहता है।&lt;br /&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 216px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SufWyvJxnGI/AAAAAAAAAPI/2MSj8ndeqVM/s320/UN-Flag.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397518845566098530" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दुश्मन का दुश्मन दोस्त नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अब भारत, दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश भारत अभी खूनी आतंकवाद से जूझ रहा है। अपने बड़े आकार के बावजूद भारत अभी भी विकास की राह पर कदमताल कर रहा है और चीन उसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा है। निसंदेह अमेरिकी प्रभाव भारत के दुश्मन पाकिस्तान को आक्सीजन देता रहता है। यह भी सत्य है कि अमेरिका ने 1971 के युद्ध में चीन को उकसाने की कोशिश भी की थी। इस क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति भारत के हितों के प्रतिकूल भी है और इस स्थिति में तीनों देशों का त्रिगुट एकजुट ताकत के साथ अपने हितों की रक्षा कर सकता है। लेकिन यह तभी सम्भव है जब तीनों देश वाकई एकजुट हों। ऐसा नहीं हो सकता कि एक तरफ चीन लगातार भारत की बांह मरोडऩे के ख्वाब देखता रहे और दूसरी ओर उसी के सहयोग से अमेरिका से दो-दो हाथ करने के सपने भी संजोए। कूटनीतिक जानकार तीनों देशों के त्रिगुट को अमेरिकी प्रभाव पर लगाम का बढिय़ा साधन तो मानते हैं लेकिन साथ ही चीन के बढ़ते प्रभाव से भविष्य में भारत के हितों पर होने वाले कुठाराघात से भी चिंतित हैं। &lt;br /&gt;भारत के बंगलूरू में हुई तीनों देशों रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव और चीनी यंग जिएची व भारतीय विदेश मंत्री के बीच हुई दसवीं बैठक में अफगानिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त पर हुए तालिबानी हमले की निंदा के साथ ही पाक की सरजमीं से सिर उठा रहे आतंकवाद से निपटने के लिए चीनी हामी भारतीय कूटनीति की बड़ी कूटनीतिक विजय के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस हामी के बाद चीन को अब गुलाम कश्मीर जैसे आतंकवादियों से भरे क्षेत्र में अपनी मौजूदगी पर फिर&lt;br /&gt;विचार करना पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में पाक समर्थित जैश ए मुहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर पाबंदी का विरोध करने वाले चीन का आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध का ताजा रुख समझ से बाहर है। साझा मंच पर चीन के साथ हां में हां मिलाने से पहले भारत को चीन के समक्ष यह साफ करना होगा कि अगर वाकई वह भारत के साथ मिलकर अमेरिकी प्रभाव पर अंकुश लगाना चाहता है तो उसे मुख में राम बगल में छुरी की नीति का त्याग करना पड़ेगा। कूटनीति के क्षेत्र में इस भारत की हठधर्मी कहा जा सकता है लेकिन आधुनिक कूटनीतिज्ञों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जो देश उसके भू-भाग पर अपना हक जताए वह दुश्मन का दुश्मन दोस्त की परिभाषा में फिट नहीं होता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-228496152219408584?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/228496152219408584/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/228496152219408584'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/228496152219408584'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html' title='&lt;strong&gt;संयुक्त राष्ट्र में विरोध, भारत में समर्थन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SufWyvJxnGI/AAAAAAAAAPI/2MSj8ndeqVM/s72-c/UN-Flag.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-4392144442809219579</id><published>2009-10-26T12:28:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T22:26:30.398-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>चीन की कूटनीतिक मक्कारी उजागर</title><content type='html'>&lt;strong&gt;दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर विरोध पत्र &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत से स्थिर और सकारात्मक रिश्तों की चाहत का संकेत देने के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 7 नवम्बर को प्रस्तावित तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की यात्रा के विरोध में लिखित विरोधपत्र सौंप कर अपनी कूटनीतिक मक्कारी उजागर कर दी है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चा-अम हुआ हिन (थाइलैंड) में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से मुलाकात के बाद यह साफ कर दिया था कि दलाई लामा भारत के सम्मानित अतिथि हैं और वे भारत में कहीं भी आ-जा सकते हैं। एक तरफ स्थिर और सकारात्मक रिश्तों की चाहत और दूसरी ओर विरोध पत्र ने चीनी हाथी के खाने और दिखाने के दांतों का फर्क दुनिया के सामने ला दिया है। विरोध पत्र दलाई लामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा पर दिया गया है। चीन अरुणाचल पर अपना दावा करता रहता है। &lt;br /&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 286px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SufV2F0GQVI/AAAAAAAAAPA/0LjfhkQdnUs/s320/dalai-lama-1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397517803677172050" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नहीं है असमंजस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इस मामले में पहली बार भारत असमंजस का शिकार नहीं है। भारतीय प्रधानमंत्री ने जिस जोरदार तरीके से थाईलैण्ड में पत्रकारों के सवालों के जवाब में दलाई लामा को सम्मानित अतिथि बताया उससे ये संकेत मिले कि इस बार भारत अपने पड़ोसी को कोई रियायत देने के मूड़ में नहीं है। वैसे माना जा रहा है कि भारत अगर दलाई लामा को अरुणाचल यात्रा पर जाने देता है तो चीन सीमा पर उकसाने वाली कार्रवाई भी कर सकता है। भारतीय कूटनीतिक यह संकेत दे रहे है कि दोनों देश तनाव के मुद्दों को मीडिया के जरिये तूल देने से बचेंगे और निर्धारित तंत्र के जरिये मतभेद दूर करेंगे। मनमोहन ने जियाबाओ से बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि दलाई की अरुणाचल यात्रा को लेकर भारत अपना रुख नहीं बदलेगा। दलाई का मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत के दौरान नहीं आया, लेकिन आसियान नेताओं के रात्रिभोज के दौरान यह बात उठी तो जियाबाओ को भारत का रुख बता दिया गया। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सूत की उलझी हुई गुत्थी है चीनी कूटनीति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीनी मामलों के जानकारों के मुताबिक चीन का रिश्तों में गर्माहट लाने का संकेत और विरोध पत्र उसकी कूटनीति को उजागर करने के लिए पर्याप्त है। चीन चाहता है कि दुनिया के समक्ष उसकी छवि तनाव पैदा करने वाले देश की नहीं बने इसलिए उसके प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया कि भारत से स्थिर व सकारात्मक रिश्तों की जरूरत है लेकिन साथ ही उसने अपने राजनयिक से विरोधपत्र दिलवाकर भारत से विवाद के तमाम मुद्दों पर अपने अडिय़ल रुख का परिचय भी दे दिया है। अब यह भारत पर है कि वह चीन को कूटनीतिक मोर्चे पर शिकस्त कैसे देगा। सूत की उलझी हुई गुत्थी जैसी चीनी कूटनीति शीर्ष स्तर पर पहली बार अपना रुख सकारात्मक दिखाने के लिए बाध्य हुई है। भले ही वह दिखावे के लिए ही क्यों न हो। &lt;br /&gt;भारत को यह समझना होगा कि पहली बार ऐसा कैसे हुआ। चीनी मामलों के जानकारों के अनुसार अब तक कमजोर समझे जाने वाले भारत ने पहली बार चीन को न सिर्फ करारा जवाब दिया बल्कि चीनी सीमा पर सेनाओं को मजबूत करने का अभियान ही छेड़ दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की परियोजना में चीनी भागीदारी पर चीन को हद में रहने की सलाह देने के साथ ही भारत ने चीन को कश्मीर वीजा प्रकरण में भी कठोर प्रतिक्रिया दी। इतिहास गवाह है कि चीन अपने उस दुश्मन से संबंध दिखावे के लिए ठीक करने की कोशिश में जुट जाता है जो चीनी ईंट का जवाब पत्थर से देने को तैयार हो।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-4392144442809219579?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/4392144442809219579/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7342.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4392144442809219579'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4392144442809219579'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7342.html' title='&lt;strong&gt;चीन की कूटनीतिक मक्कारी उजागर&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SufV2F0GQVI/AAAAAAAAAPA/0LjfhkQdnUs/s72-c/dalai-lama-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1449453885704243797</id><published>2009-10-26T11:50:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T23:03:09.606-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सेना'/><title type='text'>घेराबंदी ध्वस्त कर सकेगी हल्की मशीनगन</title><content type='html'>&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 234px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Sufeh99CrtI/AAAAAAAAAPQ/nLCIgE7XNGA/s320/army.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397527353574469330" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पैराट्रूपर होंगे लैस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारतीय पैराशूट बलों को जल्द ही ऐसी हल्की मशीन गन से लैस किया जाएगा जिससे पैराशूट धरती पर आते-आते दुश्मन की घेराबंदी को ध्वस्त किया जा सके। इन मशीनगनों का इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 9 एमएम के ऐसे पिस्तौल भी विशेष बलों के लिए खरीदे जा रहे हैं जिनकी मारक क्षमता बेजोड़ होगी।&lt;br /&gt;अभी अमेरिकी और नाटो सेनाएं इराक, अफगानिस्तान में ऐसे ही हथियारों का प्रयोग कर रही हैं। आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशनों के अलावा भारत ऐसी विशेष सुरक्षा इकाइयां खड़ी कर रहा है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर विध्वंस फैला सकें। इसके लिए लम्बी दूरी तक गोलियों की बौछार करने वाले हथियारों की जरूरत है। अभी भारत की सेनाएं जिन हथियारों का उपयोग कर रही हैं वे परम्परागत युद्ध में काम लिए जाने वाले हैं जबकि पैराशूट बलों को गुप्त अभियानों के लिए ऐसे हथियारों की आवश्यकता होती है जो न सिर्फ तेजी से गोलियां बरसा सकें बल्कि उनकी मार करने की क्षमता भी लम्बी हो।&lt;br /&gt;इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले पखवाड़े भारत ने आरएफआई (रिक्वेस्ट फॉर इन्फोरमेशन) जारी कर दुनिया भर के हथियार निर्माताओं से प्रस्ताव मांगे हैं। आरएफआई में कहा गया है कि हथियार हल्का होने के साथ ही संचालन में आसान होना चाहिए। उसकी मारक रेंज कम से कम बारह सौ मीटर होनी ही चाहिए। उसकी बनावट इस तरह की होना आवश्यक है कि पैराट्रूपर आसानी के साथ उसे लेकर जम्प लगा सके और पैराशूट खुलने के बाद फायरिंग करता हुआ नीचे उतर सके।&lt;br /&gt;सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी हल्की मशीन गनों की जरूरत भारतीय सेनाओं को अर्से से है। विशेषकर जम्मूकश्मीर में आतंककारियों से लड़ रही सेना को हल्के हथियारों की तत्काल आवश्यकता है। उत्तरी कमान को भी ऐसी ही मशीन गनों की अपनी उन टुकडिय़ों के लिए जरूरत है जो बेहद ऊंचे स्थानों पर गश्त करती हैं। जिन मशीन गनों की खरीद के लिए आरएफआई जारी की गई है उन्हें हथियार बाजार में जनरल परपज मशीनगन के नाम से जाना जाता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1449453885704243797?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1449453885704243797/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1449453885704243797'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1449453885704243797'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html' title='&lt;strong&gt;घेराबंदी ध्वस्त कर सकेगी हल्की मशीनगन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Sufeh99CrtI/AAAAAAAAAPQ/nLCIgE7XNGA/s72-c/army.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6152736615698132526</id><published>2009-10-25T10:47:00.000-07:00</published><updated>2009-10-25T21:17:55.649-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>रणनीति के तहत हुआ कामरा में हमला!</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 213px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUi3zfwKXI/AAAAAAAAAOQ/c7NyzSLrIMk/s320/Kamra.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396758070584945010" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हमला स्थल परमाणु हथियार ठिकाने का हिस्सा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तानी पंजाब के कामरा में स्थित वायुसैनिक अड्डे पर तालिबान के निर्भीक आत्मघाती हमले से पाक के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में चिंता व्याप्त हो गई है। पाक परमाणु हथियारों के आतंकवादियों के हाथों पड़ जाने की आशंकाओं को लेकर भारत जितना चिंतित है उतना ही अमेरिका भी उनकी सुरक्षा को लेकर परेशान है। कामरा वायुसैनिक अड्डे के पास ही पाकिस्तान का एक परमाणु ठिकाना है। अड्डे पर आया हमलावर जितने ताकतवर बम बांधकर आया था उससे बहुत बड़े इलाके में अफरा-तफरी फैल गई थी। &lt;br /&gt;पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को यूं तो बेहद सुरक्षित माना जाता है। कम से कम आतंककारियों की पहुंच उन तक आसानी से नहीं हो सकती लेकिन जिस तरीके से कामरा में हमला किया गया उसने सुरक्षा विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। आतंककारियों की रणनीति से वाकिफ एक रक्षा विशेषज्ञ का मानना है कि रावलपिण्डी में पाक सेना मुख्यालय पर हमले के बाद कामरा में वायुसैनिक अड्डे पर आत्मघाती हमला निश्चित रणनीति के तहत हो सकता है। शायद आतंककारी तालिबान हमले के दौरान उत्पन्न अफरा-तफरी तथा सुरक्षा में चूक का जायजा लेकर परमाणु ठिकाने पर हमले की चूक रहित योजना बनाने की कोशिश कर रहे हों। वैसे कामरा वायुसैनिक अड्डा पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम से संबंधित है। इसी वजह से परमाणु हथियारों की सुरक्षा के प्रति ताजा चिंता उत्पन्न हुई है। &lt;br /&gt;वायुसैनिक अड्डे पर आत्मघाती हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी और अनेक घायल हो गए। हमलावर कामरा छावनी के अंदर एयरोनॉटिकल काम्पलेक्स में पैदल चलकर पहुंचा और रोकने पर उसने अपने को विस्फोटकों से उड़ा दिया। विस्फोट के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया। इस दौरान काफी देर तक हड़बड़ी में सुरक्षा सैनिक बाहर से भीतर आते-जाते रहे। इसी हड़बड़ी ने परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर प्रश्रचिन्ह लगाया है। &lt;br /&gt;पाकिस्तानी मामलों के कुछ जानकारों की राय जुदा है। वे मानते हैं कि तालिबान के ताबड़तोड़ हमले उसकी मांद अर्थात दक्षिणी वजीरिस्तान में पाक सेना की कार्रवाई रुकवाने का दबाव बनाने के लिए किए जा रहे हैं। पाकिस्तान की सेना ने दक्षिणी वजीरिस्तान में पाकिस्तानी तहरीक ए तालिबान के प्रमुख हकीमुल्ला महसूद के नेटवर्क के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान छेड़ रखा है। संघर्ष में सौ से ज्यादा आतंकवादी और 18 सैनिक मारे जा चुके हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6152736615698132526?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6152736615698132526/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7604.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6152736615698132526'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6152736615698132526'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7604.html' title='&lt;strong&gt;रणनीति के तहत हुआ कामरा में हमला!&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUi3zfwKXI/AAAAAAAAAOQ/c7NyzSLrIMk/s72-c/Kamra.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2789648272001998635</id><published>2009-10-25T09:30:00.000-07:00</published><updated>2009-10-25T21:20:51.339-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>पाक मदद विवाद पर अमेरिकी ठंडे छींटे</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUjkBQY5dI/AAAAAAAAAOg/--fT33KU9t4/s320/us_pakistan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396758830192846290" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शर्तें पाक को मदद का नया अमेरिकी रास्ता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत को अहम रणनीतिक सहयोगी बताकर अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जा रही मदद को तीन गुना करने पर उठे विवाद पर ठंडे छींटे डालने की कोशिश की है। उसने कैरी लूगर विधेयक के जरिए मिलने वाली मदद को दक्षिण एशिया में लोकतंत्र के समक्ष उत्पन्न खतरों का सामना करने की कोशिश बताकर अमेरिका ने यह भी साफ करने की कोशिश की है कि मदद का उपयोग पड़ोसियों केे खिलाफ नहीं किया जाएगा।&lt;br /&gt;अमेरिकी मदद पर इस बार ज्यादा हो-हल्ला पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के इस रहस्योदघाटन के बाद हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका से मिलने वाली तमाम मदद सैन्य यूनिटों के पास ही रहती है। फिर भले ही वे अफगानिस्तान सीमा पर तैनात हों या भारत सीमा पर खड़ी हों।&lt;br /&gt;अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को साझा ख़तरे का सामना करने में पाकिस्तान की क्षमता में बढ़ोतरी की कोशिश भी बताया है। इस बीच पाक को सैन्य मदद पर कई पाबंदियां लगा दी गई हैं जिनमें राशि दिए जाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री की अनुमति को जरूरी बना दिया गया है।&lt;br /&gt;अमरीकी सीनेट ने रक्षा के लिए खर्च का जो विधेयक पारित किया है उसमें प्रावधान है कि पाकिस्तानी सेना को दी गई किसी भी सैन्य सामग्री का इस्तेमाल भारत के साथ तनाव बढ़ाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। माना जा रहा है कि प्रावधानों का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि अमरीका से मिलने वाली सैन्य सामग्री को केवल आतंकवाद के खिलाफ ही इस्तेमाल किया जा सकता है। विधेयक में प्रावधान है कि पाकिस्तान को मिलने वाले सैनिक साजो-सामान पर नजर रखी जाए और ये देखा जाए कि वह कहां पहुंचता है और किसके खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।&lt;br /&gt;रक्षा जानकारों के अनुसार यह पहली बार है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद पर इस तरह की शर्तें लगाई हैं। अन्यथा पूर्व में वह भारत की सभी आपत्तियों को दरकिनार कर पाकिस्तान को अंधाधुंध मदद देता रहा है जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता रहा है। जानकार अमेरिका की ओर से भारत को रणनीतिक सहयोगी बताए जाने को एशिया में बदलते समीकरणों की देन मानते हैं अमेरिका विरोधी लॉबी इसे भारत को भुलावे में रखकर पाकिस्तान को मदद देने के नए अमेरिकी रास्ते के रूप में देख रहे हैं। कुछ भी हो लेकिन इस बार पाकिस्तान को मदद पर शर्तें भारत के प्रति बदलते अमेरिकी दृष्टिकोण का परिचायक है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2789648272001998635?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2789648272001998635/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2271.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2789648272001998635'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2789648272001998635'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2271.html' title='&lt;strong&gt;पाक मदद विवाद पर अमेरिकी ठंडे छींटे&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUjkBQY5dI/AAAAAAAAAOg/--fT33KU9t4/s72-c/us_pakistan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-936319459106808540</id><published>2009-10-25T07:11:00.000-07:00</published><updated>2009-10-25T21:19:39.380-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>कूटनीतिक रसगुल्ला है सकारात्मक रिश्तों की चाहत</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 225px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUjOlHErII/AAAAAAAAAOY/AvM4jPjBs9Y/s320/cyber_war.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396758461860326530" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत के करारे जवाब के बाद चीन का नया पैंतरा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गफलत की रणनीति के तहत बढ़ा रहा है साइबर हमले की ताकत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लगातार गुर्रा रहे चीन ने भारत से स्थिर और सकारात्मक रिश्तों की चाहत दर्शाकर अपनी आक्रामक रणनीति को पिटारे में बंद करने की कोशिश शुरू कर दी है लेकिन दूसरी ओर वह साइबर हमले करने की अपनी क्षमता में दिनोंदिन बढ़ोतरी कर रहा है। &lt;br /&gt;एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन एशिया प्रशांत क्षेत्र के  देशों के कम्पयूटर नेटवर्क पर हमला करके अपनी क्षमता को जांचने की कोशिश में जुटा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन द्विपक्षीय विवाद होने की दशा में अपनी साइबर हमले की ताकत का इस्तेमाल कर सकता है।&lt;br /&gt;रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस के एक सलाहकार पैनल ने तैयार की है। पैनल ने रिपोर्ट में कहा है कि चीन के हैकर सरकार की सहमति से अमेरिकी कम्पनियों पर साइबर हमले कर रहे हैं। रिपोर्ट में कम्पनी के नाम का उल्लेख तो नहीं है लेकिन कहा गया है कि कम्पनी के नेटवर्क से अमेरिका से बाहर अन्य देशों में डाटा भेजा जा रहा है।&lt;br /&gt;अमेरिकी सलाहकार पैनल की रिपोर्ट भारत के कम्प्यूटर विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है क्योंकि चीन से भारत के संबंध बेहद उतारचढ़ाव वाले हैं और वे बिगडऩे के स्तर तक खराब हैं। माना जा रहा है कि चीन के हैकर सरकार के सहयोग से भारतीय सेनाओं की क्षमता को कमजोर करने के लिए उसके कम्प्यूटरों पर भी हमला बोल सकते हैं।&lt;br /&gt;रिपोर्ट के मुताबिक जिस तरह के साइबर हमले अमेरिका और अन्य देशों में हुए हैं, उनमें इस्तेमाल  संसाधनों से साफ है कि  बिना सरकारी मदद के ऐसे संसाधन नहीं जुटाए जा सकते। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य की लड़ाइयों में जीत के लिए चीनी सरकार साइबर युद्ध को अहम मानती है। &lt;br /&gt;इधर भारत के करारे जवाब के बाद चीन ने भारत से स्थिर और सकारात्मक रिश्तों की बात कही है।  &lt;br /&gt;प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की थाईलैंड में असियान देशों के सम्मेलन के दौरान हुई बातचीत में चीन का जो रुख सामने आया है वह कूटनीति की चाशनी में लिपटा ऐसा रसगुल्ला है जिसे निगलने की कोशिश में भारत का मुंह कड़वा हो सकता है।&lt;br /&gt;दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (आसियान) के थाईलैंड में आयोजित सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक से ठीक पहले चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने सकारात्मक रिश्तों की बात तो की लेकिन भारतीय भू-भाग पर चीनी दावे के संबंध में कुछ नहीं कहा। अधिकारिक रूप से दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक के बाद जारी जानकारी में इस बात का भी कोई जिक्र नहीं है कि चीन अपने घोषित शत्रुता वाले रुख से पीछे हटेगा अथवा नहीं।&lt;br /&gt;चीनी मामलों के जानकारों का मानना है कि चीन सीमा विवाद पर भारत से रियायत पाने के लिए दबाव बनाने की कोशिशों में नाकाम हो गया है इसलिए अब उसने स्थिर तथा सकारात्मक रिश्तों की बात की है। इसलिए भारत को चीन से सीमा विवाद पर होने वाली आगामी बातचीत के दौरान फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे क्योंकि चीन गफलत में रखकर वार करने के लिए प्रसिद्ध है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-936319459106808540?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/936319459106808540/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_9497.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/936319459106808540'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/936319459106808540'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_9497.html' title='&lt;strong&gt;कूटनीतिक रसगुल्ला है सकारात्मक रिश्तों की चाहत&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUjOlHErII/AAAAAAAAAOY/AvM4jPjBs9Y/s72-c/cyber_war.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5173207019039691193</id><published>2009-10-25T06:32:00.000-07:00</published><updated>2009-10-25T21:23:50.059-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बोफोर्स'/><title type='text'>जांच के भवसागर में फंसा बोफोर्स का प्रेत</title><content type='html'>&lt;strong&gt;ढाई सौ करोड़ खर्च करके मिले ढाक के तीन पात&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;स्वतंत्र भारत के इतिहास में हथियारों की दलाली से जुड़े अनगिनत कांडों में बोफोर्स कांड ऐसा है जिसका प्रेत अब मुक्ति के लिए छटपटा रहा है लेकिन जैसे ही वह मुक्ति के समुद्र में छलांग लगाने की कोशिश करता है कोई न कोई भारतीय नेता उसे टंगड़ी अड़ा देता है और वह फिर से जांच के भवसागर में फंस जाता है। &lt;br /&gt;दो दशक से अधिक समय तथा ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी बोफोर्स दलाली कांड में आज तक किसी चिडिय़ा के बच्चे को भी सजा नहीं हो पाई है। सीबीआई के कई निदेशक और सात प्रधानमंत्री बदल जाने के बाद भी भारत की राजनीति इस कांड का पीछा नहीं छोड़ रही। अलबत्ता बोफोर्स दलाली कांड के बाद से भारतीय सेना दुबली होती जा रही है लेकिन कुर्सी के भूखे भारत के नेताओं को सेना की चिंता नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 278px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUkOh_gSoI/AAAAAAAAAOo/RK4VvcMipp4/s320/Bofors.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396759560534903426" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;घोटाले में नामजद अधिकांश कथित अभियुक्तों को अदालतों ने बरी कर दिया। कई दुनिया से सिधार गए। आरोपियों में से एक मात्र इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोची ही जिंदा बचा है।जहां तक इस घोटाले के दायरे और उसकी जांच का सवाल है तो दो दशकों तक देश और विदेश में थका देने वाली कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद एक भी व्यक्ति को दोषी करार नहीं दिया जा सका है। इस घोटाले की जड़ें मलेशिया से लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन तक फैली हुई थी। पनामा से लेकर लिसेंस्टीन और लक्जमबर्ग तक खूब खतो-किताबत हुई। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। &lt;br /&gt;कुछ दिन पहले क्वात्रोची के खिलाफ आपराधिक आरोप वापस लेने के फैसले से अब फिर वे लोग शोर मचा रहे हैं जो सत्ता के गलियारों के दलाल हैं।&lt;br /&gt;क्वात्रोची के खिलाफ मामला वापस लेने की कोशिश को बोफोर्स घूस कांड पर पर्दा डालने की कोशिश का अंतिम अध्याय घोषित कर माकपा ने यह संकेत दिए कि दिल्ली में राजनीति करने वाले बोफोर्स के प्रेत की मुक्ति की राह का सबसे बड़ा रोड़ा हैं। जहां तक बोफोर्स तोप सौदे में दलाली लिए जाने का प्रश्न है तो बोफोर्स कम्पनी के अध्यक्ष मार्टिन आर्डबो की गोपनीय डायरी में क्यू, नीरो और गांधी का विश्वस्त वकील जैसे शब्दों का बार-बार जिक्र दलाली का ठोस सबूत माना गया। स्वीडिश रेडियो पर 16 अप्रेल 1987 को बोफोर्स सौदे में दलाली की खबर उजागर होने के सरकार ने अगस्त 1987 में मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित कर दी थी।&lt;br /&gt;अब दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भारत की अब तक की सबसे महंगी जांच में करीब 250 करोड़ रुपया खर्च हो चुका है। मामले में शामिल आरोपी या तो बरी हो गए या फिर दुनिया से विदा हो गए। दुनिया से विदा होने वालों में राजीव गांधी, विन चड्ढा और पूर्व रक्षा सचिव एसके भटनागर शामिल हैं। 1985 में इतालवी कंपनी स्नैमप्रोगेटी के भारत में प्रतिनिधि रहे एकमात्र आरोपी 70 वर्षीय ओतावियो क्वात्रोची अभी जीवित हैं। &lt;br /&gt;विडंबना देखिए कि बोफोर्स घोटाले पर सवार होकर प्रधानमंत्री बने वीपी सिंह अपने 11 महीने के प्रधानमंत्रित्वकाल में घोटाले की जांच में तेजी नहीं लाए। चंद्रशेखर सरकार ने भी कुछ नहीं किया। राजीव गांधी की हत्या हो जाने के बाद 1991 में प्रधानमंत्री बने पीवी नरसिम्हा राव भी ढाक के तीन पात स्थिति में जांच को छोड़ गए। उसके बाद 1996 से 1998 के बीच अल्पकाल के लिए प्रधानमंत्री बने एचडी देवेगौड़ा और आईके गुजराल तो कांग्रेस की बैसाखियों पर ही टिके थे। &lt;br /&gt;जहां तक भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का सवाल है तो 1998 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस मामले में पहला आरोपपत्र निचली अदालत में दाखिल करवाया। सीबीआई ने राजीव गांधी व हिंदुजा भाइयों का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल करवाया। एनडीए के कार्यकाल में ही सीबीआई को अदालतों में खूब झाड़ खानी पड़ी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने तो राजीव गांधी और हिंदुजा भाइयों के खिलाफ आरोपों को निरस्त कर दिया और उन्हें रिहा करने का आदेश भी दिया।&lt;br /&gt;देश के बुद्धिजीवियों और अंग्रेजी मीडिया के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके बोफोर्स दलाली कांड का जो हश्र होना है वह देश की जनता के सामने कभी न कभी आ ही जाएगा लेकिन यहां यह विचारणीय है कि इस कांड के बाद भारतीय थल सेना की हालत उस व्यक्ति जैसी है जिसे स्वस्थ होने के बाद भी वैद्यों ने पथ्य (परहेज)के लिए मजबूर दिया और इसी के चलते वह व्यक्ति बीमारी का शिकार हो गया। थलसेना अभी लम्बी दूरी तक मार करने वाले हथियारों विशेषकर तोपों की भारी कमी से जूझ रही है लेकिन रक्षा मंत्रालय दलाली के डर से खरीद की फाइलों पर कुण्डली मारकर बैठ जाता है। जब दुनिया भर की थलसेनाएं विशेषकर भारत के शत्रुओं की सेनाओं को पचास से साठ किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली तोपों से लैस किया जा रहा है तब भारतीय सेना को पुरानी पड़ चुकी बोफोर्स तोपों पर ही आश्रित रहना पड़ रहा है। निसंदेह बोफोर्स सौदे में दलाली लेने वालों को सजा मिलनी चाहिए लेकिन इसकी आड़ में देश की सेनाओं को कमजोर करने की साजिश का पर्दाफाश भी होना चाहिए। हालांकि यह कहा जा सकता है कि सैनिक तैयारियों का इस कांड से कोई लेनादेना नहीं है और वे बदस्तूर जारी हैं लेकिन हमें कारगिल युद्ध के समय तत्कालीन थलसेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक के उस बयान को नहीं भूलना चाहिए कि हम उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लड़ेंगे। उपलब्ध संसाधन शब्द का इस्तेमाल सेना की कमजोर तैयारियों का द्योतक था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5173207019039691193?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5173207019039691193/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5173207019039691193'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5173207019039691193'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_25.html' title='&lt;strong&gt;जांच के भवसागर में फंसा बोफोर्स का प्रेत&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUkOh_gSoI/AAAAAAAAAOo/RK4VvcMipp4/s72-c/Bofors.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-8240959357166197537</id><published>2009-10-23T23:30:00.001-07:00</published><updated>2009-10-25T22:04:54.859-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>रची जा रही है खलीफा राज की साजिश</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUt45ZN82I/AAAAAAAAAO4/hl2kM3wTyDU/s320/Hizbuttahiri.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396770183975924578" /&gt;&lt;br /&gt;क्या पाकिस्तान की मौजूदा कमजोर लोकतांत्रिक सरकार के तख्तापलट की साजिश रची जा रही है। ब्रिटेन के एक अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट से तो यही संकेत मिल रहा है। द संडे टाइम्स के मुताबिक पाकिस्तान में प्रतिबंधित हिज्ब उत तहरीर के सदस्य सैन्य विद्रोह के जरिए पाक सरकार को उखाड़ फेंकने तथा इस्लामाबाद में खलीफा राज की स्थापना का सपना देख रहे हैं। स्वयं को द लिबरेशन पार्टी इन ब्रिटेन कहने वाले इस समूह के सदस्यों का दावा है कि उन्होंने दुनियाभर में इस्लाम के प्रसार बेस के रूप में ब्रिटेन को चुना है।&lt;br /&gt;रिपोर्ट में कहा गया है कि हिज्ब उत तहरीर के कार्यकर्ता अक्सर ब्रिटेन तथा पाकिस्तान के बीच यात्रा करते रहते हैं। ब्रिटेन में रह रहे एक मुस्लिम शिक्षक के मुताबिक वह पाकिस्तानियों को इस अभियान से जोड़ने के लिए लाहौर की यात्रा कर चुका है। संगठन का उद्देश्य मुस्लिम तथा पश्चिमी देशों में शरीयत के तहत इस्लामी शासन की स्थापना करना है।&lt;br /&gt;हिज्ब उत तहरीर की नीतियों में से एक नीति पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को अपनी विचारधारा से प्रभावित करने की भी है। उल्लेखनीय है कि 2003 में कट्टरपंथी समूहों से संबंध रखने के आरोप में पाक सेना के 4 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि समूहों तथा गिरफ्तार अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया। हिज्ब उत तहरीर के एक सदस्य ने दावा किया कि उनकी भर्ती संगठन की पाकिस्तान इकाई ने की थी और ट्रेनिंग ब्रिटेन के सैंढुर्स्ट में दी गई थी। माना जाता है कि समूह की स्थापना ब्रिटेन में जन्मे पाकिस्तानी इम्तियाज मलिक ने 1990 के  दशक के शुरू में पाकिस्तान में की थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-8240959357166197537?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/8240959357166197537/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_23.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8240959357166197537'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8240959357166197537'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_23.html' title='रची जा रही है खलीफा राज की साजिश'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUt45ZN82I/AAAAAAAAAO4/hl2kM3wTyDU/s72-c/Hizbuttahiri.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1040387486278554137</id><published>2009-10-22T13:01:00.000-07:00</published><updated>2009-10-25T21:26:03.989-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>चीन ने फिर थपथपाई पाकिस्तानी पीठ</title><content type='html'>&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 230px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUkyAHC7dI/AAAAAAAAAOw/L3kt0yq9xbA/s320/Dragon.jpeg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5396760169915018706" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत को कश्मीर मामले में उलझाने की नई कोशिश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चीन ने कश्मीर मुद्दे को इतिहास के गर्भ से पैदा सवाल बताकर पाकिस्तान की पीठ थपथपाने की कोशिश की है। चीन का यह पैंतरा भारत को कश्मीर मामले में उलझाने की कोशिश है। चीन बासठ साल पहले हिन्दू और मुसलमानों को दो राष्ट्र मानकर हुए विभाजन के घावों को कुरेदना चाहता है। इन घावों को हवा मिली तो फिर एक बार मुसलमान आबादी बाहुल्य बताकर कश्मीर को पाकिस्तान की झोली में डाल देने का असफल दबाव बनाया जा सकता है। इससे पहले चीन कश्मीर के लोगों को अलग से वीजा जारी कर यह संकेत दे चुका है कि कूटनीतिक स्तर पर उसकी नीयत ठीक नहीं है।&lt;br /&gt;चीन के ताजा पैंतरे के बाद भारत को कश्मीर मामले के अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिशों को धराशायी करने के अथक प्रयास करने होंगे क्योंकि हाल ही इस्लामी देशों का एक संगठन भी ऐसी ही हिमाकत कर चुका है।&lt;br /&gt;तुर्रा यह कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कश्मीर मुद्दे को इतिहास की देन बताने के साथ ही भारत और पाकिस्तान को बातचीत से इसका हल निकालने की सलाह भी दे डाली। भारतीय पासपोर्ट धारक कश्मीरियों के लिए अलग वीजा जारी करने के मामले में भारत के विरोध के बाद चीन ने कश्मीर को इतिहास की देन घोषित कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए उसने दोनों देशों को बातचीत से समस्या का हल निकालने का सुझाव भी दे दिया।&lt;br /&gt;असल में तिब्बत में दो साल पहले हुए विद्रोह और सिक्यांग में दिनोंदिन बढ़ रहे कट्टरतावाद से परेशान चीन कश्मीर मुद्दे पर भारत का जोरदार विरोध करके एक तरफ तिब्बत से दुनियां का ध्यान हटाना चाहता है वहीं सिक्यांग में मुसलमानों के कथित दमन से पाकिस्तान के तालिबानियों के पेट में उठ रहे दर्द से उत्पन्न आतंकवाद की आशंका से भयभीत होकर कश्मीर का आलाप खींच रहा है ताकि पाकिस्तानी जनता सिक्यांग में लगभग खतरे में पड़ चुके इस्लाम की तरफ ध्यान ही नहीं दे। जहां तक तिब्बत का सवाल है तो चीन तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की अगले माह प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा का घनघोर विरोध कर तिब्बत में अस्थिरता फैलाने का आरोप दलाई के सिर मंढना चाहता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत-अमेरिकी नजदीकियों से परेशान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत और अमेरिका के बीच गहरे होते सामरिक संबंध चीन की चिंता का बड़ा कारण है। पिछले चार दशक से चीन अपनी शर्तों पर भारत से संबंधों का स्तर निर्धारित करता रहा है। इसी वजह से पिछले एक साल से चीन की आक्रामकता बढ़ गई है। 1962में चीन के रणनीतिकारों ने फैसला किया था कि बीजिंग भारत से अपनी शर्तो पर संबंध रखेगा। लेकिन अमेरिका अगर भारत से संबंध प्रगाढ़ करता है तो चीन की यह रणनीति कारगर नहीं रहती।  &lt;br /&gt;भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों के चीन पर पडऩे वाले असर के साथ ही भारत और चीन के संबंधों में पाकिस्तान एक बड़ा कारक है। इसी के चलते दोनों देशों के बीच तनातनी रहती है। एक ध्रुवीय एशिया में चीन काफी प्रभावशाली है लेकिन भारत ने बीजिंग के मुकाबले कुछ हद तक शक्ति संतुलन बना रखा है। यदि अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता है तो भारत का यही शक्ति संतुलन फैक्टर चीन के कुत्सित इरादों की राह में अटल चट्टान की तरह खड़ा हो जाएगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1040387486278554137?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1040387486278554137/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_22.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1040387486278554137'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1040387486278554137'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_22.html' title='&lt;strong&gt;चीन ने फिर थपथपाई पाकिस्तानी पीठ&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/SuUkyAHC7dI/AAAAAAAAAOw/L3kt0yq9xbA/s72-c/Dragon.jpeg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3216715707975036611</id><published>2009-10-20T22:00:00.000-07:00</published><updated>2009-10-22T10:26:41.925-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परमाणु'/><title type='text'>भारत का एनपीटी लॉबी को करारा झटका</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St6V9cgFYfI/AAAAAAAAAOI/xvRa5xERrQs/s320/NPT.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5394914286491754994" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अर्जेंटीना के साथ परमाणु प्रौद्योगिकी करार करके भारत ने दुनिया की उस एनपीटी लाबी को करारा झटका दिया है जो उसके पैरों में परमाणु प्रौद्योगिकी हंस्तांतरण संबंधी बेडिय़ां डालनी चाहती है। भारत ने बेहद तेजी से कार्रवाई कर एक साल के भीतर ही अपने सफर के लिए चुन-चुन कर दुनिया के हर महाद्वीप से अपने सात साथी खड़े कर लिए। हाल ही में अर्जेंटीना के साथ परमाणु करार कर भारत ने दक्षिण अमेरिका में भी परमाणु करार का खाता खोल दिया। इसी महाद्वीप का मुल्क ब्राजील भी जल्द ही दिल्ली के साथ नाभिकीय ऊर्जा करार कर लेगा। यूरेनियम के प्रचुर भंडार वाले उत्तरी अमेरिकी मुल्क कनाडा भी निकट भविष्य में भारत का साथी बन जाएगा।&lt;br /&gt;यूरोप में फ्रांस और एशियाई मुल्क रूस, कजाकिस्तान और मंगोलिया पहले ही भारत के साथ परमाणु संधि कर चुके हैं। अफ्रीका में नामीबिया परमाणु सफर का साथी बन चुका है। भारत ने उसे ही अल्जीरिया को साथ लाने का जिम्मा सौंपा है। दक्षिण अफ्रीका भी भारत का नाभिकीय सहयोग कर रहा है। यानी भारत अपने परमाणु अभियान का परचम चौतरफा लहरा रहा है।&lt;br /&gt;नवंबर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वाशिंगटन यात्रा से पहले अमेरिका के साथ पुर्नप्रसंस्करण संधि को लेकर बातचीत पूरी करने में जुटे भारतीय खेमे ने यह रणनीति उस एनपीटी लाबी को दरकिनार करने के लिए बनाई है जो अमेरिका के साथ परमाणु करार के बावजूद भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर अभियान से वंचित रखना चाहता है।  भारत यह बताना चाहता है कि परमाणु विस्फोट पर स्वैच्छिक पाबंदी के वादे पर भरोसा करके ही दुनिया के तमाम देश उसके साथ आ रहे हैं। ऐसे में उस पर एनपीटी लॉबी का दबाव बेमानी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3216715707975036611?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3216715707975036611/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3216715707975036611'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3216715707975036611'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_20.html' title='भारत का एनपीटी लॉबी को करारा झटका'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St6V9cgFYfI/AAAAAAAAAOI/xvRa5xERrQs/s72-c/NPT.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3947513454516653379</id><published>2009-10-19T22:29:00.000-07:00</published><updated>2009-10-20T01:55:43.319-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वायूसेना'/><title type='text'>तेजस की क्षमता से वायुसेना संतुष्ट</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1LHapvm4I/AAAAAAAAAN4/NTGBO7uVOkI/s320/Tejas.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5394550519445298050" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए की क्षमताओं का परीक्षण करने के बाद वायुसेना ने इस विमान को दुनिया के किसी भी आधुनिक विमान से कम नहीं माना है। उल्लेखनीय है कि भारत ने हल्के लड़ाकू विमान परियोजना के तहत वायुसेना के लिए तेजस नाम से लड़ाकू विमान बनाए हैं। वायुसेना ने हाल ही जामनगर स्थित वायुसेना ठिकाने पर पांच सप्ताह तक दो तेजस के बहुआयामी परीक्षण किए और विमान की सम्पूर्ण क्षमताओं पर संतोष व्यक्त किया।&lt;br /&gt;परीक्षण के दौरान तेजस ने ने पायलट को दिखाई देने वाले लक्ष्यों से निपटने में अपनी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इस चरण के बाद तेजस की उन क्षमताओं को परखा जाएगा, जिनमें लक्ष्य पायलट की नजरों से दूर होंगे।&lt;br /&gt;तेजस ने पहली बार वायुसेना अड्डे से काफी दूर तक उड़ान भरी। उम्मीद है कि तेजस दिसंबर 2010 तक वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पिछले साल कहा था कि वायुसेना में तेजस की सात स्क्वाड्रन शामिल की जाएंगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] 1982 से इस विमान पर काम कर रहा है।&lt;br /&gt;उल्लेखनीय है कि हाल ही भारतीय नौसेना ने भी नौ करोड़ रुपए में तेजस के समुद्री संस्करण का एक स्क्वाड्रन तैयार करने का आर्डर दिया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3947513454516653379?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3947513454516653379/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2784.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3947513454516653379'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3947513454516653379'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2784.html' title='तेजस की क्षमता से वायुसेना संतुष्ट'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1LHapvm4I/AAAAAAAAAN4/NTGBO7uVOkI/s72-c/Tejas.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3894141547449807893</id><published>2009-10-19T22:18:00.000-07:00</published><updated>2009-10-20T01:56:43.314-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सेना'/><title type='text'>दलदली इलाकों में भी दौड़ेंगे हमलावर जहाज</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 266px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1Jtp_PkvI/AAAAAAAAANw/IYkWTfabPBY/s320/Sir+Creek.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5394548977373778674" /&gt;&lt;br /&gt;गुजरात के सीमांत क्रीक इलाके की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय ने नए फास्ट अटैक क्राफ्ट की खरीद को हरी झंडी दे दी है।&lt;br /&gt;गुजरात के क्रीक इलाके की सुरक्षा कमजोरियों को दुरुस्त करने की सलाह सरकार को मुंबई हमले से पहले ही दी गई थी। इसी कड़ी में अब क्रीक इलाके की सुरक्षा मुस्तैद करने के लिए सीमा सुरक्षा बल [बीएसएफ] ऐसे जहाज खरीद रहा है जो कम पानी और दलदली इलाकों में भी पेट्रोलिंग कर सकेगा।&lt;br /&gt;नए फास्ट अटैक क्राफ्ट उथले पानी में दिन-रात पेट्रोलिंग के साथ संदिग्ध नौकाओं का पीछा कर पाएंगे। हर तरह की सुविधाओं से लैस चार नए क्राफ्ट के लिए निविदाएं भी आमंत्रित कर ली गई हैं। भारत-पाक सीमा पर गुजरात के क्रीक इलाके के कमजोर सुरक्षा इंतजामों चलते इस इलाके में घुसपैठ और तस्करी का खतरा काफी ज्यादा है। इस इलाके से नकली नोट, ड्रग्स, हथियार और विस्फोटकों के अलावा घुसपैठ भी होती है।&lt;br /&gt;26/11 के बाद से सरकार ने समुद्री सरहद की हिफाजत के इंतजामों को फास्ट ट्रैक पर डाल दिया है। खासकर गुजरात की समुद्री सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त बनाने के लिए ही गांधीनगर में तटरक्षक बल का क्षेत्रीय मुख्यालय भी स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री एके एंटनी 21 अक्टूबर को करेंगे। समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए बनाई गई नई व्यवस्था में तटरक्षक बल की कमान भी नौसेना के हाथ में दे दी गई है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3894141547449807893?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3894141547449807893/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_19.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3894141547449807893'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3894141547449807893'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_19.html' title='दलदली इलाकों में भी दौड़ेंगे हमलावर जहाज'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1Jtp_PkvI/AAAAAAAAANw/IYkWTfabPBY/s72-c/Sir+Creek.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-47932676026862283</id><published>2009-10-18T01:08:00.000-07:00</published><updated>2009-10-20T01:57:33.170-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तालिबान'/><title type='text'>कमजोर नहीं हुआ तालिबान</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 255px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StrOTyWP6mI/AAAAAAAAANo/3CepyBABzIU/s320/taliban2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5393850343057517154" /&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तान में लगातार हो रहे धमाके थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार दावा कर रही है कि तालिबान कमजोर हो गया है। इस बीच लाहौर में संघीय जांच एजेंसी के कार्यालय और दो पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों पर बृहस्पतिवार को हुए तीन हमलों ने पंजाब के तालिबान के पश्चिमोत्तर प्रांत के अशांत हिस्सों से संबंधों को उजागर कर दिया है।  &lt;br /&gt;एक पाकिस्तानी अखबार के अनुसार सुनियोजित और समन्वित प्रकृति के हमलों से साफ  हो गया है कि  बैतुल्ला मेहसूद की एक  ड्रोन हमले में गत अगस्त में मौत होने के बाद पाकिस्तानी तहरीक  ए तालिबान के शीर्ष नेताओं में आपसी विरोध होने के चलते संगठन के कमजोर हो जाने की खबरें बढ़ा चढ़ा कर पेश की गईं। तहरीक  ए तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख मेहसूद के दक्षिणी वजीरिस्तान में दो महीने पहले एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद पाकिस्तानी नेता यह कह रहे हैं कि आतंकवादियों का आंदोलन आपसी अंतर्विरोध से प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक  सहित गई नेताओं ने कहा कि  स्वात में दो हजार आतंककारियों को मार गिराने वाले सैन्य अभियान से स्थानीय तालिबान की बुनियाद कमजोर हुई है और वे अब हताशा में हमले कर रहे हैं। &lt;br /&gt;रावलपिंडी में गत सप्ताहांत सैन्य मुख्यालय पर दुस्साहसी हमला और लाहौर में हुए हमलों ने इस आकलन को गलत करार दिया है कि  मेहसूद की मौत के बाद तहरीक ए तालिबान अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। तालिबान ने बदले की भावना के साथ पलटवार कर साबित कर दिया है कि वह कमजोर नहीं हुआ है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-47932676026862283?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/47932676026862283/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/47932676026862283'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/47932676026862283'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_18.html' title='कमजोर नहीं हुआ तालिबान'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StrOTyWP6mI/AAAAAAAAANo/3CepyBABzIU/s72-c/taliban2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-9192270353745427570</id><published>2009-10-16T21:20:00.000-07:00</published><updated>2009-10-19T22:34:54.665-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तालिबान'/><title type='text'>प्रलाप नहीं है तालिबान की धमकी</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 238px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1L42xACDI/AAAAAAAAAOA/vnT0vVaK85U/s320/tehrik3zd2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5394551368805517362" /&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तानी तालिबान ने भारत के खिलाफ हमलों की धमकी देकर यह साबित कर दिया है कि देर-सबेर भारत को उनसे निपटना ही होगा। तालिबान ने धमकी दी है कि जैसे ही इस्लामाबाद पर तालिबान का कब्जा हो जाएगा वैसे ही वे भारत में इस्लामी राज्य की स्थापना का अभियान छेड़ देंगे। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ तालिबान की ताजा धमकी को घिरे हुए आतंककारियों का बेवजह प्रलाप मान रहे हैं लेकिन तालिबान की धमकी को हल्के से नहीं लिया जा सकता क्योंकि दुनिया की श्रेष्ठतम सैनिक तकनीक से लैस अमेरिका भी दस साल में तालिबान को नेस्तनाबूद नहीं कर पाया है।&lt;br /&gt;पाकिस्तानी तालिबान प्रमुख हकीमुल्ला मेहसूद ने पिछले दिनों कहा था कि हम आतंकवादियों को भारत से लड़ने के लिए भेजेंगे। ब्रिटेन के एक न्यूज चैनल पर हकीमुल्ला ने कहा कि हम एक इस्लामी देश चाहते हैं। यदि हम इसे हासिल कर लेते हैं तो हम सीमाओं पर जाकर भारतीयों के खिलाफ जंग में मदद करेंगे।&lt;br /&gt;चैनल को हकीमुल्ला का फुटेज मिला था। हकीमुल्ला ने पाकिस्तान में पिछले हफ्ते हुए ज्यादातर हमलों की जिम्मेदारी के साथ ही  रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय पर आतंकवादी को भी तालिबान का कारनामा बताया।  हकीमुल्ला ने कहा था  कि हम पाकिस्तानी सेना, पुलिस और मिलिशिया से लड़ रहे हैं क्योंकि वे अमेरिकी आदेशों का पालन करते हैं। यदि वे उनके आदेशों का पालन करना रोक दें तो उनके खिलाफ लड़ाई रोक दी जाएगी। &lt;br /&gt;वजीरिस्तान में दो माह पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख बैतुल्ला मेहसूद के अमेरिकी ड्रोन विमानों के हमले में मारे जाने के बाद हकीमुल्ला संगठन का नया प्रमुख बना है। उसने हाल ही में कई रिपोर्टरों से मुलाकात कर प्रतिद्वंद्वी गुट से संघर्ष में अपने मारे जाने की अफवाहों को गलत ठहराया था। हकीमुल्ला ने दावा किया कि उसका संगठन हेरोइन के साथ ही अन्य मादक पदार्थों की बिक्री से जिहाद के लिए धन जुटाता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-9192270353745427570?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/9192270353745427570/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2399.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/9192270353745427570'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/9192270353745427570'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2399.html' title='&lt;strong&gt;प्रलाप नहीं है तालिबान की धमकी&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/St1L42xACDI/AAAAAAAAAOA/vnT0vVaK85U/s72-c/tehrik3zd2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3912965622586525470</id><published>2009-10-16T12:09:00.000-07:00</published><updated>2009-10-16T12:15:47.127-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>हद में रहने की दो टूक सलाह से मिलेगा बराबरी का मंच</title><content type='html'>&lt;strong&gt;भारत से दो-दो हाथ करने की स्थिति में नहीं है चीन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कूटनीतिक चेतावनी की अपेक्षा दो टूक शब्दों में चीन को हद में रहने की सलाह भारत को चीन के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत करने का मंच प्रदान करेगी। अभी तक चीनी मामलों में भारत का संकोच ही उसकी कमजोरी बना हुआ था। पाक अधिकृत कश्मीर में पनबिजली परियोजना में चीनी मदद पर भारत कठोर रुख सामने आते ही चीन की अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आना ही इस बात का द्योतक है कि चीन अब भारत से दो-दो हाथ करने की स्थिति में नहीं है। इस बीच भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर नागमू पनबिजली की चीनी परियोजना पर भी अपना रुख साफ कर दिया है। &lt;br /&gt;हालांकि चीन की प्रकृति जल्दी हार मानने अथवा पीछे हटने की नहीं है लेकिन भारत में पिछले लोकसभा चुनावों के बाद पहले के मुकाबले अधिक स्थिर सरकार बनने से सुरक्षा नीति में आए परिवर्तन के चलते चीन को अपने बेहद आक्रामक रुख को थोड़ा नरम करने पर बाध्य होना पड़ेगा। चीनी अखबारों विशेषकर चीनी सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली में छप रहे नरम गरम लेखों से यहीं अंदाजा लगाया जा सकता है। चीनी अखबारों में भारत और चीनी सेनाओं की ताकत की तुलना से सम्बंधित लेखों का छपना इस बात का संकेत है कि चीन अब भारत को पहले जितना कमजोर नहीं मानता। पूर्वी सीमा पर हाल ही हुई घुसपैठ की घटनाओं के बाद भारतीय सेना को अग्रिम मोर्चों पर तैनात किए जाने के साथ-साथ वायुसेना की आमद-रफ्त बढ़ जाने ने चीनी रणनीतिकारों को आश्चर्य में डाल दिया।  &lt;br /&gt;वैसे भारत के साथ चीन के रुख में अचानक बदलाव कूटनीतिक पर्यवेक्षकों को हैरत में डाल रहा है। सीमा विवाद के बावजूद चीन के साथ हाल के सालों में कई स्तरों पर रिश्तों में भारी इजाफा हुआ है और आर्थिक रिश्ते तो इतने गहरे हो चुके हैं कि इसे तोड़ने से चीन को भारी नुकसान होगा। चीन और भारत रूस के साथ त्रिपक्षीय गठजोड़ बना चुके हैं और ब्राजील के साथ मिलकर चारों देशों ने एक चतुर्पक्षीय गठजोड़ बनाया हुआ है। मौसम बदलाव के मामले में दोनों देश तालमेल से काम कर विकसित देशों से लोहा ले रहे हैं। &lt;br /&gt;भारत और चीन के बीच इस समय करीब 50 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, जो चीन के पक्ष में झुका हुआ है। चीनी और भारतीय निर्यात में 20 अरब डॉलर का अंतर है। कई हजार चीनी कामगार भारत में हैं और भारतीय पेशेवर और विशेषज्ञ भी चीन में हजारों की संख्या में मौजूद हैं। वैसे चीन के बारे में प्रसिद्ध है कि वह अपने से ताकतवर से डरता है और कमजोर को डराने में विश्वास रखता है।&lt;br /&gt;इस बीच चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने अगले सप्ताह थाईलैण्ड में होने जा रही आसियान शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की गहरी इच्छा जताई है। जियाबाओ की इच्छा से ये संकेत मिले हैं कि चीन अब भारत को डराकर रखना तो चाहता है लेकिन डरने से इंकार करने पर भारत से बराबरी के स्तर पर बातचीत करने को भी तैयार है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3912965622586525470?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3912965622586525470/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3912965622586525470'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3912965622586525470'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html' title='&lt;strong&gt;हद में रहने की दो टूक सलाह से मिलेगा बराबरी का मंच&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-648233988960966574</id><published>2009-10-15T01:30:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T02:01:28.933-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>सैनिक वजह से है मनमोहन की अरुणाचल यात्रा का विरोध</title><content type='html'>&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 246px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbkzFxRmaI/AAAAAAAAAM4/Y0XKD4c8J-I/s320/Manmohan-Singh.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392749170196060578" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यात्रा के बाद शुरू हुई थी मोर्चे को मजबूत करने की कवायद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल यात्राओं पर चीन का विरोध कूटनीतिक नहीं है बल्कि उसके पीछे सैनिक कारण हैं। मनमोहन की इस वर्ष हुई पहली यात्रा के बाद ही अरुणाचल के मोर्चे को मजबूत करने की सैनिक कवायद शुरू हुई है। जिसका पहला चरण तेजपुर में सुखोई विमानों की तैनाती था। उसके बाद से ही वायुसेना व थलसेना ने इस राज्य में ढांचागत सुविधाओं के विकास का अभियान छेड़ दिया। इस अभियान से अरुणाचल सीमा पर छेड़छाड़ का चीनी मंसूबा नाकाम हो गया। भले ही चुनाव प्रचार के लिए सही लेकिन मनमोहन सिंह की दूसरी अरुणाचल यात्रा ने चीनी क्रोध की आग में घी का काम किया और उसने फिर मनमोहन की यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास पैदा करने वाली कठोर टिप्पणी की। भारत ने भी पहली बार चीन को सही मायने में उसकी औकात यह कहते हुए दिखाई है कि वह भारतीय भू-भाग के पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में गतिविधियां बंद कर दे।&lt;br /&gt;इस बीच चीन ने भी पूर्वी मोर्चे पर पुरानी हवाई पट्टियों को चालू करने की भारतीय वायुसेना की रणनीति के बाद इस मोर्चे पर अपनी वायुसैनिक सुविधाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है। उसने हाल ही तिब्बत क्षेत्र में स्थित लिंजी स्थित हवाई पट्टी को लड़ाकू विमानों के उतरने लायक बनाया है। भारतीय वायुसेना ने लिंजी में हवाईपट्टी विस्तार की चीनी हरकत की पुष्टि कर दी है लेकिन साथ ही कहा है कि वह अपने इलाके में वैसे ही कुछ भी कर सकता है जैसे भारत अपने क्षेत्र में सैनिक सुविधाओं के विकास के लिए स्वतंत्र है। चीन ने अपने इलाके में ढांचागत विकास के साथ-साथसैनिक लिहाज से व्यापक परिवहन सुविधाओं का निर्माण कर रखा है। भारतीय सीमा से ३० किलोमीटर दूर लिंजी में उसने हाल ही हवाई पट्टी का विस्तार किया है।&lt;br /&gt;वायुसेना का दावा है कि भारतीय इलाके में अभी सड़कों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाने की वजह से वायुसेना को अग्रिम मोर्चे पर हवाई पट्टियों को तैयार रखना ही होगा। &lt;br /&gt;भारतीय भू-भाग में पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों में ढांचागत सुविधाओं के विकास पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण सेना को इस इलाके में तैनात होने के लिए आज भी कम से कम सात दिन का वक्त चाहिए। इसी वक्त को कम करने के लिए भारत ने हवाई पट्टी विकास योजना को हाथ में लिया है। माना जाता है कि प्रधानमंत्री की एक साल में अरुणाचल प्रदेश की दो यात्राओं के बाद इस काम में तेजी आई है और सम्भवत: इसी वजह से चीन प्रधानमंत्री की यात्राओं पर एतराज कर रहा है क्योंकि कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की तवांग यात्रा पर चीन ने कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी। &lt;br /&gt;रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अरुणाचल यात्राओं के बाद ही चीनी सीमा पर भारतीय सैनिक हलचल तेज हुई है। पूर्व थलसेनाध्यक्ष और उत्तर पूर्व के एक राज्य के राज्यपाल जनरल जेजे सिंह ने बेहाल ढांचागत सुविधाओं पर चालू वर्ष की शुरूआत में रोष प्रकट किया था। उसी के बाद प्रधानमंत्री की यात्रा हुई और अरुणाचल में मोर्चे को मजबूती देने के काम में गति आई। हालांकि प्रधानमंत्री की यात्रा का घोषित उद्देश्य दूसरा था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-648233988960966574?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/648233988960966574/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_4989.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/648233988960966574'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/648233988960966574'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_4989.html' title='&lt;strong&gt;सैनिक वजह से है मनमोहन की अरुणाचल यात्रा का विरोध&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbkzFxRmaI/AAAAAAAAAM4/Y0XKD4c8J-I/s72-c/Manmohan-Singh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6124763255410579988</id><published>2009-10-15T00:49:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T02:20:39.464-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>शस्त्रागार में आने से पहले थरथरा रहा है चीन</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 170px; height: 244px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StboxnvCquI/AAAAAAAAANA/CnieVwxrMM0/s320/Agni3.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392753543000271586" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अजगव सरीखी है अग्नि 5 मिसाइल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारतीय शस्त्रागार में अभी अग्नि 5 मिसाइल शामिल भी नहीं हुई है लेकिन चीन अभी से उसकी मारक क्षमता जानकर थराथरा रहा है। चीनी अखबार एक अक्टूबर को कम्युनिस्ट शासन की वर्षगांठ पर गर्व के साथ प्रदर्शित बैलिस्टिक मिसाइलों से पशुपतिनाथ (शंकर) के अजगव धनुष सरीखी अग्नि 5 मिसाइल की तुलना कर अनुमान लगा रहे हैं कि जैसे ही यह मिसाइल तैनाती की स्थिति में आएगी वैसे ही चीन की भारत पर सैनिक श्रेष्ठता दम तोड़ देगी। अजगव वह धनुष था जिसे राम ने मिथिला में तोड़ा था। पुराणों के मुताबिक अजगव परमाणु शक्ति चालित ऐसा धनुष था जो युद्धस्थल में अनवरत अग्नि वर्षा करता था।&lt;br /&gt;चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली में (चीन के हरबिन तक हमला कर सकेगी भारत की नई मिसाइल) शीर्षक से प्रकाशित समाचार में कहा गया है कि भारत पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली जिस अग्नि 5 मिसाइल का विकास कर रहा है वह विस्तृत भारतीय भू-भाग में सड़क के रास्ते कहीं भी ले जाई जा सकती है और इसी खूबी के कारण इस मिसाइल की हमला करने की ताकत सात हजार किलोमीटर तक बढ़ सकती है।&lt;br /&gt;चीनी विशेषज्ञ का आकलन है कि 2011 में मिसाइल का पहला परीक्षण होने के साथ ही चीन की उत्तरी सीमा के छोर पर बसे शहर हरबिन तक हमला करने की क्षमता भारत में पैदा हो जाएगी। अग्नि पांच मिसाइल से चीनी माथे पर पैदा लकीरों की चर्चा करते हुए समाचार में कहा गया है कि इसके साथ ही भारत पर अब तक कायम चीन की सैनिक बढ़त समाप्त हो जाएगी। &lt;br /&gt;अग्नि पांच को भारत अगर अपने उत्तर-पूर्वी इलाके से दागेगा तो चीन के हरबिन शहर तक बने सैनिक ठिकानों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। मिसाइल को चीनी मिसाइल डोंगफेंग 31-ए के टक्कर का प्रक्षेपास्त्र माना गया है। यह चीनी मिसाइल अन्तरमहाद्वीपीय है। &lt;br /&gt;उल्लेखनीय है कि हैदराबाद में विकसित की जा रही पांच हजार किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि पांच मिसाइल अनोखी खूबियों से लैस है। इसकी सबसे बड़ी खूबी मोबाइल लांचर से दागे जाने वाली है। मोबाइल लांचर को सड़क के रास्ते आसानी से कहीं भी लाया ले जाया सकता है। चूंकि भारत विशाल भू-भाग वाला देश है इसलिए उसकी विभिन्न देशों के शहरों से अलग-अलग स्थानों से अलग-अलग दूरी है। उदाहरण के तौर पर अमृतसर से स्टॉकहोम पांच हजार किलोमीटर है तो कर्नाटक से उसकी दूरी सात हजार किलोमीटर है। ऐसी स्थिति में अग्नि पांच को अमृतसर लाकर दागा जाए तो वह स्टॉकहोम पर अचूक हमला करेगी। इसी वजह से इस मिसाइल को सात हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली मिसाइल माना जा रहा है। &lt;br /&gt;तीन चरणों वाले ठोस ईंधन के इंजनयुक्त इस मिसाइल से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका को छोड़कर दुनिया के किसी भी कोने में हमला किया जा सकता है। एक साथ तीन से दस परमाणु वारहेड ढोने की क्षमता वाला यह प्रक्षेपास्त्र प्रत्येक वारहेड से अलग-अलग निशाने पर वार कर सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6124763255410579988?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6124763255410579988/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2906.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6124763255410579988'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6124763255410579988'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2906.html' title='&lt;strong&gt;शस्त्रागार में आने से पहले थरथरा रहा है चीन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StboxnvCquI/AAAAAAAAANA/CnieVwxrMM0/s72-c/Agni3.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5426545917749795319</id><published>2009-10-15T00:11:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T03:05:46.287-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='खतरा'/><title type='text'>चीन ने दी होड़ की आग में एक और आहुति</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 294px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbzJiRU3SI/AAAAAAAAANI/HzHj6GLx_I8/s320/President+of+China.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392764948966595874" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;संयुक्त रक्षा उद्यम लगाएंगे चीन व पाकिस्तान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रूस और भारत के संयुक्त रक्षा उद्यम की तर्ज पर चीन ने भी अपने बगलगीर पाकिस्तान को संयुक्त रक्षा उद्योग लगाने का प्रस्ताव देकर दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ की आग में एक और आहुति देने की घोषणा कर दी है। भारत की प्रगति से क्षुब्ध चीन अब पाकिस्तान को ऐसे हथियारों से लैस करने की कोशिश कर रहा है जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदमों को थामा जा सके।&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली चीन यात्रा पर गए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने यह कहकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी हे कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति कैसी भी हो, पाकिस्तान और चीनियों के दिल व हाथ हमेशा मिले रहेंगे। दोनों ने गुलाम कश्मीर से चीन को जोडऩे वाल कराकोरम राजमार्ग के उत्तरोत्तर विकास की परियोजना को अमली जामा पहनाने का निश्चय भी व्यक्त किया। चीन गुलाम कश्मीर में झेलम जलविद्युत परियोजना में सहयोग भी देगा।&lt;br /&gt;इधर अमेरिका ने भी तमाम भारतीय चिंताओं को दरकिनार कर पाकिस्तान को 18 नए एफ-16 युद्धक विमान देने के समझौते के तहत पहला विमान सौंप दिया है। अमेरिका ने अस्सी के दशक में पाकिस्तान को एफ-16 विमान दिए थे। अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित ये विमान ध्वनि की रफ्तार से दोगुनी गति से उड़ता है और सटीक हमलों के लिए जाना जाता है। यद्यपि भारत की वायुसेना खासी मजबूत है लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान को नए विमानों से लैस किए जाने की अमेरिकी नीति के साथ ही युद्धक विमान बनाने के कारखाने की पाकिस्तान में स्थापना के लिए चीन का सहयोग भारत के लिए खतरे की घंटी है।&lt;br /&gt;इस संयुक्त खतरे से निपटने के लिए भारत को अपनी हल्की लड़ाकू विमान परियोजना में तेजी लानी होगी। साथ ही नए विमानों के निर्माण की योजना बनाकर चीन और पाकिस्तान के संयुक्त खतरे का मुकाबला करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब चीन पाकिस्तान के कंधों पर रखी बंदूक को दागने की हिमाकत शुरू कर देगा। पूर्व में भी चीन ऐसा ही कर चुका है। 1965 का युद्ध ऐसी ही चीनी हिमाकत का परिणाम था। हालांकि उसमें अमेरिकी उकसाहट का भी कम योगदान नहीं था क्योंकि पाकिस्तान अमेरिकी पैटन टैंकों के नशे में चूर था और इसी वजह से उसने कच्छ के रण में भारतीय फौजों पर धावा बोल दिया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5426545917749795319?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5426545917749795319/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_15.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5426545917749795319'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5426545917749795319'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_15.html' title='&lt;strong&gt;चीन ने दी होड़ की आग में एक और आहुति&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbzJiRU3SI/AAAAAAAAANI/HzHj6GLx_I8/s72-c/President+of+China.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3143419687123851121</id><published>2009-10-14T23:33:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T00:02:49.591-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>ताइवान की चीन को हद में रहने की चेतावनी</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 216px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbJAEo3gjI/AAAAAAAAAMo/kZW2wNTlNS4/s320/taiwan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392718606905082418" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;छह सौ किलोमीटर दूरी की मिसाइल का परीक्षण&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;दशकों से चीन की आंख में किरकिरा रहे ताइवान ने छह सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण कर चीन को अपनी हद में रहने की चेतावनी दी है। कम्युनिस्ट शासन की साठवीं वर्षगांठ पर एक अक्टूबर को चीन ने अपना शक्ति प्रदर्शन कर ताइवान को भयभीत करने की कोशिश की थी। चीन कई दशकों से ताइवान को अपना हिस्सा मानता रहा है और कई बार सशस्त्र संघर्ष के जरिए उसने ताइवान को उदरस्थ करने की कोशिश भी की है।&lt;br /&gt;छह सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण करके ताइवान ने चीन को दिखा दिया है कि अब अगर उसने ताइवान को हड़पने की कोशिश की तो वह उसकी ईंट से ईंट बजाने को तैयार है। दक्षिणी ताइवान के चियुपेंग बेस से किए गए परीक्षण के बाद ताइवानी मिसाइल को सेना को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मिसाइल को जमीन के साथ ही समुद्र से भी दागा जा सकता है। &lt;br /&gt;रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान की यह मिसाइल चीन के दक्षिण-पूर्व स्थित हवाईअड्डों व मिसाइल ठिकानों के साथ ही पेईचिंग तथा हांगकांग पर भी हमला करने में सक्षम है। उल्लेखनीय है कि चीन ने एक अक्टूबर को किए गए शक्ति प्रदर्शन में बैलेस्टिक मिसाइलों का बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर पड़ोसियों को परोक्ष रूप से धमकाने की कोशिश की थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3143419687123851121?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3143419687123851121/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_5670.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3143419687123851121'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3143419687123851121'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_5670.html' title='&lt;strong&gt;ताइवान की चीन को हद में रहने की चेतावनी&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbJAEo3gjI/AAAAAAAAAMo/kZW2wNTlNS4/s72-c/taiwan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2731976302027476984</id><published>2009-10-14T23:12:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T00:11:27.701-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परमाणु'/><title type='text'>लिटिल ब्यॉय जितना घातक होगा नया अमेरिकी बम</title><content type='html'>अमेरिका एक ऐसा बम बना रहा है जो एक मीटर से अधिक मोटाई वाले सीमेंट, कंक्रीट और सरियों से बने बंकरों के परखच्चे उड़ा सकता है। बम 2010 में तैयार होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस गैर परमाणु बम का निर्माण उन देशों के गुप्त परमाणु ठिकानों पर हमले के लिए तैयार किया जा रहा है जो अमेरिकी धमकियों के बावजूद परमाणु हथियार बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस बम को अमेरिकी बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों से बरसाया जाएगा। बी-2 बमवर्षक राडार की क्षमताओं से ऊंची उड़ान भरता है। बम ऐसे भूमिगत बंकरों को भी तहस-नहस कर देगा जिनका निर्माण चार हजार पांच सौ पैंतीस किलोग्राम कंक्रीट के इस्तेमाल से किया गया हो।&lt;br /&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbK-P0ozpI/AAAAAAAAAMw/GX6ZAebAFLQ/s320/usaflag.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392720774570757778" /&gt;&lt;br /&gt;जानकार ताजा अमेरिकी बम निर्माण परियोजना को ईरान और उत्तर कोरिया से निपटने की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। हाल ही अमेरिकी खुफिया संस्था ने यह रिपोर्ट दी थी कि ईरान ने अपने कौम शहर के पास एक पहाड़ में काफी गहरे खोद कर परमाणु बम निर्माण प्रयोगशाला बना रखी है। गहराई पर बेहद मोटे कंक्रीट से बने बंकरों को ध्वस्त करने के लिए अभी कारगर बम दुनिया में किसी भी देश के पास नहीं है। इसीलिए अमेरिका पन्द्रह टन का शक्तिशाली मैसिव आर्डिनेंस पेनीट्रेटर बम बना रहा है। इस बम में 2400 किलोग्राम विस्फोटक होगा। अभी तक के परम्परागत बमों के मुकाबले यह बम दस गुना अधिक शक्तिशाली होगा। बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों में विशेष बदलाव कर इस बम की तैनाती का स्थान बनाना शुरू कर दिया गया है। इसके लिए अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने करीब ढाई अरब रुपए का बजट मंजूर कर दिया है।&lt;br /&gt;परम्परागत युद्धों में भी इस बम का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बम छोटे परमाणु बमों जितना ही घातक होगा। लेकिन इससे विकिरण नहीं फैलेगा। रक्षा विशेषज्ञों की राय है कि इस बम का विस्फोट कई किलोमीटर के दायरे में जीवन का नामोनिशान मिटा देगा। इसे जापान पर गिराए गए परमाणु बम लिटिल ब्यॉय का लघुरूप माना जा सकता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2731976302027476984?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2731976302027476984/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_346.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2731976302027476984'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2731976302027476984'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_346.html' title='&lt;strong&gt;लिटिल ब्यॉय जितना घातक होगा नया अमेरिकी बम&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StbK-P0ozpI/AAAAAAAAAMw/GX6ZAebAFLQ/s72-c/usaflag.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-594366730378059211</id><published>2009-10-14T22:49:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T22:21:24.424-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='माओवादी'/><title type='text'>असहनीय है माओवादियों का आरोप</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 229px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgCuk2B80I/AAAAAAAAANQ/wAT9Adp6erw/s320/tibet_map.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5393063552963703618" /&gt;&lt;br /&gt;तिब्बत सीमा से सटे नेपाली कस्बे मुस्तांग में भारत के सहयोग से बनाई गई सामुदायिक कल्याण योजना का उद्घाटन करने गए भारतीय राजदूत पर नेपाल के माओवादियों का चीन की जासूसी करने का आरोप असहनीय है। चीन की गोद में जा बैठे माओवादियों का यह कदम भारत की आंखें खोलने वाला है। &lt;br /&gt;अब तक चीन की ओर झुके हुए माने जा रहे माओवादियों का ताजा आरोप हिमालय की तराई में बसे नेपाल में भारत के हितों पर कुठाराघात करने का एक और कुत्सित प्रयास है। नेपाल में चीनी विस्तारवाद के हथियार के रूप में प्रतिस्थापित होने की कोशिश कर रहे माओवादियों पर लगाम लगाए बिना भारत स्थलीय सीमा से जुड़े नेपाल में चीनी फौजों के प्रवेश की सम्भावनाओं को समाप्त नहीं कर सकता है।&lt;br /&gt;दरअसल भारतीय राजदूत पर जासूसी के आरोप की जड़ वह मुस्तांग कस्बा है जहां से चीनी आक्रमण के समय तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरु दलाई लामा के सैनिकों ने चीनी सेनाओं के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध किया था। इसी कस्बे में भारत ने धन मुहैया कराकर एक सामुदायिक केन्द्र खोला है। चीन को भारत का यह विकासवादी रवैया शुरू से ही पसंद नहीं है लेकिन पूर्व में नेपाल में कायम राजशाही के झण्डे के नीचे शासन कर रहे मध्यमार्गी राजनीतिकों ने चीन की गोद में बैठने से इंकार कर दिया था। वे जानते थे कि भारत ही उनका असली मददगार है और चीन वह पड़ोसी है जिसे मददगार समझकर अगर एक बार भी नेपाल में गतिविधियों की इजाजत दी गई तो वह पूरे नेपाल को अपने प्रभावक्षेत्र में ले लेगा। &lt;br /&gt;नेपाली राजनीति के जानकारों का मानना है कि मात्र छह माह सत्ता में रह पाए माओवादी अब चीन की मदद से मौजूदा नेपाल सरकार को अस्थिर कर फिर से सत्ता में आकर नेपाल पर चीनी प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं ताकि वे भारत का ब्लैकमेल करने की स्थिति में आ जाएं। नेपाल में चीनी प्रभाव भारत के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है और उसके विस्तार को रोकने के लिए मजबूरन भारत को माओवादियों की वे शर्तें माननी होंगी जिनसे नेपाली जनता हमेशा के लिए चीनी शिकंजे में फंसती चली जाएगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-594366730378059211?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/594366730378059211/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2748.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/594366730378059211'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/594366730378059211'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_2748.html' title='&lt;strong&gt;असहनीय है माओवादियों का आरोप&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgCuk2B80I/AAAAAAAAANQ/wAT9Adp6erw/s72-c/tibet_map.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5612032264149017447</id><published>2009-10-14T22:16:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T22:42:16.747-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>चीन से उलझना चाहता है भारत</title><content type='html'>&lt;strong&gt;विस्तारवादी ड्रैगन का आरोप&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अपने आधा दर्जन से अधिक पड़ोसियों से कालांतर में सशस्त्र संघर्ष कर चुका विस्तारवादी चीन अपने विशाल पड़ोसी भारत को ब्रिटिश विरासत के चलते नायकत्व की भावना से ग्रस्त मानता है। चीनी सत्तारूढ़ पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली में छपे एक लेख में कहा गया है कि भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश को अपनी प्रभाव छतरी के नीचे लाकर दक्षिण एशिया की महाशक्ति होने का दम्भ पाले हुए है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;विरासत में मिला है उपनिवेशवाद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 226px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgHnE_RkaI/AAAAAAAAANY/t7pNzpeJm-E/s320/chinese-dragon.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5393068921711595938" /&gt;&lt;br /&gt;लेख में कहा गया है कि आज कोई इस बात से इंकार नहीं करता कि भारत एक शक्ति है लेकिन इसी वजह से भारतीयों की सोच संकुचित हो रही है। वे ऐसे मुद्दों को उछाल रहे हैं जिनसे जनता को उद्देलित कर पड़ोसियों के खिलाफ भड़काया जा सके। इसी वजह से भारत लगातार चीन से जुड़ी सीमा के मुद्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है और यह उसकी चीन से उलझने की नीति का हिस्सा है। वैसे इसमें कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि भारत ब्रिटिश विरासत के चलते उत्पन्न उपनिवेशवादी मानसिकता से ग्रस्त है। इसी वजह से वह पुराने ब्रिटिश भारत में शामिल पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ ही नेपाल और म्यांमार के साथ अपने उपनिवेश जैसा व्यवहार कर रहा है। पूर्व में इन देशों पर ब्रिटिश भारत का शासन होने की विरासत को भारत अपनी थाती मानते हुए अब अपना नायकत्व इन देशों पर थोपना चाहता है। भारत को कपटी घोषित करते हुए लेख में कहा गया है कि इसी वजह से पूर्व में भारत ने सीमा विवाद पर चीन की ओर से दी गई रियायतों पर आंखे मूंद लीं और पाकिस्तान से सीमा विवाद हल करने में अकड़ दिखाई। &lt;br /&gt;बहुत से भारतीयों को शायद पता नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक बार यह कहा था कि भारत दुनिया में सिर्फ एक महाशक्ति बनकर ही जी सकता है। यह कथन ही भारतीयों की मानसिकता का संकेत देने के लिए पर्याप्त है। महाशक्ति का भारत का सपना ही दक्षिण एशिया में आज उत्पन्न अस्थिरता का सबसे बड़ा जिम्मेदार है। लेख में भारत को सलाह दी गई है कि महाशक्ति बनने का सपना देखने से अच्छा है कि भारत आतंकवादी हमलों से देश की रक्षा करने के साथ ही गरीबी उन्मूलन पर ध्यान दे और उन जटिल जातीय, धार्मिक मुद्दों को हल करे जिनकी वजह से वह लडख़ड़ा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हास्यास्पद तथ्य, दोस्ती की आड़ में हमला करता है भारत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वैसे भी भारत की विस्तारवादी नीति पर्यावरण के लिए भी घातक होगी क्योंकि उत्तर में हिमालय पर सैनिक गतिविधियां पर्यावरण को स्थायी नुकसान पहुंचाएंगी तथा पाकिस्तान पर कब्जे की असफल कोशिशें एक ऐसा युद्ध भड़काएंगी कि दक्षिण एशिया का पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा। दुनिया जानती है कि भारत दोस्ती की आड़ में हमले करने के लिए प्रसिद्ध है। वह चीन और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। अगर भारत वाकई महाशक्ति बनना चाहता है तो उसे विदेश नीति में बदलाव करना होगा। अपने अहंकार को त्यागकर चीन से सीमाविवाद सुलझाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने होंगे। तभी जाकर वह एक जिम्मेदार देश बन सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नया नहीं है चीनी आलाप&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ताकत के बल पर अपने सभी पड़ोसियों को पिछले साठ साल से धमका रहे चीन के सत्तारूढ़ दल का भारत के खिलाफ यह आलाप नया नहीं है लेकिन इससे यह जरूर साफ हो जाता है कि अब चीन ताइवान, वियतनाम और जापान की अपेक्षा भारत पर नजर गड़ाए हुए हैं। वह निरन्तर अरुणाचल सीमा पर दबाव के साथ ही पाकिस्तान को सीधी सहायता और नेपाल के माओवादियों को पुचकार रहा है। भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवादी मानसिकता से ग्रस्त बताकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह मैकमोहन रेखा के ब्रिटिश भारत से हुए समझौते को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा। भारत में आतंकवादी हमलों के साथ-साथ धार्मिक, जातीय मुद्दों की बात को रेखांकित कर चीन ने भविष्य में पाकिस्तान के साथ अपने गठजोड़ को और मजबूती देने के संकेत भी दिए हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5612032264149017447?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5612032264149017447/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5612032264149017447'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5612032264149017447'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html' title='&lt;strong&gt;चीन से उलझना चाहता है भारत&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgHnE_RkaI/AAAAAAAAANY/t7pNzpeJm-E/s72-c/chinese-dragon.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1610576558214281818</id><published>2009-10-13T12:42:00.000-07:00</published><updated>2009-10-13T12:44:22.633-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परमाणु'/><title type='text'>पाक सेना मुख्यालय पर हमले ने उड़ाई अमेरिकी नींद</title><content type='html'>&lt;strong&gt;आतंककारियों के हाथ परमाणु हथियार पडऩे का अंदेशा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तानी सेना मुख्यालय पर आतंककारियों के हमले ने अमेरिकी नींद उड़ा दी है। अमेरिका अब इस बात का जायजा ले रहा है कि कहीं आतंककारी पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों के नजदीक पहुंचने में कामयाब नहीं हो जाएं। हालांकि अमेरिका कई वर्षों से यह कहता रहा है कि पाकिस्तानी परमाणु हथियार पूरी तरह महफूज हैं लेकिन आतंककारियों के ताजा हमले ने उसकी होश फाख्ता कर दिए हैं। अफगानिस्तान में फौजों की संख्या बढ़ाने के अमेरिकी निर्णय को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। &lt;br /&gt;पिछले माह अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सर्वोच्च कमाण्डर जनरल स्टेन्ले मैकक्रिस्टल ने पेंटागन को यह रिपोर्ट सौंपी थी कि सैनिकों की तादाद बढ़ाए बिना अलकायदा तथा तालिबान को हराना नामुमकिन है। रिपोर्ट के आधार पर फौज की संख्या बढ़ाने में ना-नुकुर कर रहे अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तानी सेना मुख्यालय पर हमले के तत्काल बाद तेरह हजार फौजियों की अफगानिस्तान में तैनाती की घोषणा कर दी है।   &lt;br /&gt;सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी परमाणु हथियार अब कम सुरक्षित हैं। 10 अक्टूबर के आतंककारी हमले के बाद अमेरिकी सोच में तेजी से आए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों ने जोर दिया है कि पाकिस्तानियों के चिंताजनक अति आत्मविश्वास के भरोसे परमाणु हथियारों को असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता है।&lt;br /&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि यह हो सकता है कि परमाणु प्रतिष्ठानों में वैज्ञानिक के रूप में आतंकवादियों के साथ सहानुभूति रखने वाले लोग काम कर रहे हों और वे चरमपंथियों तक सूचनाएं पहुंचा रहे हों। यह सम्भावना कम नजर आती है कि तालिबान अचानक हमला कर परमाणु प्रतिष्ठानों पर कब्जा कर सकें।&lt;br /&gt;पाकिस्तान के एकांत इलाकों में स्थित परमाणु प्रतिष्ठानों में सेना मुख्यालय से अधिक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है। अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 70 से 90 परमाणु हथियार हैं।&lt;br /&gt;वैसे आतंककारी पूर्व में सरगोधा स्थित वायु सेना अड्डे के नजदीक हमला कर चुके हैं, जहां संभवत: परमाणु मिसाइलें रखी हैं।  वाह कैंटोनमेंट पर भी हमला किया जा चुका है जहां परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मिसाइलों को जोड़ा जाता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने अपनी कई रिपोर्टों में इस बात का खुलासा किया है कि पाकिस्तानी सेना में शामिल कई लोगों के अलकायदा से संबंध हैं और वे 11 सितंबर 2001 के हमलों के कथित मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद जैसे आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में मददगार थे।&lt;br /&gt;इधर अफगानिस्तान में तेरह हजार सैनिकों की ताजा तैनाती के साथ अतिरिक्त सैनिकों की संख्या 34 हजार हो जाएगी, लेकिन इससे सैनिकों की कुल संख्या बढ़ाकर 68 हजार करने के फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1610576558214281818?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1610576558214281818/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7028.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1610576558214281818'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1610576558214281818'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_7028.html' title='&lt;strong&gt;पाक सेना मुख्यालय पर हमले ने उड़ाई अमेरिकी नींद&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-4786108608375871612</id><published>2009-10-13T12:14:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T22:46:29.883-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>सैनिक झड़पों की इबारत लिखना चाहता है चीन</title><content type='html'>&lt;strong&gt;अरुणाचल पर फिर तरेरी आंखे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत नहीं भूले कि बढ़ता व्यापार बढ़ाता है युद्ध की सम्भावना &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उगते सूरज की धरती अर्थात भारत के अरुणाचल प्रदेश में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा पर चीन ने फिर आंखें तरेरी हैं। चीन ने विश्व जनमत की परवाह किए बिना कहा है कि भारत और चीन के बीच विवादित इलाके अरुणाचल में भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य नहीं होने देगी। हालांकि कूटनीतिक स्तर पर भारत ने चीन की ताजा हरकत को खारिज कर दिया है लेकिन यह मानना ही होगा कि चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जताने के लिए अपनी हद से बाहर जाने को तैयार है। बंद कमरों में बौद्धिक जुगाली करने वाले भारत के बुद्धिजीवी अभी भी दोनों देशों के बीच बढ़ रहे व्यापार को केन्द्र में रखकर आलाप खींच रहे हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध की कोई सम्भावना नहीं है लेकिन वे भारत के प्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ चाणक्य की यह उक्ति भुला बैठे हैं कि ताकतवर पड़ोसी से बढ़ता व्यापार युद्ध की सम्भावनाओं को उसी गति से बढ़ा देता है जितनी तेजी से व्यापार बढ़ता है।&lt;br /&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 246px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgIkrciuuI/AAAAAAAAANg/sjQXQc0ZL5A/s320/Manmohan-Singh.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5393069980006922978" /&gt;&lt;br /&gt;चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 3 अक्टूबर को हुई अरुणाचल यात्रा पर चीन ने यह कहते हुए कठोर प्रतिक्रिया दी है कि उसकी गंभीर चिंता की अवहेलना करते हुए भारतीय नेता की विवादित क्षेत्र की यात्रा से वह काफी असंतुष्ट है। &lt;br /&gt;चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए एशियाई विकास बैंक [एडीबी] से मिलने वाले ऋण में बाधा डालने के प्रयास कर चुका है। इससे पहले वह निर्वासित तिब्बती नेता दलाई लामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा पर भी आपत्ति व्यक्त कर चुका है। उसने पिछले साल भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणाचल यात्रा पर आपत्ति जताई थी। उसके बाद ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अरुणाचल को उगते हुए सूरज की धरती करार देकर स्पष्ट कर दिया था कि पड़ोसी अरुणाचल पर बुरी नजर नहीं डाले।&lt;br /&gt;चीन से कभी नरम तो कभी गरम संबंधों पर अपनी नई पुस्तक माई चायना ईयर्स 1956-88 में भारत के पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवरसिंह ने भी ऐसे ही रहस्यों का खुलासा किया है जिन्हें आज तक सरकारी दस्तावेजों से बाहर नहीं निकलने दिया गया है। पुस्तक में चीन के साथ युद्ध का कारण माओत्से तुंग की उस सोच को बताया गया है जिसके तहत वह विस्तारवादी चीनी नेता यह मानता था कि भारत उसकी जमीन पर कब्जा कर रहा है। &lt;br /&gt;आखिर चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर बारम्बार क्यों विवाद खड़ा कर रहा है। इसके लिए हमें चीन की आंतरिक स्थिति में आ रहे परिवर्तन को देखना होगा। चीन वर्षों के संघर्ष के बाद भी ताइवान को हथियाने में नाकाम रहा है। जापान से उसका विवाद जारी है। रूस के साथ सीमा विवाद कभी भी भड़क सकता है। &lt;br /&gt;आग में घी का काम चीनी कब्जे में सिसक रहे तिब्बत में दो साल पूर्व हुए विद्रोह ने किया। इसी के साथ मुस्लिम बाहुल्य सिक्यांग में भी चीन को विरोध का सामना करना पड़ा रहा है। हालांकि उसने तिब्बत और सिक्यांग में जनसंख्या का अनुपात बदल दिया है और अब दोनों प्रदेशों में चीनी मूल की हान आबादी तिब्बतियों तथा मुस्लिमों के मुकाबले अधिक है। इसके बावजूद उसे दोनों प्रदेशों पर कब्जा बनाए रखने में मुश्किलें आ रही हैं। इस वजह से वह भारतीय प्रदेश अरुणाचल पर विवाद को हवा देकर सशस्त्र संघर्ष की भूमिका तैयार कर रहा है। &lt;br /&gt;चीनी विरोध में तेजी का एक बड़ा कारण भारत का पूर्वी सीमा पर अपनी रक्षा पंक्तियों को मजबूती देने की रणनीति भी है। भारत ने हाल ही अरुणाचल, लद्दाख, आसाम और उत्तरांचल से लगी चीनी सीमा पर सेनाओं की तैनाती बढ़ाने के साथ ही साजो-सामान की आपूर्ति बढ़ा दी है। चीनी सीमाओं पर पर्वतीय इलाके में स्वदेशी मिसाइलें तैनात कर चीनी रक्षा पंक्तियों को चकनाचूर करने की भारतीय रणनीति से चीन बौखला जाने की हद तक परेशान है। इसी वजह से वह अरुणाचल पर विवाद को हवा देकर इस स्तर तक लाना चाहता है कि सैनिक झड़पों की इबारत आसानी से लिखी जा सके। भारत यह नहीं भूले कि चीन ने इसी तरह के बयान 1960 में देने शुरू किए थे और दो साल बीतते-बीतते भारत को सबक सिखाने के लिए युद्ध छेड़ दिया। यद्यपि भारत की तैयारी मजबूत दिख रही है फिर भी देश को 1962 का सबक याद रखकर ही चीन को उसकी औकात दिखानी होगी। इसके लिए भारत को भी सैनिक तैयारी के साथ-साथ कूटनीतिक पैंतरों के जरिए सिक्यांग में चीनी अत्याचारों तथा तिब्बत पर चीनी कब्जे के खिलाफ विश्व जनमत तैयार करना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-4786108608375871612?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/4786108608375871612/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_3233.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4786108608375871612'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4786108608375871612'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_3233.html' title='&lt;strong&gt;सैनिक झड़पों की इबारत लिखना चाहता है चीन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StgIkrciuuI/AAAAAAAAANg/sjQXQc0ZL5A/s72-c/Manmohan-Singh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6874614889826314535</id><published>2009-10-13T11:19:00.000-07:00</published><updated>2009-10-13T11:24:37.198-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>बदलेगी सुरक्षा नीति, महत्व खो देगा पाकिस्तान!</title><content type='html'>&lt;strong&gt;कांग्रेस महासचिव ने दिए नीति बदलने के संकेत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तान को जरूरत से ज्यादा महत्व देकर कालान्तर में अपनी राह में कांटे बोने वाला भारत सम्भवत: चालू दशक समाप्त होते-होते अपनी सुरक्षा नीति की दिशा बदल लेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अपना रणनीतिक महत्व खोना शुरू कर देगा।&lt;br /&gt;ये महत्वपूर्ण संकेत केन्द्र सरकार की नीतियों को प्रभावित करने में सक्षम कांग्रेस महासचिव और युवा सांसद राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश की यात्रा के दौरान 13 अक्टूबर को दिए। करीब ढाई दशक बाद किसी नेता ने फिर से भारत की सुरक्षा नीति पर परोक्ष सवाल खड़ा कर उसे सही दिशा में देने की सलाह दी है। राहुल के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में पहली बार यह नीति बनाई थी कि पाकिस्तान को आवश्यकता से अधिक महत्व नहीं दिया जाए। अगर उसकी ओर से ईंट आए तो जवाब पत्थर से दिया जाए। &lt;br /&gt;स्वर्गीय राजीव गांधी ने अपनी नीति पर अमल भी किया। इसका उदाहरण 1986 में तब मिला जब चीनी फौजों से 1962 के बाद पहली बड़ी भिड़ंत नाथूला दर्रे पर हुई और भारत ने तोप तथा टैंक तैनात कर चीन को अहसास करा दिया कि इस बार उसके दांत खट्टे करने का पूरा इंतजाम है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गुजराल ने बदली थी नीति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रॉ के एक रिटायर्ड उच्चाधिकारी ने पाकिस्तान और चीन के प्रति बदली भारतीय नीति का खुलासा अपनी उस किताब में किया है जिस पर न्यायालय ने प्रतिबंध लगा दिया था। किताब में कहा गया है कि राजीव गांधी की नीति को उनके कई वर्ष बाद प्रधानमंत्री बने इन्द्रकुमार गुजराल ने पाकिस्तान डाक्ट्रिन की आड़ में बदल दिया। रॉ के उस प्रकोष्ठ को ही भंग कर दिया गया जो पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए बनाया गया था। उसके बाद के प्रधानमंत्री पाकिस्तान से संबंधों को ही महत्व देते रहे। भाजपा नीत राजग ने भी सुरक्षा नीति को पाकिस्तान केन्द्रित बनाए रखा। संप्रग सरकार की सुरक्षा नीति भी पाकिस्तान के इर्दगिर्द ही घूमती है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कई दशक बाद गई नजर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;दशकों के बाद किसी नेता ने पहली बार यह कहा है कि भारत में पाकिस्तान को जितनी तवज्जो दी जाती है, वह उसके आधे के योग्य भी नहीं है। आकार, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था समेत किसी भी कोण से दोनों देशों की तुलना उचित नहीं है। एकदिवसीय यात्रा पर 13 अक्टूबर को हिमाचल पहुंचे राहुल ने कहा कि हम पाकिस्तान को बहुत अधिक महत्व दे रहे हैं। वह एक छोटा सा देश है। भारत से उसकी तुलना नहीं की जा सकती।&lt;br /&gt;कांग्रेस महासचिव ने साफ किया कि पाकिस्तान के आंतरिक मामले भारत को प्रभावित जरूर करते हैं लेकिन उनका असर इतना बड़ा भी नहीं है कि हम उसकी चिंता में ही दुबले होते रहें। अलबत्ता पाक से संबंधित कुछ मुद्दों का हमें इंतजाम करना होगा। हमारी स्थिति मजबूत है।&lt;br /&gt;सांसद राहुल गांधी का यह कथन उत्साहजनक है। जितनी उनकी उम्र है उसके मुताबिक पाकिस्तान पर उनकी राय इस बात का द्योतक है कि भारत को पौराणिक वीर हनुमान की तरह अपनी शक्ति को पहचानना होगा। विकट दमखम और बेहद शक्तिशाली होने के बावजूद अभी तक उसकी छवि नरम देश की बनी हुई है। इस छवि को तोडऩे के लिए उसी नीति का अनुसरण जरूरी है जिसे आज अमेरिका ने अपना रखा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6874614889826314535?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6874614889826314535/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_8909.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6874614889826314535'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6874614889826314535'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_8909.html' title='&lt;strong&gt;बदलेगी सुरक्षा नीति, महत्व खो देगा पाकिस्तान!&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3189440757300667637</id><published>2009-10-12T12:31:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T12:33:03.947-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='माओवादी'/><title type='text'>कसनी ही होंगी प्रचण्ड की मुश्कें</title><content type='html'>&lt;strong&gt;धृष्टता की सीमाओं को पार कर चुके हैं माओवादी नेता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत को नेपाल की मौजूदा सरकार के सहयोग से नेपाली माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रचण्ड की मुश्कें आज नहीं तो कल कसनी ही होंगी। कूटनीति के जानकार भले ही इस राय से सहमत नहीं हो लेकिन प्रचण्ड जिस तरह खुलेआम चीन से पींगे बढ़ा रहे हैं उससे साफ है कि वे पूरी तरह से चीनी गोद में बैठे हैं और उसी की शह पर हिमालय की तराई में भारतीय हितों को दीर्घकालीन नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।&lt;br /&gt;रविवार को एक सप्ताह के दौरे पर चीन रवाना हुए प्रचण्ड ने कूटनीतिक मर्यादा को दरकिनार कर अपने एक साथी सांसद को नई दिल्ली भेजकर कहलवाया है कि भारत उनके ऊपर संदेह नहीं करे। क्योंकि उनका दौरा भारतीय हितों के खिलाफ नहीं है। प्रचण्ड का संदेश धृष्टता की सारी सीमाओं को पार करने वाला है। यद्यपि भारतीय विदेश नीति का लचीलापन प्रचण्ड की इस उद्दण्डता को भी बर्दाश्त कर जाएगा लेकिन एक न एक दिन उसे इस घमण्डी माओवादी नेता को काबू में रखने की जुगत करनी ही होगी।&lt;br /&gt;एक सप्ताह के दौरे पर गए नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पहले भी ऐसा ही रुख जाहिर कर चीन की ओर अपना झुकाव दिखा चुके हैं। यहां तक उन्होंने पिछले दिनों भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव की यात्रा के दौरान नेपाल में रहना तक उचित नहीं समझा और वे बहाने से हांगकांग चले गए। इतना ही नहीं वहां उन्होंने चीनी अधिकारियों से मुलाकात कर स्पष्ट संदेश दिया कि वे पूरी तरह भारत के खिलाफ हैं।&lt;br /&gt;पिछले साल नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी प्रचंड ने पहला  दौरा चीन का ही किया था। प्रचंड ने सत्तारूढ़ साम्यवादी पार्टी के आमंत्रण पर चीन जाने और भारत से ऐसा ही निमंत्रण मिलने पर विचार करने का बयान देकर अपनी नीति को स्पष्ट कर दिया है। अब भारत को सोचने की जरूरत नहीं है। उसे आर्थिक और सैनिक मदद देकर माओवादियों पर काबू पाने में नेपाल की मौजूदा सरकार की सहायता करनी चाहिए अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब उसे खुली सीमा वाले इस देश से लगने वाली सरहदों पर सेनाओं की तैनाती करनी पड़ेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3189440757300667637?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3189440757300667637/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1643.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3189440757300667637'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3189440757300667637'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1643.html' title='&lt;strong&gt;कसनी ही होंगी प्रचण्ड की मुश्कें&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-6951862354939113957</id><published>2009-10-12T12:04:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T12:08:44.846-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वायूसेना'/><title type='text'>नकारात्मक रवैये का शिकार है वायुसेना</title><content type='html'>&lt;strong&gt;नौकरशाह नहीं छोड़ पाए हैं खरीद पत्रावलियों पर कुण्डली मारने की आदत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;विशेषज्ञों की लगातार चेतावनियों के बावजूद भारतीय नौकरशाही सुरक्षा मामलों की पत्रावलियों पर कुण्डली मारने की आदत नहीं छोड़ पाई है। नतीजा भारतीय सेनाएं आधुनिकीकरण में पिछड़ रही हैं। पिछले हफ्ते अपना 77वां स्थापना दिवस मना चुकी वायुसेना नौकरशाहों के नकारात्मक रवैये का सबसे बड़ा शिकार है। जब कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैली सीमाओं के पार भारत के दुश्मन लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं तब वायुसेना अपनी स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या में कमी का सामना कर रही है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;टिप्पणियां देख कतरा जाते हैं नेता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सुरक्षा तैयारियों के मामले में भारतीय सरकार अभी तक न तो देश पर हुए हमलों से सबक सीख पाई और न दुनिया भर में हो रहे बदलावों से उसे कोई फर्क पड़ा। नतीजा भारत उस हथियार को तब हासिल कर पाता है जब वह तकनीक पुरानी पड़ जाती है। भारतीय प्रशासनिक ढांचे में मंत्रिमण्डल की सत्ता के नाम पर नौकरशाह सेनाओं से सबंधित पत्रावलियों पर ढेरों प्रश्र खड़े करते हैं और उन प्रश्रों के उचित उत्तर मिलने के बावजूद आर्थिक संकट अथवा कमीशनखोरी का डर दिखाकर सरकारी नेताओं को डरा देते हैं। बोफोर्स के जरिए भारत के एक प्रधानमंत्री का चरित्र हनन देख चुकी राजनीतिक व्यवस्था नौकरशाहों के डराने पर वाकई भयभीत हो जाती है और परिणाम सेनाओं को भुगतना पड़ता है। भारत की वायुसेना इन दिनों ऐसी ही स्थितियों से दो-चार है। जब उसे बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमानों के साथ ही आधुनिक हथियारों की जरूरत है तब उसके दस साल पहले भेजे गए प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में धूल चाट रहे हैं। अगर कोई प्रस्ताव मंजूर भी हुआ तो अगले दस साल में जाकर उसकी मांग पूरी हो पाएगी। यह कहा जा सकता है कि भारतीय नौकरशाहों के खिलाफ यह आक्रोश उचित नहीं है क्योंकि वे वही करते हैं जो सरकार कहती है। लेकिन प्रशासनिक कामकाज से वाकिफ लोग जानते हैं कि अधिकारी फाइलों पर टिप्पणी ही इस ढंग से दर्ज करते हैं कि नेता उसे आगे बढ़ाने से कतरा जाते हैं।  &lt;br /&gt;आठ अक्टूबर 1932 में स्थापना के बाद से वायुसेना ने लगभग हर जंग में भाग लिया और आखिरी बड़ा अभियान दस साल पहले कारगिल जंग के समय 1999 में चलाया। चीन और पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती के कारण वायुसेना के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है और उसे इतना ताकतवर होना ही चाहिए कि वह दोनों देशों की सेनाओं से एकसाथ निपट सके। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लालफीतों से मुक्त करानी होगी खरीद प्रक्रिया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वक्त आ गया है कि हमारे राजनीतिक दल और नौकरशाही वायुसेना की जरूरतों को समझें। बड़ी समस्या निर्णय प्रक्रिया की है। रक्षा सौदों के फैसलों में देरी ठीक नहीं है।&lt;br /&gt;यद्यपि पिछले दिनों वायुसेना को कुछ नए विमान जरूर मिले लेकिन अब भी  जरूरी साजो सामान की खरीद प्रक्रिया लालफीताशाही की गिरफ्त में हैं।&lt;br /&gt;वायुसेना रूस से 230 सुखोई खरीद का समझौता कर चुकी है। अब तक 100 से ज्यादा सुखोई मिल चुके हैं। इजराइल से  चालक रहित लड़ाकू विमान हैरोप (ड्रोन) 2011 तक खरीदने की योजना है।&lt;br /&gt;वैसे वायुसेना को मजबूत करने के लिए तेजी से निर्णय करने होंगे। रक्षा मंत्रालय सीधे वायुसेना अफसरों से बात करके भी समस्या का समाधान कर सकता है क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी वायुसेना की जरूरतों को समझ नहीं पाते।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बची है दो तिहाई लड़ाकू क्षमता&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वैसे वायुसेना की मिग-29 को उन्नत कर उनकी उम्र में इजाफा करने और वर्ष 1980 के बाद खरीदे गये युद्धक विमानों को भी आधुनिक बनाने की योजना है। यहां यह ध्यान रखना होगा कि वायुसेना के प्रमुख खुलकर यह कह चुके हैं कि वायुसेना की क्षमता चीन के मुकाबले एक तिहाई है। वायुसेना की स्वीकृत स्क्वाड्रन क्षमता 45 स्क्वाड्रन की है लेकिन अभी वह तीस स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है। इसमें कोई दोराय नहीं कि चीन के मुकाबले भारत अब भी कमजोर हैं। देश को यह समझना ही  होगा कि भारतीय उपमहाद्वीप में अगला युद्ध वायुसेना के बूते पर ही जीता जाएगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-6951862354939113957?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/6951862354939113957/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_316.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6951862354939113957'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/6951862354939113957'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_316.html' title='&lt;strong&gt;नकारात्मक रवैये का शिकार है वायुसेना&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-8370263969323871061</id><published>2009-10-12T11:30:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T11:31:49.322-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पृथ्वी'/><title type='text'>हो सकेंगी चीनी रक्षा पंक्ति ध्वस्त</title><content type='html'>&lt;strong&gt;पाकिस्तान के खिलाफ भी सेना को मिलेगी मजबूती&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी 2 के सफल परीक्षण  &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;परमाणु हमले करने में सक्षम पृथ्वी 2 मिसाइल के एक के बाद एक लगातार दो परीक्षण भारतीय सेनाओं को पाकिस्तान के खिलाफ मजबूती प्रदान करेंगे। इसके साथ ही अरुणाचल और लद्दाख में तैनात किए जाने पर ये प्रक्षेपास्त्र तिब्बत में चीनी सेना की रक्षा पंक्ति को भी ध्वस्त करने में काम आ सकेंगे।  &lt;br /&gt;हालांकि पाकिस्तान ने चीन की सहायता से दो हजार किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलें बना ली हैं लेकिन भारत के स्वदेशी पृथ्वी ने परीक्षणों के वक्त अचूक मार कर साबित कर दिया कि अब पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान को मसलने में भारतीय फौजों का ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। परम्परागत हथियारों के साथ भी पृथ्वी अचूक वार कर सकता है।&lt;br /&gt;उड़ीसा की चांदीपुर परीक्षण रेंज से सतह-सतह पर मार करने वाले पृथ्वी के दो प्रक्षेपास्त्र नियमित परीक्षण के तौर पर चलायमान प्रक्षेपकों से दागे गए। मात्र पांच मिनट के अंतराल में सोमवार सुबह दस बजे बाद दागे गए दोनों प्रक्षेपास्त्र निशाने के पचास मीटर के दायरे में गिरे।&lt;br /&gt;पृथ्वी 2 प्रक्षेपास्त्र पहले ही सेना में शामिल किया जा चुका है। सेना की रणनीतिक बल कमान के विशेष समूह की सैन्य यूनिटें इनका रखरखाव करती हैं। दो इंजन वाला पृथ्वी २ प्रक्षेपास्त्र नौ मीटर लम्बा और एक मीटर चौड़ा है। नौवहन प्रणालियों युक्तयह प्रक्षेपास्त्र शत्रु की मिसाइलों को चकमा दे सकता है।&lt;br /&gt;तरल और ठोस ईंधन से संचालित हो सकने वाली यह मिसाइल परंपरागत और परमाणु पेलोड ले जाने में सक्षम है। &lt;br /&gt;पृथ्वी के ताजा परीक्षण के बाद सम्भवत: सेना इन्हें पूर्वी सीमा पर तैनात करने का निर्णय जल्द ले लेगी क्योंकि पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान के मुकाबले चीनी रक्षा पंक्तियां अधिक मजबूत हैं और चीन ने सिक्यांग से तिब्बत तक रेल लाइन बिछाकर अपनी सेनाओं की हमले की गति को बढ़ा लिया है। जबकि भारतीय क्षेत्र में अभी सेना तैनाती के लिए वायुसेना पर निर्भर करती है। ऐसी स्थिति में सचल लांचरों से पृथ्वी 2 का हमला चीनी सेनाओं को भारतीय इलाके में घुसने से रोकने वाली दीवार साबित होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-8370263969323871061?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/8370263969323871061/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8370263969323871061'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8370263969323871061'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html' title='&lt;strong&gt;हो सकेंगी चीनी रक्षा पंक्ति ध्वस्त&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-8135660550069129452</id><published>2009-10-11T22:29:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T22:31:17.154-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>मार खाए बिना नहीं सुधरेगा पाकिस्तान</title><content type='html'>&lt;strong&gt;भारतीय हुक्मरानों को मिखाइल गोर्बाच्योव बनाना चाहते हैं क्लिंटन?&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत को वैश्विक शक्ति बनने के लिए चीन की छाया से निकलने के साथ ही पाकिस्तान से संबंध सुधारने की सलाह देने वाले दुनिया के स्वयंभू कोतवाल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन सम्भवत: यह भूल गए कि पाकिस्तान ऐसा ढीठ और हठी बच्चा है कि जब तक उसे मार नहीं पड़ेगी तब तक पड़ोसी धर्म उसकी समझ में आ ही नहीं सकता। &lt;br /&gt;वैसे अमेरिका का राष्ट्रपति रह चुकने के बाद क्लिंटन अच्छी तरह जानते होंगे कि भारत ने वाकई पिछले 62 वर्षों से पाकिस्तान से संबंध सुधारने की हर सम्भव कोशिश की लेकिन उनके देश के सैनिक और आर्थिक समर्थन के कारण पाकिस्तान हर समय भारत को बर्बाद करने के सपने देखता रहता है। जहां तक चीन से आगे निकलने का प्रश्र है तो भारत इतना पिछड़ा हुआ भी नहीं है कि चीन उसे गोलगप्पा समझकर निगल जाए। &lt;br /&gt;पाकिस्तान से संबंध सुधारने की सलाह देने वाले क्लिंटन शायद यह भूल गए धार्मिक आधार पर भारत से अलग हुए उस देश से संबंध सिर्फ लाठी के बल पर ही सुधर सकते हैं क्योंकि जब भी संबंध सुधारने की बात की जाती है तो वह सबसे पहले कश्मीर को सामने अड़ा देता है। इस पिद्दी से देश को कश्मीर थाली में परोसकर देना ही अगर संबंध सुधारना है तो भारत ऐसा कभी नहीं कर पाएगा क्योंकि अगर विचार के तौर पर मान भी लें कि ऐसा कर दिया जाए तो पाकिस्तान इसे अपने जिहादी आंदोलन की जीत मान बैठेगा और फिर भारत के अन्य प्रदेशों पर अपना हक जमाने लगेगा। क्योंकि चरमरा रही व्यवस्था वाला यह इस्लामिक देश अन्य धर्मों को इस्लाम से इतर मानता है। विशेषकर भारत को तो वह धोती पहनने वालों का पिलपिला देश माने बैठा है और यह कल्पना करता रहता है कि एक दिन वह इतना ताकतवर हो जाएगा कि धर्मनिरपेक्ष (हिन्दू बाहुल्य) भारत का नामोनिशान मिटा देगा।&lt;br /&gt;क्लिंटन यह सब जानते हैं। इसके बावजूद सम्भवत: उन्हें सलाह देने की बीमारी है। इसलिए वे भारत के हुक्मरानों को मिखाइल गोर्बाच्योव बनने की सलाह दे रहे हैं। मिखाइल गोर्बाच्योव ही वह शख्स है जिसने ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोइका (खुलापन और सुधार) नामक रूसी शब्दों का इस्तेमाल कर महाशक्ति सोवियत संघ को बिखरने के लिए मजबूर कर दिया। दुनिया को अस्सी के दशक में एक ध्रुवीय बना दिया था। उसी के बाद अमेरिका दुनिया का एकमात्र पुलिसमैन बन बैठा। यह सही है कि तत्कालीन सोवियत संघ आर्थिक रूप से खोखला हो चुका था और उसकी अर्थव्यवस्था को आक्सीजन की जरूरत थी लेकिन देश तोड़कर अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं किया जा ता। गोर्बाच्योव शायद यह भूल गए थे। &lt;br /&gt;क्लिंटन ने यह सलाह हाल ही में अमेरिका के शिकागो में हुई पैन-आईआईटी कांफ्रेंस में इस सवाल के जवाब में दी थी कि भारत को सुपरपावर बनने और यूएन तथा जी बीस जैसे संगठनों में प्रभाव बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-8135660550069129452?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/8135660550069129452/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_869.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8135660550069129452'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/8135660550069129452'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_869.html' title='&lt;strong&gt;मार खाए बिना नहीं सुधरेगा पाकिस्तान&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1561988795085743615</id><published>2009-10-11T21:57:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T22:38:01.508-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मिसाइल'/><title type='text'>अग्नि तीन का परीक्षण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 211px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLAGPFkmSI/AAAAAAAAAMI/UB0DQn4bdNw/s320/agni-III-missile.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391582917277554978" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चीन के भीतरी क्षेत्रों तक मार करने में सक्षम होगी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अग्नि तीन प्रक्षेपास्त्र के चौथे चरण का परीक्षण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक किया जा सकता है। तीन हजार किलोमीटर तक मार करने वाली इस स्वदेशी मिसाइल के इस चरण की सफलता के साथ ही भारत को चीन के भीतरी क्षेत्रों तक मार करने की क्षमता हासिल हो जाएगी। इस मिसाइल का पहला परीक्षण दो साल पहले किया गया था लेकिन वह विफल हो गया था। इसके बाद के दो परीक्षण पूरी तरह सफल रहे थे। तीसरा परीक्षण पिछले वर्ष सात मई को हुआ था।&lt;br /&gt;परमाणु हथियार ढोने में सक्षम इस मिसाइल का चौथ परीक्षण सफल रहा तो अगले साल इसके दो परीक्षण और किए जाएंगे और इसके साथ ही मिसाइल भारतीय सुरक्षा बलों को सौंप दी जाएगी। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक मिसाइल के परीक्षण को सफल बनाने के लिए दिनरात जुटे हुए हैं। यह मिसाइल करीब तीन सौ किलो के परमाणु अस्त्र दागने में सक्षम है।&lt;br /&gt;भारत इससे पहले अग्नि दो मिसाइल को कई चरणों के सफल परीक्षणों के बाद तैनाती के लिए सुरक्षा बलों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। सतह से सतह पर दो हजार किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली इस मिसाइल को रेल, सड़क पर चल सकने वाले मोबाइल लांचर्स से दागा जा सकता है। अग्नि द्वितीय की लंबाई बीस मीटर है। सोलह टन भार वाली यह मिसाइल करीब एक हजार किलोग्राम भार वहन कर सकती है और वजन घटाकर इसकी दूरी बढ़ाई जा सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1561988795085743615?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1561988795085743615/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_4322.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1561988795085743615'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1561988795085743615'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_4322.html' title='&lt;strong&gt;अग्नि तीन का परीक्षण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLAGPFkmSI/AAAAAAAAAMI/UB0DQn4bdNw/s72-c/agni-III-missile.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5716580922394965001</id><published>2009-10-11T04:55:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T21:43:43.901-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जिन्ना'/><title type='text'>कौमार्य लूट के साथ दफन हुआ जिन्ना का सपना </title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StKz0WlR5fI/AAAAAAAAALw/KJpLJd81xSQ/s1600-h/srinagar-map.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 227px; height: 201px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StKz0WlR5fI/AAAAAAAAALw/KJpLJd81xSQ/s320/srinagar-map.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391569415912416754" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ननों के अछूते शरीरों पर बलात्कार के लालच में फंस गए थे कबाइली&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर पर कब्जे की कोशिश की कहानी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कश्मीर की सुन्दर वादियों को पाकिस्तान में मिलाने का जिन्ना का सपना उन चौदह ननों के लूटे गए कौमार्य के साथ दफन हो गया जिन पर कबाइली हमलावर जानवरों की तरह टूट पड़े थे और पूरे दिन उन पर बारी-बारी से बलात्कार करते रहे।&lt;br /&gt;सोमवार 27 अक्टूबर 1947 को कश्मीर पर कब्जा जमाने आए कबाइली श्रीनगर से तीस मील पहले बारामूला के  गिरजाघर में रह रहीं चौदह फ्रैंच, स्कॉटिश, स्पेनिश, इटालियन और पुर्तगीज ननों के अछूते शरीरों पर बलात्कार के लालच में नहीं फंसते तो श्रीनगर हवाई अड्डे तक वे आसानी से पहुंच सकते थे। यह सही है कि मेजर सोमनाथ शर्मा के कुशल नेतृत्व में की गई कार्रवाईयों ने भी पठानों का रास्ता रोका लेकिन उन ननों के बलिदान की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण थी।&lt;br /&gt;लूट-खसोट और उन्मादी बलात्कारियों के रूप में प्रसिद्ध कबाइलियों ने एक-एक नन के साथ अनगिनत बार बलात्कार किए। उन्हें नोंचा-खसोटा और पूरे गिरजाघर को धूल धूसरित कर दिया। गिरजाघर के नन्हें से अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों को हमलावरों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया। गिरजाघर की एक-एक कीमती चीज लूट ली। यहां तक कि उसके दरवाजों पर लगी पीतल की मूठों तक को नहीं छोड़ा। हमलावरों के दल गिरजाघर से बारामूला शहर की ओर बढ़ गए और वहां भी उन्होंने उन्माद का नंगा नाच किया।&lt;br /&gt;बारामूला के हिंसक उत्सवों में ज्यों-ज्यों वक्त बीतता गया त्यों-त्यों कश्मीर जिन्ना की पकड़ से दूर होता गया और 28 अक्टूबर आते-आते उसका सपना भी चकनाचूर हो गया क्योंकि सोमवार 27 अक्टूबर की सुबह ही भारत का पहला सिख रेजिमेंट अपने 329 सैनिकों को आठ टन युद्ध सामग्री के साथ श्रीनगर हवाईअड्डे पर उतार चुका था।&lt;br /&gt;हमलावर कबाइली जब बारामूला में लूटपाट और बलात्कार कर रहे थे तब वे सैनिक श्रीनगर हवाईअड्डे पर पोजीशन लेने में व्यस्त थे। इधर 27 अक्टूबर की शाम बारामूला गिरजाघर की बेल्जियन मदर सुपीरियर, सिस्टर मेरी एडेल्ट्रूड कबाइलियों के अत्याचारों को सह नहीं पाने के कारण दम तोड़ रहीं थी उधर भारत के सैनिकों ने कबाइलियों की कमर तोडऩे की तैयारी कर ली थी।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सिरिल रैडक्लिफ की कलम ने बचाया कश्मीर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारत-पाकिस्तान की सीमाओं का निर्धारण करने वाले ब्रिटिश न्यायविद् सर सिरिल रैडक्लिफ ने दोनों देशों के बीच सीमा रेखा खींचते समय भरसक कोशिश की कि मुस्लिम बहुसंख्यक गांवों को पाकिस्तान में मिला दिया जाए लेकिन पंजाब के गुरुदासपुर को भारत में रखते वक्त उसने रावी नदी की नैसर्गिक विभाजन रेखा को आधार माना। अगर ऐसा नहीं होता तो भारतीय क्षेत्र में पाकिस्तानी क्षेत्र का एक भालानुमा हिस्सा आ घुसता जिसे रैडक्लिफ ने उचित नहीं माना और गुरुदासपुर भारत के हिस्से में आ गया। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कश्मीर की कुंजी है गुरुदासपुर&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;बिना किसी बदनीयती के खींची गई सीमा रेखा के जरिए भारतीय क्षेत्र में आया गुरुदासपुर ही वह कुंजी है जिसकी वजह से भारत आज तक कश्मीर को पाकिस्तानी जबड़ों में जाने से बचाने में कामयाब रहा है। 28 अक्टूबर 1947 को उसी गुरुदासपुर से होकर गुजरने वाली पतली सी सड़क से भारतीय सेनाएं तोपखाने के साथ कश्मीर के लिए चल पड़ीं थी। कबाइलियों को उसी सड़क से आ रहीं सेनाओं ने श्रीनगर के बाहर घेर लिया। जिन रास्तों से वे आए उन्हीं रास्तों पर उल्टे पैर लौटने के लिए बाध्य कबाइलियों को देखकर जिन्ना क्रोध से पगला गए और उन्होंने पाकिस्तानी सेना को कबाइलियों के वेश में घाटी पर कब्जा करने के लिए आगे बढऩे की आज्ञा दे दी लेकिन सिरिल रैडक्लिफ की खींची गई सीमा रेखा कश्मीर घाटी को पाक सेना और कबाइलियों के कब्रिस्तान में तब्दील करने की इबारत पहले ही लिख चुकी थी। अलबत्ता 1948 में जब युद्ध विराम हुआ तो गिलगित के आसपास का उत्तरी कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे में रह गया जो कश्मीर समस्या के रूप में आज तक कभी न भरने वाले घाव की तरह रिस रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5716580922394965001?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5716580922394965001/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_6999.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5716580922394965001'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5716580922394965001'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_6999.html' title='&lt;strong&gt;कौमार्य लूट के साथ दफन हुआ जिन्ना का सपना &lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StKz0WlR5fI/AAAAAAAAALw/KJpLJd81xSQ/s72-c/srinagar-map.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2167749709007956371</id><published>2009-10-11T03:31:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T21:52:01.396-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तालिबान'/><title type='text'>नहीं टूटी तालिबान की कमर</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 226px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StK1wW6I5uI/AAAAAAAAAL4/Yj4acGgyjxs/s320/Taliban+attack+on+Pak.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391571546303686370" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सबूत है पाक सेना मुख्यालय पर हमले का दुस्साहस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तानी सेना मुख्यालय पर आतंककारी हमले में छुपे संदेश ने निश्चित तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना की आंखें खोल दी होंगी। अगर अब भी वे हमले के जरिए मिले संकेतों को समझने से इंकार करेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान पर तालिबान की पकड़ मजबूत होती चली जाएगी?&lt;br /&gt;दुनिया की ताकतवर सेनाओं में से एक पाकिस्तानी थलसेना के मुख्यालय में घुसकर सेना के तीस से अधिक अधिकारियों को बंधक बना लेने का दुस्साहस अब तक दुनिया भर में हुए आतंककारी हमलों के इतिहास में अकेला उदाहरण है। इसे शेर की मांद में घुसकर चुनौती देने की उपमा भी दी जा सकती है। इससे पहले आत्मघाती हमले तो सेना पर खूब हुए हैं लेकिन सरेआम गोलियां चलाते हुए सेना मुख्यालय में घुसने की कोशिश करने का कारनामा आतंककारी आज तक नहीं कर पाए। यहां तक कि दिसंबर 2003 में पूर्व राष्ट्रपति और उस वक्त के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पर भी आत्मघाती हमला ही किया गया जिसमें वे तो बच गए लेकिन 13 लोग मारे गए थे। इसके बाद कराची में जून 2004 में एक वरिष्ठ सैनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अहसान सलीम पर भी आत्मघाती हमला किया गया था जिसमें भी 11 लोग मारे गए थे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;खुली दक्षिणी वजीरिस्तान अभियान की सच्चाई की पोल &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रावलपिंडी स्थित मॉल रोड़ पर खुलने वाले सेना मुख्यालय के गेट पर हमला करने वाले आतंककारियों ने सैनिकों की वर्दी पहन रखी थी। इस हमले से सरकार और सेना के उस दावे की पोल भी खुल गई है जिसमें बारम्बार यह कहा जा रहा था कि उसने सैन्य अभियान चलाकर स्वात घाटी समेत वजीरिस्तान में सक्रिय तालिबान तथा आतंककारियों की कमर तोड़ दी है।  &lt;br /&gt;पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यालय पर हमले के बाद 9 अक्टूबर को पेशावर में आत्मघाती हमला किया गया। इस्लामाबाद, पेशावर और अब सेना मुख्यालय पर हुए हमले से यह साफ हो गया कि तालिबान और आतंककारियों की कमर टूटी नहीं है बल्कि वे लगातार मजबूत और ताकतवर होते जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;वजीरिस्तान में है आतंकवाद की जड़&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लंबे समय से माना जाता रहा  है कि दक्षिण वजीरिस्तान स्थित पहाड़ी इलाकों में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ है। दक्षिण वजीरिस्तान के अभियान का मकसद तहरीक-ए-तालिबान के नेटवर्क को उखाड़ फेंकना है। अमेरिका का मानना है कि इन इलाकों के आतंकी गुट अफगानिस्तान में मौजूद गठबंधन सेना के खिलाफ आतंकियों को मदद देते हैं। &lt;br /&gt;सेना मुख्यालय पर हुए तालिबान के ताजा हमले को वजीरिस्तान में सैन्य अभियान की प्रतिक्रिया माना जा रहा है। तालिबान अभियान शुरू होने के साथ ही गम्भीर नतीजों की चेतावनी पूर्व में ही जारी कर चुका था। वैसे दुनिया जानती है कि आतंकवाद की जड़ पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान में है जिसे उखाड़ फैंकने के लिए बड़े अभियान की जरूरत है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2167749709007956371?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2167749709007956371/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1232.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2167749709007956371'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2167749709007956371'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1232.html' title='&lt;strong&gt;नहीं टूटी तालिबान की कमर&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StK1wW6I5uI/AAAAAAAAAL4/Yj4acGgyjxs/s72-c/Taliban+attack+on+Pak.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-158751160941722286</id><published>2009-10-11T00:38:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T22:17:54.007-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वायूसेना'/><title type='text'>अनूठी है विमानों से होड़ करने वाले पक्षियों की लाइब्रेरी</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StK71GXjNpI/AAAAAAAAAMA/p8Uw8cVTJ6k/s320/Big-Birds-Flying-in-the-Sky.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391578224832755346" /&gt;&lt;br /&gt;बीस हजार फुट से ऊंची उड़ान भरकर लड़ाकू विमानों से प्रतिस्पर्धा करने वाले पक्षियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना ने एक ऐसी अनूठी लाइब्रेरी बनाई है जिसमें बीस हजार फुट से ऊपर परवाज करने वाले परिंदों की मानसिकता का पूरा खाका दर्ज है। दुनिया में अपनी तरह की इस पहली लाइब्रेरी में 130 प्रजातियों के पक्षियों के उड़ान पथ, उड़ते वक्त उनकी मानसिकता, विमानों को देखकर होने वाली प्रतिक्रिया जैसी सूक्षम जानकारियां दर्ज हैं। पक्षियों से संबंधित जानकारियां उनके डीएनए की जांच से जुटाई गई हैं।&lt;br /&gt;पिछले कुछ समय से अपने लड़ाकू विमानों की लगातार दुर्घटनाओं से परेशान वायुसेना को अपने अडड़ों के आसपास पाए जाने वाले आम पक्षियों की गतिविधियों, उनकी उड़ान के तौर तरीकों और उनकी झुंड बनाने की प्रवृत्तियों का अंदाजा था लेकिन उम्मीद से ज्यादा ऊंचाई पर उडऩे वाले पक्षियों ने उसकी नाक में दम कर रखा था। &lt;br /&gt;वायु सेना के उडान सुरक्षा एवं निरीक्षण महानिदेशालय के मुताबिक उन पक्षियों के नमूने पुणे स्थित नेशनल सैल सेंटर में जांचे गए जो सुदूर आसमान में विमानों के गैर नुकसानदाय हिस्सों से टकराकर मर गए थे। डीएनए जांच के बाद महानिदेशालय ने 130 पक्षियों की लाइब्रेरी बनाकर उसमें पक्षियों की एक स्थान से दूसरे स्थानों के लिए पलायन, उनकी आदतों, उडान भरने के रास्तों, उनकी उडान के सीजन और उडान की ऊंचाइयों का पूरा खाका तैयार किया गया है। असल में पक्षी विमान दुर्घटना का बहुत बडा सबब होते हैं। लेकिन दुर्घटना की गंभीरता इस बात से तय होती है कि पक्षी विमान से किस जगह टकराया है। कोई बडा पक्षी विमान के सुरक्षित हिस्से से टकराए तो उससे कोई नुकसान नहीं होता लेकिन अगर छोटा सा पक्षी विमान के बेहद नाजुक हिस्से से टकरा जाए तो बड़ा हादसा हो जाता है। पंद्रह- बीस हजार फुट की ऊंचाई पर यह उम्मीद नहीं की जाती कि कोई पक्षी वहां उडान भर रहा होगा। लेकिन कुछ हादसों में बीस हजार फुट से ऊपर उड़ान भर रहे विमान से पक्षी टकराने की घटनाओं ने वायुसेना को हैरान कर दिया। इसके बाद ही  डीएनए लाइब्रेरी तैयार करने का निर्णय लिया गया। बडे विमानों के लिए पक्षी अधिक खतरा साबित नहीं होते लेकिन लडाकू विमानों की गति और उनके इंजनों की बाहरी चीजों को खींचने की ताकत को देखते हुए पक्षी बेहद खतरनाक होते हैं। मिग 27 और मिराज जैसे एक इंजन वाले विमानों चपेट में अगर कोई पक्षी आ जाए तो वह उसके इंजन में जा फंसता है और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-158751160941722286?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/158751160941722286/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_8780.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/158751160941722286'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/158751160941722286'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_8780.html' title='&lt;strong&gt;अनूठी है विमानों से होड़ करने वाले पक्षियों की लाइब्रेरी&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StK71GXjNpI/AAAAAAAAAMA/p8Uw8cVTJ6k/s72-c/Big-Birds-Flying-in-the-Sky.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-4840316991953159465</id><published>2009-10-11T00:09:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T23:00:41.579-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नक्सली'/><title type='text'>काट फैंकना ही होगा नासूर बना नक्सलवाद</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 239px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLFiYXKlYI/AAAAAAAAAMQ/gETfTfIwGr0/s320/Naxal.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391588898361742722" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;माओवादियों की सहायता से लाल गलियारा बनाने की साजिश&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के छोटे से गांव नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ नक्सलवादी आंदोलन ऐसा नासूर बन गया है जिसे काटकर निकाल फैंकने के अलावा भारत के पास दूसरा कोई चारा नहीं है। नक्सलवादी अब नेपाल के माओवादियों की सहायता से भारत में ऐसा लाल गलियारा बनाने की फिराक में है जो नेपाल के पशुपतिनाथ से तिरुपति तक फैला हो। केन्द्र सरकार ने नक्सलवादियों की बढ़ती ताकत और मंसूबों को भांपकर ही चार राज्यों में एकीकृत रणनीति के तहत कार्रवाई का फैसला किया है। इस रणनीति में केन्द्रीय सुरक्षा बल राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर नक्सलवादियों का सफाया करेंगे। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पुलिस पर लगातार गुरिल्ला हमले&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नक्सलवादियों का मानना है कि प्रजातंत्र पूरी तरह विफल है और गरीबों को उनके हक दिलाने के लिए क्रांति के अलावा कोई चारा नहीं है। रूसी क्रांति से प्रेरित नक्सलवादी वर्ग संघर्ष के लिए भी प्रजातंत्र को दोषी मानते हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सलवादियों ने कर्नाटक, आंध्र, पश्चिम बंगाल में भी अपने ठिकाने बना लिए हैं और वहां की जनता को सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए भड़का रहे हैं। नक्सलवादियों का आरोप है कि भारत में भूमि सुधार की रफ्तार बहुत सुस्त है। चीन में 45 प्रतिशत जमीनें छोटे किसानों में बाँटी गई हैं तो जापान में 33 प्रतिशत, लेकिन भारत में आजादी के बाद से तो केवल 2 प्रतिशत ही जमीन का आवंटन हुआ है। इसी तर्क के सहारे नक्सलवादियों ने अब  उड़ीसा, महाराष्ट्र, झारखंड और कर्नाटक में भी अपना असर बढ़ा लिया है। जन सरकार का नारा देकर नक्सलियों ने समानांतर सरकार और न्याय व्यवस्था कायम करने की कोशिश में पुलिस और सुरक्षा बलों पर लगातार गुरिल्ला हमले किए हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दक्षिण एशियाई देशों की सेनाओं जैसी रणनीति&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;दक्षिण-पूर्व एशिया की सेनाओं जैसी रणनीति बनाकर हमले करने वाले नक्सलियों के हथियार, गोलाबारूद इस बात का सबूत हैं कि नक्सलियों को विदेशी ताकत का पुरजोर समर्थन मिल रहा है। कुछ वर्षों पहले 11 मार्क्सवादी-लेनिनवादी संगठनों ने मिलकर कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ माओइस्ट पार्टीज ऑफ साउथ एशिया बनाकर नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका के सशस्त्र क्रांतिकारी संगठनों से गठबंधन कर लिया है। इसे नक्सलियों की  नेपाल से लेकर आंध्रप्रदेश के समुद्र तट तक माओवादी बेस एरिया बनाने की भविष्य की रणनीति माना जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चिंता का विषय है माओवादियों से गठबंधन &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नेपाल के माओवादियों से नक्सलियों का गठबंधन सर्वाधिक चिंता का विषय है क्योंकि माओवादियों को चीनी मदद किसी से छुपी नहीं है। अभी तक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जूझ रहे भारत के नक्सलियों को यदि नेपाली माओवादियों के जरिए चीनी मदद मिलने लगी तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। वैसे बिगड़ते हालात का अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि हाल ही भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भी वायुसेना अड्डों की सुरक्षा के लिए नक्सलियों पर फायरिंग के आदेश केन्द्र सरकार से मांगे थे। वायुसेना ने अपने सशस्त्र हैलीकॉप्टरों को नक्सलियों पर नजर रखने के लिए तैनात भी कर दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी नक्सलियों की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जता चुके हैं। मंत्रिमण्डल की सुरक्षा मामलों की समिति ने भी इसी के अनुरूप नक्सलियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई को हरी झण्डी दिखा दी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आ गया बेरहमी से कुचलने का वक्त&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वक्त आ गया है कि लाल गलियारा बनाकर भारत के दक्षिण और पूर्वी राज्यों में हिंसा की लपटें तेज हों उससे पहले ही भारत सरकार को मानवाधिकार कानूनों की चिंता किए बगैर नक्सलियों को बेरहमी से उसी तरह कुचल देना चाहिए जैसे अमेरिका जेहादियों को मौत के घाट उतारने के लिए दुनिया में कहीं भी कार्रवाई करने को तत्पर रहता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-4840316991953159465?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/4840316991953159465/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4840316991953159465'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/4840316991953159465'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_11.html' title='&lt;strong&gt;काट फैंकना ही होगा नासूर बना नक्सलवाद&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLFiYXKlYI/AAAAAAAAAMQ/gETfTfIwGr0/s72-c/Naxal.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-258711080339784351</id><published>2009-10-10T23:34:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T23:15:55.543-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परमाणु'/><title type='text'>नंगी हुई अमेरिकी रणनीति</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 156px; height: 235px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLJBgRCkiI/AAAAAAAAAMY/BVADvJR1BUA/s320/Clinton+tapes.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391592731594363426" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अमेरिकी लेखक टेलर ब्रांच की किताब&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका दक्षिण एशिया में अपने मुख्य मोहरे पाकिस्तान की भारत समेत कभी शीतयुद्ध के प्रतिद्वंद्वी रूस के खिलाफ इस्तेमाल की उपादेयता को खत्म नहीं होने देने के लिए सरकारी स्तर के साथ ही सेवानिवृत अधिकारियों की किताबों के माध्यम से ऐसे तथ्यों को उजागर करता रहता है जिससे इस क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहे। &lt;br /&gt;इसी रणनीति के तहत अब पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और इतिहासकार टेलर ब्रांच की किताब में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के उल्लेख में ऐसे तथ्यों का समावेश किया गया है जिनके उजागर होने से क्षेत्र में परोक्ष अस्थिरता फिर जड़ जमा लेगी। टेलर ने लिखा है कि कारगिल युद्ध में पराजय के डर की वजह से पाकिस्तान ने परमाणु हमले की तैयारी कर ली थी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध रोकने के लिए विमान में बैठने के लिए तत्पर हो गए थे। &lt;br /&gt;टेलर ने करीब सात सौ पृष्ठों की पुस्तक द क्लिंटन टेप्स, रेसलिंग हिस्ट्री विद द प्रेजीडेंट में लिखा है कि क्लिंटन ने उन्हें यह कहकर चकित कर दिया था कि कश्मीर के हालात जैसे दिखते हैं, उससे कहीं ज्यादा गम्भीर हैं। क्लिंटन ने लेखक से यह कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान उन्हें रात में युद्ध खत्म करने बुलाएंगे तो उनके पास विमान में बैठने के अलावा कोई चारा नहीं है। किताब में कहा गया है कि अमेरिका के मध्यस्थता में विफल रहने पर पाकिस्तानने भारत पर परमाणु हमले की तैयारी कर ली थी। भारत भी ऐसा होने पर पाकिस्तानी ठिकानों पर परमाणु बम गिराने को तैयार था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सफेद झूठ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कारगिल युद्ध के दौरान भारत के थलसेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने सेवानिवृत्ति के बाद लिखी किताब (कारगिल) में बेहद ईमानदारी के साथ स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ने युद्ध के दौरान रणनीतिक हथियार (परमाणु बम) के उपयोग की परोक्ष धमकी अवश्य दी थी लेकिन उसके पास परमाणु हमलों के लिए आवश्यक ढांचा ही नहीं था। वह सिर्फ कोरी धमकी थी और पाकिस्तानी हुक्मरानों का मानना था कि इससे भारत डर जाएगा और कारगिल में युद्धरत अपनी फौजों को वापस बुला लेगा। मलिक ने लिखा है कि परमाणु हमले के लिए आवश्यक कमान और कंट्रोल का ढांचा उस वक्त भारत के पास भी नहीं था। इसका निर्माण युद्ध के बाद किया गया। मलिक की किताब में उल्लेखित तथ्यों से साफ है कि अमेरिकी लेखक ने अतिश्योक्तिपूर्ण तरीके से अमेरिका के छुपे हुए हितों (दक्षिण एशिया में अस्थिरता) की रक्षा के लिए पाकिस्तान के परमाणु हमले की आशंका जैसे सफेद झूठ को अपनी किताब में स्थान दिया है। मलिक ने खुलासा किया है कि कारगिल में अपनी फौजों के सामूहिक कत्ल जैसी स्थिति आने पर पाकिस्तान के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने ही प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को क्लिंटन से गुहार लगाने वाशिंगटन जाने की सलाह दी थी। क्लिंटन ने मध्यस्थता के लिए तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी को वाशिंगटन आने के लिए मनाने की एक से अधिक बार कोशिश की लेकिन वाजपेयी ने साफ इंकार कर दिया। असल में अमेरिका उस वक्त पिट रही पाकिस्तानी फौजों की इज्जत बचाने के लिए दोनों देशों के बीच परमाणु संघर्ष टालने की आड़ में कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तान का कब्जा बरकरार रखवाने की फिराक में था लेकिन तत्कालीन भारतीय नेतृत्व ने उसकी मंशा पर पानी फेर दिया था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;औरों को घुड़की, पाकिस्तान को मदद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;टेलर ने अपनी किताब में भारत पर परमाणु हमले की आशंका बताकर अमेरिकी रणनीति को नंगा कर दिया है। अमेरिका की रणनीति रही है कि दक्षिण एशिया में बेहतर भू-सामरिक स्थिति के साथ ही मध्य एशिया के द्वार अफगानिस्तान से सटे होने के कारण पाकिस्तान को रणनीतिक दृष्टि से इतना सक्षम रखा जाए कि इस क्षेत्र में भारत और सोवियत संघ का उत्तराधिकारी रूस सैनिक धुरी नहीं बना पाएं। इसी वजह से दुनिया भर में परमाणु हथियार बनाने वाले देशों पर हमले और उन्हें घुड़कियां देने वाले अमेरिका ने पाकिस्तान को न सिर्फ परमाणु हथियार बनाने दिए बल्कि परमाणु तकनीक प्रसार में उसकी खुली मिलीभगत पर भी आंख बंद किए बैठा है। इसके अलावा उसे खरबों डालर की आर्थिक और सैनिक मदद भी लगातार दी जा रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-258711080339784351?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/258711080339784351/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_10.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/258711080339784351'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/258711080339784351'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_10.html' title='&lt;strong&gt;नंगी हुई अमेरिकी रणनीति&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLJBgRCkiI/AAAAAAAAAMY/BVADvJR1BUA/s72-c/Clinton+tapes.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-2458280448901609394</id><published>2009-10-09T11:48:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T00:05:04.993-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अफगानिस्तान'/><title type='text'>हमले करवा कर भारत को भगाना चाहता है पाकिस्तान</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 207px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLRnam6mfI/AAAAAAAAAMg/vUntgq2skkE/s320/embassy.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391602179003554290" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं है अफगानिस्तान में भारतीय प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आठ अक्टूबर को भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान में बढ़ते भारतीय प्रभाव को न सिर्फ नेस्तनाबूद करना चाहता है बल्कि वहां भारतीय ठिकानों पर हमले करवाकर उसे अफगानिस्तान से बाहर भगाना चाहता है।&lt;br /&gt;हाल ही एक अमेरिकी अधिकारी ने राष्ट्रपति बराक ओबामा को सौंपी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि अफगानिस्तान में बढ़ते भारतीय प्रभाव से परेशान पाकिस्तान तालिबान को खुलकर खेलने के लिए उकसा रहा है और उसे अमेरिकी फौजों समेत गठबंधन सेनाओं पर हमले के लिए छुपे तौर पर असलहा उपलब्ध कराने से भी नही चूक रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत का अफगानिस्तान में प्रभाव पाकिस्तान को किसी भी सूरत मे बर्दाश्त नहीं है। वह हद से गुजर कर भी भारत को मध्य एशिया के मुहाने पर अपने कदम जमा लेने की सहूलियत नहीं देना चाहता। रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की गई थी कि पाकिस्तान तालिबान को भारतीय ठिकानों पर आत्मघाती हमले के लिए भी उकसा सकता है। दो हफ्ते पहले दी गई रिपोर्ट की स्याही सूखी भी नहीं थी कि वाकई तालिबान ने आत्मघाती हमला कर काबुल में भारतीय दूतावास को उड़ाने की कोशिश कर डाली। &lt;br /&gt;गुरुवार 8 अक्टूबर की सुबह साढ़े आठ बजे काबुल में भारतीय दूतावास के बाहर  विस्फोटक से लदी कार चला रहे एक हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस हमले में दो अफगान पुलिसकर्मियों समेत 17 लोग मर गए, जबकि 80 से ज्यादा जख्मी हो गए थे। हालांकि तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी अपने सिर ली है लेकिन अफगानिस्तान सरकार और खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि हमला पाकिस्तान के इशारे पर किया गया है। स्थानीय समय के अनुसार सुबह साढ़े आठ बजे भारतीय दूतावास के बाहर हुए विस्फोट से दूतावास की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई और निगरानी टावर बर्बाद हो गया। अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमले की साजिश एक देश में रची गई। बीते साल सात जुलाई को भी इसी दूतावास पर हुए आत्मघाती भी आईएसआई और पाकिस्तान की ही करतूत बताया गया था। &lt;br /&gt;पाकिस्तान का मानना है कि अगर भारत के पैर अफगानिस्तान में जमे तो वह लोकतंत्र को उस देश में आक्सीजन प्रदान करेगा। अगर वहां लोकतंत्र आता है तो पाकिस्तान उससे उपजने वाली सकारात्मक बयार से स्वयं को बचा नहीं सकेगा। धार्मिक आधार पर बने पाकिस्तान की सत्ता सच्चे लोकतंत्र से वैसे ही घबराती है जैसे शेर को देखकर मेमने की मां। इसी वजह से पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान में पैर जमा रहे भारत को उखाड़ फैंका जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-2458280448901609394?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/2458280448901609394/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_09.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2458280448901609394'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/2458280448901609394'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_09.html' title='&lt;strong&gt;हमले करवा कर भारत को भगाना चाहता है पाकिस्तान&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StLRnam6mfI/AAAAAAAAAMg/vUntgq2skkE/s72-c/embassy.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-7772671734574154988</id><published>2009-10-09T11:23:00.000-07:00</published><updated>2009-10-11T21:36:50.132-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आजादी'/><title type='text'>आजादी के 22 दिन बाद ही फिर माउंटबेटन को सौंप दी थी सत्ता</title><content type='html'>&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 232px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StKyKL9WJxI/AAAAAAAAALo/auUz2XkiirA/s320/Nehru+and+sarder.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391567591994435346" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नेहरू और पटेल ने निसंकोच होकर कहा था कि देश का संचालन आप ही संभालिए&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;क्या कोई यकीन करेगा कि हजारों-लाखों शहीदों के बलिदान और आजादी के दीवानों के वर्षों तक जेलों में सडऩे से मिली स्वतंत्रता के बाद विभाजन की वजह से बह निकली खून की नदियों का प्रवाह थामने में नाकाम देश के प्रथम प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने देश के संचालन का दायित्व उसी माउंटबेटन को सौंप दिया था जिसने मात्र 22 दिन पहले ही उन्हें आजाद भारत की सत्ता सौंपी थी। शायद समूचे देश में आज भी कोई इस तथ्य को स्वीकार नहीं करेगा लेकिन कड़वी सच्चाई यही है कि 6 सितम्बर 1947 की सुबह दिल्ली में तत्कालीन गवर्नर जनरल भवन (आज का राष्ट्रपति भवन) के अध्ययन कक्ष में मौजूद तीन व्यक्तियों भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन, प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू और प्रथम गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के बीच जो वार्तालाप हुआ उसकी परिणीति देश में पहली आपातकाल समिति के रूप में सामने आई।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लपलपा रही थी दंगों की आग&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;साम्प्रदायिक दंगों की आग की लपटें पंजाब को झुलसा कर जब दिल्ली की तरफ बढ़ीं तो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को स्थिति की भयावहता का अंदाजा हुआ। दोनों अच्छी तरह समझ गए कि अगर दिल्ली को गिरने से नहीं बचाया गया तो भारत भी नहीं बचेगा। लपलपाती दंगों की आग दिल्ली को झुलसाने के साथ ही समूचे उत्तर भारत को निगलने की कोशिश कर रही थी। प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ था। हालात पूरी तरह बेकाबू थे। उन्हें काबू करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जिसके पास लम्बा प्रशासनिक अनुभव हो। नेहरू, पटेल और नए मंत्रिमण्डल के नेता सत्याग्रह और आंदोलन करना तो जानते थे लेकिन अराजकता को कुचलने का उन्हें कभी मौका नहीं मिला। आखिरकार दोनों ने उस वीपी मेनन को शिमला पहुंचकर आराम फरमा रहे लार्उ माउंटबेटन को बुलाने का दायित्व सौंपा जिसने विभाजन योजना को अमलीजामा पहनाने में माउंटबेटन की सहायता की थी। मेनन तत्कालीन वायसराय के निजी स्टॉफ का अधिकारी था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सत्याग्रह का अनुभव है, प्रशासन का नहीं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वीपी के फोन पर यह कहने के बाद कि दिल्ली फूट पड़े दंगों के बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की चिंता का पारावार नहीं है और वे उनसे मशविरा करना चाहते हैँ, माउंटबेटन ने एक बार तो आने से मना कर दिया लेकिन जब मेनन ने उन्हें कहा कि अगर वे अगले चौबीस घंटों में वापस दिल्ली नहीं आएं तो फिर कभी नहीं आएं क्योंकि तब तक भारत को बचाया नहीं जा सकेगा। चार सितम्बर की रात टेलीफोन पर हुई इस बातचीत के बाद छह सितम्बर की सुबह तीनों नेताओं के बीच जो बातचीत हुई। उसका सार ये कि अपनी राजनीतिक जिंदगी की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने माउंटबेटन से निसंकोच कहा कि जीवन के सर्वश्रेष्ठ वर्ष ब्रिटिश सरकार की जेलों में गुजार कर सत्ता में आए हम लोग सत्याग्रह के अनुभवी है। हां अगर सामान्य स्थितियों में कोई सुगठित सरकार हमें मिलती तो हम उसे चला ले जाते लेकिन पूर्ण अराजकता वाली इस स्थिति से निपटने का कोई रास्ता उन्हें नहीं सूझ रहा है। नेहरू ने कहा कि मैं अपने व्यक्तिगत गौरव को इतना महत्व कभी नहीं दूंगा कि देश की आवश्यकताएं मेरी खातिर ताक पर रख दी जाएं। वैसे भी इतने बड़े देश को इतनी गम्भीर समस्या के साथ एकाएक हमारे कंधों पर रखकर आप अपना पूरा सहारा कैसे हटा सकते हैं। हम आपातकाल में फंस गए हैं और रातोंरात खिसकने की फिराक में हैं। क्या आप देश का संचालन अपने हाथों में लेंगे। सरदार पटेल ने भी नेहरू की बात का अनुमोदन किया और कहा कि आपको देश का संचालन संभालना ही चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रहस्य छिपाने के लिए बनी आपातकाल संचालन समिति&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;हतप्रभ रह गए माउंटबेटन ने दोनों नेताओं को समझाने की चेष्टा की कि अगर किसी तो पता चल गया कि आप दोनों ने देश वापस मेरे हाथों में सौंप दिया है तो राजनीतिक रूप से आप दोनों खत्म हो जाएंगे। नेहरू ने कहा कि यदि आपने इंकार कर दिया तो देश हमसे नहीं संभलेगा। रही बात दूसरों को पता चल जाने की तो हमें कोई ऐसा तरीका ढूंढना होगा जिससे रहस्य छिपा रहे। इसी रहस्य को छिपाए रखने के लिए देश में लार्ड माउंटबेटन की अध्यक्षता में पहली आपातकाल संचालन समिति बनी और उसमें मंत्रिमण्डल के सदस्यों की अपेक्षा सिविल एविएशन, रेलवे और इण्डियन मेडिकल सर्विसेज के हैड को सदस्य बनाया गया।&lt;br /&gt;इतिहास में दर्ज है कि उसी आपातकाल संचालन समिति ने दंगों पर काबू पाने के प्रयास के तौर पर सबसे पहले पाकिस्तान से आने और जाने वाली ट्रेनों की सुरक्षा के लिए तैनात उन सैनिकों को कोर्ट मार्शल कर गोली से उड़ाने के आदेश दिए जो दंगाइयों पर गोलियां चलाने से कतराते थे। अत्याचार की वीभत्स कथाएं लेकर दिल्ली में घुसी आ रही शरणार्थियों की भीड़ को राजधानी से बाहर निकालकर शरणार्थी कैम्पो मे सीमित कर दिया गया। वायुसेना के पायलटों को एक-दूसरे देश में जा रहे हिंदू-मुस्लिम कारवां पर नजर रखने के आदेश दिए गए। वायुयानों से उन पर भोजन और दवा के पैकेट भी गिराए गए। करीब तीन हफ्ते में स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया गया लेकिन तब तक कश्मीर समस्या मुंह बाएं खड़ी हो गई थी।&lt;br /&gt;नेहरू और पटेल का माउंटबेटन को स्वतंत्रता के तीन हफ्तों बाद ही देश का संचालन सौंप देने का विवरण कभी बाहर नहीं आ पाया लेकिन 1971 में लार्ड माउंटबेटन ने दो फ्रांसिसी लेखकों लैरी कांलिन्स और दामनिक लैपियर को दिए साक्षात्कारों में दस्तावेजी सबूतों के आधार पर इस रहस्य को तब उजागर किया जब दोनों ही नेता दुनिया छोड़ चुके थे। साक्षात्कारों के आधार पर दोनों लेखकों ने माउंटबेटन और भारत का विभाजन पुस्तक में माउंटबेटन के हवाले से ही इस वाकये का वर्णन किया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-7772671734574154988?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/7772671734574154988/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/22.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/7772671734574154988'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/7772671734574154988'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/22.html' title='&lt;strong&gt;आजादी के 22 दिन बाद ही फिर माउंटबेटन को सौंप दी थी सत्ता&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/StKyKL9WJxI/AAAAAAAAALo/auUz2XkiirA/s72-c/Nehru+and+sarder.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-3346166157346816732</id><published>2009-10-07T12:44:00.000-07:00</published><updated>2009-10-07T20:32:14.619-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पाकिस्तान'/><title type='text'>पाकिस्तानी सेना ने नोंचा अपना ही नकाब</title><content type='html'>&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 320px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1dJZfEoNI/AAAAAAAAAKY/Vc0J90nmRWk/s320/us_pakistan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5390066745073770706" /&gt;&lt;br /&gt;अमेरिका से मिलने वाली मदद का भारत के खिलाफ उपयोग नहीं कर पाने की शर्त से नाखुश पाकिस्तानी सेना ने अपने चेहरे से स्वयं ही उस नकाब को नोंच लिया है जिसका इस्तेमाल वह पाकिस्तान को भारत के खिलाफ उकसा कर अब तक अपना उल्लू सीधा करती आई है। हाल ही लंदन में रह रहे पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ ने यह रहस्योद्घाटन कर दुनिया के सामने उस तथ्य को उजागर कर दिया था जिसके चलते भारत को पिछले कई दशकों से कश्मीर में छद्म युद्ध का सामना करना पड़ रहा था। मुशर्रफ ने पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी मदद का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने की कोशिशों में करने की स्वीकारोक्ति कर ली थी। &lt;br /&gt;इसके बाद अमेरिका ने अगले पांच साल में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद को बढ़ाकर तीन गुना तो कर दिया लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए कुछ शर्तें तय कर दीं। इनमें सबसे प्रमुख शर्त मदद का भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना प्रमुख है। इसी शर्त से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि अमेरिकी शर्तों से पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता पर असर पड़ेगा। &lt;br /&gt;अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले हफ्ते इस मदद से जुड़े एक विधेयक [बिल] को पास कर पाकिस्तान को अगले पांच साल तक अमेरिका से हर साल डेढ़  अरब डालर की मदद मिलने का रास्ता साफ कर दिया। इस विधेयक पर अब सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के हस्ताक्षर होना बाकी हैं। है। 'केरी लूगर बिल' नाम से चर्चित इस विधेयक को तैयार करने वाले सांसद जान केरी का कहना है कि मदद के लिए पाकिस्तान पर कोई शर्त नहीं थोपी गई है। लेकिन, पाक सेना का कहना है कि विधेयक की कुछ शर्ते पाकिस्तान के आंतरिक मामले में गंभीर हस्तक्षेप हैं। &lt;br /&gt;थल सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कियानी की अध्यक्षता में पाक सेना के प्रमुख कमांडरों की इस मसले पर पिछले दिनों हुई लम्बी बैठकों में फैसला किया गया कि विधेयक पर आपत्तियों को पाक सरकार को भेजा जाएगा। इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार और सेना में टकराव की नौबत भी आ सकती है। बैठक के बाद सेना की ओर से जारी बयान में हालांकि आपत्तियों का खुलासा नहीं किया गया लेकिन पाकिस्तानी अखबार 'डान' ने सैन्य सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सेना बिल की शर्तो को देश के आंतरिक मामले में अमेरिकी घुसपैठ मानती है। &lt;br /&gt;बिल में कहा गया है कि इस रकम के लिए पाकिस्तान को अमेरिकी विदेश मंत्रालय को यह प्रमाण पत्र देना होगा कि उसके सशस्त्र बलों की पाकिस्तान की राजनीतिक और न्यायिक प्रक्रिया में कोई दखल नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय हर छह माह पर इसका आकलन करेगा। इसमें यह भी जांच की जाएगी कि अमेरिकी मदद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम के विकास के लिए तो नहीं इस्तेमाल की जा रही? इधर पाकिस्तान सरकार ने स्वीकार किया है कि बिल पर सेना के कमांडरों ने कुछ आपत्तियां  दर्ज कराई हैं। सेना का कहना है कि अमेरिका के इस बिल पर पाक संसद में बहस होनी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-3346166157346816732?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/3346166157346816732/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_128.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3346166157346816732'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/3346166157346816732'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_128.html' title='&lt;strong&gt;पाकिस्तानी सेना ने नोंचा अपना ही नकाब&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1dJZfEoNI/AAAAAAAAAKY/Vc0J90nmRWk/s72-c/us_pakistan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5023301416638422881</id><published>2009-10-07T12:15:00.000-07:00</published><updated>2009-10-07T20:34:21.307-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तालिबान'/><title type='text'>रूसियों की तरह अपमानित नहीं होना चाहता अमेरिका</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 259px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1djzEKKPI/AAAAAAAAAKg/vWFQhJe39T8/s320/taliban-fighters.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5390067198616807666" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;और बढ़ेगी अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की तादाद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;आखिरकार अमेरिका ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के बीच स्थित कबाइली इलाके को जिहादियों का गढ़ करार देने के साथ ही इस क्षेत्र में पाकिस्तानी नीति का खुलासा भी कर दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद वह इस इलाके से जिहादियों का सफाया किए बिना नहीं लौटेगा। &lt;br /&gt;रणनीतिक लिहाज से देखा जाए तो दक्षिण और मध्य एशिया के प्रवेश द्वार अफगानिस्तान में जिहादियों का सफाया इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक है लेकिन इसी बीच अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के नेता जॉन मैक्केन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि पाकिस्तानी आईएसआई तब तक आतंकवादियों की मदद बंद नहीं करेगी जब तक उसे अमेरिकी फौजों के वापस लौटने के संकेत नहीं मिल जाते। मैक्केन ने साफ कहा कि वे इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि जैसे ही पाकिस्तान को अमेरिकी फौजों के लौटने का संकेत मिलेगा इस क्षेत्र में तमाम चीजें बदल जाएंगी। साथ ही आईएसआई और पाकिस्तान सरकार के व्यवहार में भी विलोम परिवर्तन आ जाएगा।&lt;br /&gt;अमेरिका का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की विजय से अलकायदा को अपनी पैठ मजबूत करने का मौका मिलेगा। व्हाइट हाउस में संबंधित रणनीतिक समीक्षाके बाद पाकिस्तान को अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस नहीं बुलाने का आश्वासन भी इसी आधार पर दिया गया है क्योंकि पाकिस्तानी नरमपंथी यह मानते हैं कि अगर अलकायदा को अफगानिस्तान में पकड़ मजबूत करने का मौका मिला तो आने वाले वक्त में पाकिस्तान को उनकी झोली में गिरने से कोई नहीं बचा सकता है।&lt;br /&gt;अमेरिका का मानना है कि  अलकायदा और तालिबान के खिलाफ मुहिम पूरी होने से पहले अफगानिस्तान से  फौजों की वापसी दुनिया के अन्य हिस्सों में कट्टरपंथी आंदोलन को बल देने वाला कदम साबित होगी।  अमेरिकी-नाटो सेनाओं की हार का हल्का सा संकेत भी अलकायदा को ताकतवर संदेश देगा। इधर वाशिंगटन में समान रूप से मजबूत एक धड़ा अफगानिस्तान में और सैनिक भेजने का विरोध कर रहा है। वैसे यह सर्वविदित तथ्य है कि अलकायदा और तालिबान अफगानिस्तान में अमेरिका को वैसे ही अपमानित करना चाहता है जैसे अस्सी के दशक में सोवियत फौजों को अफगानिस्तान छोडऩे के लिए बाध्य करके किया गया था। असल में इस समय अफगानिस्तान में पर्याप्त सैनिक रखने में अक्षमता की वजह से तालिबान उभार पर है। इधर अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के नेता जॉन मैक्केन ने दावा किया है कि  पाकिस्तान, खास तौर से आईएसआई आतंकवादियों के प्रति अपने रवैये में तभी बदलाव करेगा जब उसे संकेत मिलेंगे कि अमेरिका अफगानिस्तान छोड़ने वाला है।&lt;br /&gt;सीनेटर जॉन मैक्केन ने एक साक्षात्कार में कहा कि मैं आपको गारंटी देता हूं, अगर हम पाकिस्तान को इस बात का संकेत देते हैं कि हम अफगानिस्तान छोड़ रहे हैं तो हम केवल कल्पना कर सकते हैं कि वहां पर कई तरह की चीजें बदलेंगी। इसमें आईएसआई समेत पाकिस्तान सरकार का व्यवहार भी बदल सकता है। मैक्केन ने कहा कि हमारी मदद से अफगानिस्तान ने रूसियों को खदेड़ दिया। इसके बाद हम लोगों ने पूरी तरह इलाका छोड़ दिया। आखिरकार तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और उन्होंने अल कायदा के साथ काम करना शुरू कर दिया।उन्होंने अफगानिस्तान में अतिरिक्त सेना तैनात करने की वकालत भी की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5023301416638422881?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5023301416638422881/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_3882.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5023301416638422881'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5023301416638422881'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_3882.html' title='&lt;strong&gt;रूसियों की तरह अपमानित नहीं होना चाहता अमेरिका&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1djzEKKPI/AAAAAAAAAKg/vWFQhJe39T8/s72-c/taliban-fighters.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-5677204116156714145</id><published>2009-10-07T11:49:00.000-07:00</published><updated>2009-10-07T20:42:32.598-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चीन'/><title type='text'>पूंछ दबाकर क्यों बैठा है पाकिस्तान?</title><content type='html'>&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 264px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1fj_uiroI/AAAAAAAAAKo/uMzULY1425o/s320/Muslim+in+china.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5390069401039056514" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चीनी प्रांत सिक्यांग में जारी है इस्लाम का दमन&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;सिक्यांग में इस्लाम का दमन ऐसा मुद्दा है जिसने पाकिस्तान को पूंछ दबाकर बैठने के लिए मजबूर कर दिया है। कश्मीर में मुसलमानों को तमाम हक-हकूक हासिल होने के बाद भी पाकिस्तान आए दिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीखता-चिल्लाता रहता है लेकिन सिक्यांग में मुसलमानों को सामूहिक रूप से जुमे की नमाज तक अदा करने का हक नहीं हैं। इतना ही नहीं इस प्रांत में सूअर के बच्चों का मांस खुलेआम बेचा जाता है। मुसलमान युवतियों के साथ चीनी हान नस्ल के युवक जबरन शादी करके इस नस्ल को ही मिटा देने पर तुले हैं। &lt;br /&gt;आखिर उईगुर मुसलमान क्या चाहते हैं? वे जुम्मे की नमाज़ अदा करने , मस्जिदों में वजू करने हेतू नल का पानी मिलने, हज यात्रियों की संख्या में कटौती खत्म करने, रिहाइशी बस्तियों में सूअर के बच्चों का गोश्त न बेचने के साथ ही मांडरिन भाषा न लादे जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन मजहब के नाम पर बना विश्व का अकेला राष्ट्र पाकिस्तान खामोश है, क्योंकि चीन से उसकी घनिष्ठ दोस्ती है। चीन से शस्त्र, अनाज और इमदाद के मोहताज पाकिस्तान के लिए मजहबी उइगुर मुसलमानों पर चीन द्वारा ढाया जा रहा यह कहर कोई अहमियत नहीं रखता है। तिब्बत तथा मुस्लिम सिक्यांग को उपनिवेश बनाए रखने के लिए चीन ने लद्दाख से सटे अक्साईचिन पर कब्जा कर सिक्यांग में चीनी सेना के आने-जाने का सुगम रास्ता बना लिया है। &lt;br /&gt;1949 में चीनी जनवादी गणराज्य की घोषणा होने के सालभर बाद ही माओ ने ल्हासा (तिब्बत) और सिक्यांग पर कब्जा यह कहते हुए कब्जा कर लिया कि ये दोनों बौद्घ तथा इस्लामी राष्ट्र चीन के स्वायत्तशासी प्रान्त हैं।  चीन ने सिक्यांग से तिब्बत तक चुपचाप एक गलियारा बना लिया। चीन ने भारत के जिस अक्साईचिन क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है उस पर प्रशासनिक नियंत्रण सिक्यांग के प्रागैतिहासिक नगर काशगर से होता है। काशगर पुरातत्व अध्ययन का एक रूमानी अध्याय है। यहीं मथुरा नरेश और कुषाण वंश के संस्थापक सम्राट कनिष्क का आविर्भाव हुआ था। महर्षि पतंजलि ने भारत और प्राचीन सिक्यांग के आदान-प्रदान का उल्लेख किया था। &lt;br /&gt;नवम्बर में सिक्यांग की अस्सी लाख जनता की गुलामी के छह दशक पूरे हो जाएंगे।  सवा अरब की हान नस्ल के चीनी लोगों के सामने उईगुर मुसलमानों की हैसियत ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लेकिन उनके विरोधी तेवर और स्वर के कारण चीन के बहुसंख्यक उन्हें मिटा देना चाहते है। इसके लिए तीन तरीके अपनाये गए हैं। उइगुरी युवतियों की जबरन हान युवकों से शादी कराने के साथ ही तुर्की भाषा की जगह चीनी मंडारिन को अनिवार्य कर दिया गया है। मुसलमानों के मजहबी दस्तूर और रवायतों पर पाबंदी लगा दी गई है। जनसंख्या की दृष्टि से 1949 में सिक्यांग में 95 प्रतिशत उइगुर मुसलमान और पांच प्रतिशत चीनी थे लेकिन आज दोनों की जनसंख्या लगभग बराबर हो गई है। इस्लामी पाकिस्तान जानता है कि सिक्यांग में  इस्लाम खतरे में है फिर भी मजहब का यह स्वयंभू ठेकेदार चीन से रिश्ते नहीं खराब करना चाहता। &lt;br /&gt;चीन के इस प्रांत में क्या हुआ और क्या हो रहा है, इसे समझना आसान नहीं है। तमाम आर्थिक प्रगति और आधुनिकीकरण के बाद भी चीन ने अभी अपने समाज की खिड़कियां और दरवाजे नहीं खोले हैं। सिक्यांग में तो प्रगति और आधुनिकीकरण भी नहीं पहुंचे हैं। यहां के मूल निवासी तुर्की पृष्ठभूमि के मुसलमान हैं, लेकिन यहां चीनी मूल के लोगों को भारी तादाद में बसाया है। &lt;br /&gt;इस प्रांत में हाल ही दंगों पर चीनी सरकार का दावा है कि कुछ इस्लामिक उग्रवादी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। लेकिन दंगों में हुई व्यापक हिंसा तथा डेढ़ सौ से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद चीनी सरकार के दावे पर यकीन करना कठिन है क्योंकि ज्यादातर लोग पुलिस गोली से मरे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-5677204116156714145?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/5677204116156714145/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1246.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5677204116156714145'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/5677204116156714145'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1246.html' title='&lt;strong&gt;पूंछ दबाकर क्यों बैठा है पाकिस्तान?&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1fj_uiroI/AAAAAAAAAKo/uMzULY1425o/s72-c/Muslim+in+china.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-1159897550741180017</id><published>2009-10-07T01:40:00.000-07:00</published><updated>2009-10-07T20:48:06.287-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तिब्बत'/><title type='text'>खंफा योद्धाओं से भयभीत है चीन</title><content type='html'>&lt;strong&gt;नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों पर सख्ती&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चीनी दबाव में सशस्त्र प्रहरियों की तैनाती&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नेपाल ने चीनी दबाव में नेपाल ने तातोपानी, मुस्तांग, किमाथंका, हुम्ला के लिमी और दाचरुला के टिंकर में सशस्त्र प्रहरी तैनात कर सिक्यांग में उईगुर मुसलमानों से जूझ रहे चीन को राहत प्रदान कर दी है। नेपाल के तिब्बती शरणार्थी बहुल इलाकों में फैले तिब्बती कबीले खंफा के योद्धाओं को काबू में करने के लिए चीन अर्से से नेपाल पर दवाब डाल रहा था। इस कबीले ने पूर्व में चीन की नाक में दम कर दिया था। पिछले दो वर्षों से तिब्बत में हो रहे उपद्रवों के पीछे इसी कबीले का हाथ माना जाता है। माओवादी शासन आने के बाद नेपाल की चीन में नीति में महत्वपूर्ण बदलाव की कोशिश की गई लेकिन प्रचंड सरकार गिर जाने से उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इसके बावजूद नेपाल के चीन से सटे तिब्बती शरणार्थी बहुल इलाके में सशस्त्र प्रहरियों की तैनाती चौंकाने वाली है। तीन माह पूर्व कई नेपाली सांसदों ने धर्मशाला में तिब्बती निर्वासित नेता दलाई लामा से मुलाकात की थी। इस भेंट को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा गया। &lt;br /&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 303px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1gk2qTgPI/AAAAAAAAAKw/HJANV9GU8Qw/s320/tibet.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5390070515296862450" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;खंफा को अमेरिकी मदद की आशंका&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;माना जा रहा है कि खंफा कबीला तिब्बत की स्वतंत्रता को लेकर फिर से संघर्ष की तैयारी में जुटा हुआ है और उसे अमेरिकी मदद भी मिल रही है। कई अमेरिकी अधिकारियों की नेपाल में पिछले तीन माह में हुई यात्राओं के दौरान खंफा कबीले के नेताओं से मुलाकात भी संदेह के घेरे में है। इस तैनाती के साथ ही नेपाल ने शरणार्थी कानून को भी सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। कभी प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में नेपाल में शरण लेने वाले तिब्बतियों को बसने तथा रोजगार की अनुमति नहीं दी जा रही। नेपाल 1989 के बाद आए तिब्बती शरणार्थियों को भारत का रास्ता दिखा रहा है। इसके लिए हर तरह की सख्ती की जा रही है। हालांकि भारत में भी तिब्बतियों के प्रवास तथा रोजगार पर कई तरह के प्रतिबंधों के साथ निगरानी रखी जाती है लेकिन सहानुभूतिपूर्ण रवैये के साथ। &lt;br /&gt;नेपाल में तिब्बतियों के साथ ताजा सख्ती को हिमालय में तेजी से बढ़ रही अमेरिकी रुचि से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका नेपाल में बसे खंफा कबीले को 1962 तक गोपनीय सशस्त्र मदद देता रहा था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के बाद उसकी तिब्बत नीति में बदलाव आ गया था और उसने खंफा कबीले को मदद लगभग बंद कर दी थी। &lt;br /&gt;अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण के बाद चीन से मिल रही चुनौती से परेशान अमेरिका अब फिर से चीन को काबू में रखने के प्रयास कर रहा है। तिब्बत मामलों के जानकारों के मुताबिक खंफा कबीले को फिर से मदद देकर अमेरिका नेपाली सीमा से सटे तिब्बती इलाकों में विप्लव को हवा देना चाहता है ताकि पहले से सिक्यांग में उईगुर मुसलमानों से परेशान चीन की मुश्किलों में इजाफा हो सके। सम्भवत: अमेरिका की इसी रणनीति को भांप कर चीन ने नेपाल पर सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात करने का दबाव बनाया जिसे अमलीजामा पहनाने से पूर्व ही माओवादी सरकार गिर गई थी लेकिन चीनी दबाव कम नहीं हुआ था। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केन्द्र में रहेगा तिब्बत&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इधर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा की प्रस्तावित मुलाकात रद्द किए जाने के निर्णय को भी तिब्बत पर अमेरिकी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका ने इसका जोरदार खंडन करते हुए जोर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की नवम्बर में होने जा रही चीन यात्रा के दौरान मानवाधिकार, धार्मिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर अमेरिकी असहमति बरकरार रहेगी और इन मुद्दों पर अगर बात होगी तो निश्चित तौर पर तिब्बत पर अमेरिकी नीति उसका केन्द्र बिन्दु होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति से दलाई की यह मुलाकात अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित थी। वैसे 1991  के बाद यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति तिब्बतियों के धर्मगुरू दलाई लामा के वाशिंगटन प्रवास के दौरान उनसे मुलाकात नहीं करेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5952415032496032602-1159897550741180017?l=defencereview.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://defencereview.blogspot.com/feeds/1159897550741180017/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1167.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1159897550741180017'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5952415032496032602/posts/default/1159897550741180017'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://defencereview.blogspot.com/2009/10/blog-post_1167.html' title='&lt;strong&gt;खंफा योद्धाओं से भयभीत है चीन&lt;/strong&gt;'/><author><name>Defence Review</name><uri>http://www.blogger.com/profile/05885882616369931941</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_VU3YFlt6G68/Ss1gk2qTgPI/AAAAAAAAAKw/HJANV9GU8Qw/s72-c/tibet.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5952415032496032602.post-4437562384591549859</id><published>2009-10-07T00:39:00.000-07:00</published><updated>2009-10-07T20:52:57.106-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बलूचिस्तान'/><title type='text'>पाकिस्तानी गले की घंटी बने बलूचिस्तान में हस्तक्षेप के आरोप</title><content type='html'>&lt;strong&gt;फिर केन्द्र में आई बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;पांच बार केन्द्रीय शासन के फौजी दमन को झेल चुके बलूचिस्तान में भारत के हस्तक्षेप के आरोप पाकिस्तान के गले की घंटी बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आतंक के कारखाने का खिताब पा चुके पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में उपद्रवों के लिए भारतीय जासूसी संस्था रॉ को ज
